अब कोच्चि मेट्रो में दिखेंगे ट्रांसजेंडर कर्मचारी, 23 ट्रांसजेंडर्स को मिली नौकरी

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केरल में करीब 30,000 ट्रांसजेंडर्स रहते है। साल 2015 में केरल ने ट्रांसजेंडर्स के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए ट्रांसजेंडर पॉलिसी की शुरूआत हुई थी। ट्रांसजेंडर पॉलिसी बनाने वाला, केरल, भारत का पहला राज्य है। केरल सरकार ने इस पॉलिसी के अंतर्गत ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को रोजगार और उनकी सुरक्षा का वादा किया था। कोच्चि मेट्रो में हुई ताज़ा पहल को देखकर, ये यकीन किया जा सकता है, कि वादे को पूरा करने की शुरुआत हो चुकी है...

अब कोच्चि मेट्रो में दिखेंगे ट्रांसजेंडर कर्मचारी। देश में शायद ऐसा पहली बार हो रहा है, कि सरकार के अंडर काम करने वाली एक कंपनी इतनी ज्यादा संख्या में थर्ड जेंडर को नौकरी दे रही है।

केरल के कोच्चि में मेट्रो शुरू होने जा रही है। अगर आप कोच्चि मेट्रो में सफर करें, तो हो सकता है कि टिकट की खिड़की पर बैठा व्यक्ति ट्रांसजेंडर हो। ऐसे में आपको चौंकना नहीं है, क्योंकि ये सच है कि कोच्चि मेट्रो में ऐसे 23 लोगों को नौकरी दी गई है जिन्हें समाज में एक अलग नजरिए से देखा जाता है। ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा में लाने और उन्हें रोजगार के साधन उपलब्ध कराने के लिए उन्हें मेट्रो में नौकरी दी गई है। इन्हें उनकी योग्यता के हिसाब से हाउस कीपिंग, टिकट काउंटर जैसे अलग-अलग विभागों में काम की जिम्मेदारी दी गई है। देश में शायद ये पहली बार हो रहा है कि सरकार के अंडर काम करने वाली एक कंपनी इतनी ज्यादा संख्या में थर्ड जेंडर के लोगों को नौकरी दे रही है। इनमें से अधिकतर लोग पढ़े हुए हैं, इसलिए उन्हें बड़ी जिम्मेदारी दी जायेगी, वहीं कुछ ट्रांसडजेंडर ऐसे भी हैं जिनकी शैक्षणिक योग्यता कम है। इसलिए उन्हें हाउसकीपिंग और क्लीनिंग डिपार्टमेंट में काम पर लगाया जायेगा।

केरल मेट्रो रेल लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एलियास जॉर्ज ने बताया, 'ट्रांसजेंडर लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए ये प्रयास किया जा रहा है। हमें उम्मीद है कि हमारी पहली कोशिश सफल होगी। हम ये भी मान रहे हैं कि इससे बाकी कंपनियों को भी प्रेरणा मिलेगी और ऐसे लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलेगा।'

इन ट्रांसजेंडर्स को यूं ही नौकरी पर नहीं रखा गया है। इन्हें बकायदा लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के बाद ही नौकरी दी गई है। मेट्रो के अधिकारियों के मुताबिक अभी ये ट्रेनिंग से गुजर रहे हैं। अगर इनकी परफॉर्मेंस अच्छी रही, तो बाकी के ट्रांसजेंडर को नौकरी का मौका मिलेगा।

केरल में करीब 30,000 ट्रांसजेंडर्स रहते है। साल 2015 में केरल ने ट्रांसजेंडर्स के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए ट्रांसजेंडर पॉलिसी की शुरूआत हुई थी। ट्रांसजेंडर पॉलिसी बनाने वाला केरल, भारत का पहला राज्य है। केरल सरकार ने इस पॉलिसी के अंतर्गत ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को रोजगार और उनकी सुरक्षा का वादा किया था। इसके अलावा 2016 में सरकार ने 60 साल से अधिक उम्र वाले ट्रांसजेंडर्स के लिए पेंशन स्कीम भी लागू की है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 89 प्रतिशत ट्रांसजेंडर्स के साथ काम के दौरान छेड़छाड़ या गलत व्यवहार होता है। वहीं 28 फीसदी ट्रांसजेंडर्स का मानना है, कि उनके दोस्त ही ऐसा काम करते हैं।

नौकरी पाने वाली एक ट्रांसजेंडर चित्रा ने कहा, कि 'हम काम करने के लिए बहुत उत्साहित हैं। हम उम्मीद करते हैं कि बाकी कंपनियों में भी हमारे लिए दरवाजे खुलेंगे।'

सरकार ने ट्रांसजेंडर्स की समस्या सुनने के लिए एक ट्रांसजेंडर जस्टिस बोर्ड का गठन किया है। इसके साथ ही राज्य में सभी सरकारी इमारतों में ट्रांसजेंडर्स के लिए अलग से वॉशरूम की व्यवस्था करनी जरूरी है। कोच्चि मेट्रो लगभग बनकर तैयार है और अगले महीने हो सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसका उद्घाटन करें। मेट्रो में ट्रांसडेंजर कर्मचारियों के शामिल होने से समाज में बदलाव लाने का ये बेहतर प्रयास होगा और इससे और कई कंपनियों में उनके लिए नौकरी के दरवाजे खुलेंगे। 

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