खुद की कंपनी चलाते हुए पूरी की पढ़ाई, कॉलेज से मिला 30 लाख का पैकेज

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12वीं की परीक्षा में टॉप करने के बाद आशिमा ने दिल्ली के स्टीफन कॉलेज से बीए करने का फैसला लिया। आशिमा को समाज को करीब से समझने का बहुत शौक रहा है। इसी वजह से उन्हें सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना हमेशा से पसंद है...

फोटो साभार: सोशल मीडिया
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महिलाओं और छोटे बच्चों को ध्यान में रखते हुए आशिमा जैन ने लक्ष्यम नामक एनजीओ के साथ मिल कर उनके बेहतर भविष्य के लिए उठाये हैं कई बड़े कदम। 

आशिमा अपनी पढ़ाई के साथ साथ कई सोशल सर्विसेज से भी जुड़ी रहीं और अपना भरपूर योगदान दिया। वह कॉलेज के दिनों में एक सोशल आंत्रेप्रेन्योरशिप अॉर्गेनाईजेशन की प्रेसिडेंट भी रह चुकी हैं।

वो दौर बीत गया जब हमारे समाज में लड़कियों को पर्दे से निकलने की इजाज़त नहीं थी। आज वक्त बदल चुका है और इस बदलते वक्त के साथ-साथ हमारा समाज भी आगे बढ़ रहा है, आज लोग बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं समझते हैं। बल्कि बेटियां हर क्षेत्र में बढ़-चढ़ अपनी भूमिका निभा रही हैं और सफलता हासिल करने में चार कदम आगे निकल रही हैं।

राजस्थान की आशिमा जैन अपनी शुरूआती शिक्षा ग्रहण कर दिल्ली के नामी सेंट स्टीफन कॉलेज में इकोनॉमिक्स से बीए ओनर्स की डिग्री ले चुकी हैं। उन्हें अपनी छोटी उम्र से ही कुछ अलग हट कर करने की चाहत रही है। वे हमेशा से अपने सपनों को हकीकत में बदलने की हर संभव प्रयास में लगी रहती हैं। जयपुर शहर की रहने वाली आशिमा एक बड़े घर से ताल्लुक रखती हैं। उन्हें बचपन से ही पढ़ने-लिखने में बहुत रूचि रही है। उन्होंने 12वीं में 96.40 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपने परिवार के साथ अपने समाज का भी नाम ऊंचा किया।

12वीं की परीक्षा में टॉप करने के बाद आशिमा ने दिल्ली के स्टीफन कॉलेज से बीए करने का फैसला लिया। आशिमा को समाज को करीब से समझने का बहुत शौक रहा है। इसी वजह से उन्हें सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना पसंद है। उन्होंने कई सामाजिक संगठनों में अपना भरपूर योगदान दिया है। कॉलेज के दिनों में वो अपने 5 दोस्तों के साथ इन्होंने बजीफाई एनपीओ (नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन) की शुरुआत कर समाज को सही दिशा दिखाने के लिए अपनी ओर से पहल की।

बजिफाई एनपीओ संगठन के बैनर तले आशिमा ने दिल्ली में चल रहे कई छोटे-बड़े एनजीओ की मार्केटिंग के साथ उसकी पब्लिसिटी कर अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करने में अपना योगदान दिया। अपने दोस्तों के साथ मिल कर उन्होंने सेफ सिटी कैम्पेन चला कर शहर के हर क्षेत्र को बारीकी से निहारा और वहां की कमियों को परखते हुए आम जनता की तकलीफों को दूर करने के लिए काम किया। अंधेरी गलियों में स्ट्रीट लाइट और कैमरा लगाने जैसे अहम मुद्दों को अपनी फाइल में नोट किया। जिस क्षेत्र में महिला पुलिसकर्मी की कमी थी उसकी भी लिस्ट बनाई और दिल्ली पुलिस को सौंपा।

समाज की महिलाओं और छोटे बच्चों को ध्यान में रखते हुए आशिमा जैन ने लक्ष्यम नामक एनजीओ के साथ मिल कर उनके बेहतर भविष्य के लिए भी कई बड़े काम किये। बिडफ फॉर बैटर में इन्होंने समाज के लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक कर उन्हें कई महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत करवाया। दक्षणा नामक एनजीओ के साथ मिल कर आशिमा ने शहर से रद्दी पेपर इकट्ठा किया और उसकी रीसाइक्लिंग कर लोगों को पर्यावरण के प्रति भी जागरूक किया। वो कॉलेज के दिनों में एक सोशल आंत्रेप्रेन्योरशिप आर्गेनाईजेशन की प्रेसिडेंट भी रह चुकी हैं। हाल ही में उन्हें कॉलेज के कैंपस प्लेसमेंट में मल्टीनेशनल कंपनी पार्थनन की ओर से 30 लाख की पैकेज मिली है।

आशिमा जैन उन लोगों के लिए उदाहरण हैं, जो आज के इस बदलते वक्त में भी अपनी बेटियों को बोझ समझते हैं और उनकी शिक्षा एवं विकास पर रोक लगा देते हैं। अपने आप में एक मिसाल बन कर उभरती इस बेटी के ऊपर आज न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे समाज एवं देश को नाज़ है।

प्रस्तुति: उत्पल आनंद

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