फर्नीचर रेंट पर चाहिए? जस्ट ऑन रेंट डॉट कॉम क्लिक करें,पाएं चैन की नींद 

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हम सबने कभी ना कभी इस परेशानी का ज़रूर सामना किया है, जब पढाई या नौकरी के सिलसिले में हमें घर की सुख-सुविधाओं को छोड़ना पड़ता है और किसी दूसरे शहर में बसेरा बनाना पड़ता है. काम या पढाई के साथ-साथ किराये का घर ढूंढना, घर में रोज़मर्रा की ज़रूरत का सामान जुटाना बहुत बड़ा सिरदर्द होता है. अगर आपने सामान जुटा भी लिया तो भी कुछ दिनों या महज़ कुछ सालों तक ही ये आपकी समस्या का समाधान होता है. असली परेशानी तो तब शुरू होती है जब शहर बदलने की नौबत आ जाये. ऐसे में फर्नीचर किसी को देने या कौड़ियों के भाव बेचने के अलावा आपके पास कोई चारा नहीं होता. फिर नया शहर और एक बार फिर वही परेशानियाँ. राहुल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. मुंबई के रहनेवाले राहुल को नौकरी के सिलसिले में कोलकाता शिफ्ट होना पड़ा. ज़रूरत पड़ने पर राहुल ने कुछ फर्नीचर भी खरीद लिया. लेकिन कुछ दिनों बाद उनका ट्रान्सफर मुंबई हो गया. अब यही फर्नीचर उनकी परेशानी का सबब बन गया. उस वक़्त तो राहुल ने सारा फर्नीचर कौड़ियों के भाव बेच दिया लेकिन वो हमेशा इस परेशानी से निजात पाने के बारे में सोचने लगे. मुंबई आकर उन्होंने दोस्तों से इस बारे में चर्चा की और उन्हें लगा की कोई ऐसी सर्विस होनी चाहिए जहाँ ज़रूरत के मुताबिक फर्नीचर रेंट पर ले सकें. कुछ ऐसी ही मुश्किलों का सामना कर चुके दोस्तों ने भी साथ दिया और 2015 में उन्होंने JUSTonRENT.Com की शुरुआत की..


योर स्टोरी से बातचीत में राहुल ने कहा, 

"मैं 2012 में कोलकाता के कॉग्निजेंट में काम करता था. मैंने एक किराये का घर लिया और फिर ज़रूरत पड़ने पर कुछ फर्नीचर भी खरीद लिया. लेकिन कुछ ही दिनों बाद मेरा ट्रान्सफर मुंबई हो गया. ऐसे में मैं ये सारा फर्नीचर मुंबई लेकर नहीं जा सकता था, इसलिए मुझे ये सब कुछ कौड़ियों के भाव बेचना पड़ा. ऐसा सिर्फ मेरे ही नहीं बल्कि मेरे कुछ और दोस्तों के साथ भी हुआ. और तभी काफी दिमागी कसरत के बाद हम सबको ऐसा लगा की कोई ऐसी सर्विस होनी चाहिए जहाँ कम पैसे में ज़रूरत का फर्नीचर रेंट पर मिल सके. जिससे बार-बार फर्नीचर खरीदने और बेचने की ज़रूरत ना पड़े. मैंने पुणे में कुछ स्टार्ट-अप्स के साथ काम किया और ऐसे शुरुआत हुई जस्ट ऑन रेंट.कॉम की.


राहुल
राहुल

शुरुआती दिक्कतें

राहुल शुरू से ही एक उद्दमी बनना चाहते थे, लेकिन मध्यम वर्गीय परिवार से होने के कारण, अच्छी खासी नौकरी छोड़कर अपना उद्दम शुरू करना, उनके लिए एक मुश्किल फैसला था. अपना उद्दम शुरू करने का मतलब था, हर महीने आनेवाली एक निश्चित तनख्वाह का बंद हो जाना. वो जानते थे की आनेवाले कुछ और महीने भी ऐसे ही होंगे, जहाँ कमाई कम और खर्चे ज्यादा होंगे. लेकिन इन सब मुश्किलों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. ऐसी मुश्किल घड़ी में उन्हें साथ मिला अपनी पत्नी का जो कॉग्निजेंट में नौकरी करती हैं और उनके काम में मदद भी. उनके माँ-बाप को शुरू में उनके फैसले पर थोडा ऐतराज़ था लेकिन अब वो भी उनके साथ हैं.

राहुल कहते हैं, 

"मैं और मेरी पत्नी हम दोनों कमाते थे और हमारे पास एक अच्छी जिंदगी जीने की सारी सुख-सुविधाओं थीं..लेकिन मेरे नौकरी छोड़ देने के बाद हर महीने आनेवाली तनख्वाह बंद हो गई और हमारे लाइफस्टाइल में काफी फर्क भी पड़ा. लेकिन पत्नी का साथ मिलने से हिम्मत बढ़ी है और पत्नी ही घर का खर्च चलाती है. मैं अपनी सेविंग, उद्दम को आगे बढ़ाने में इस्तेमाल करता हूँ"

अभी राहुल का बिज़नेस सेल्फ-फंडेड है और ज़रूरत पड़ने पर वो दोस्तों की मदद ले लेते हैं. पेशे से राहुल एक इंजीनियर है और उन्होंने एमबीए भी किया है. फिलहाल सेल्स, मार्केटिंग, ऑपरेशनस और फाइनेंस का काम वो खुद ही सँभालते हैं. हालांकि वो ई-कॉमर्स का ज़रूर शुक्रिया मानते हैं जिसकी वजह से कम लागत में ही उन्हें अपना उद्दम शुरू करने का मौका मिला. फिलहाल जस्ट ऑन रेंट .कॉम की सर्विस सिर्फ पुणे में ही है लेकिन उन्हें विश्वास है कि अच्छे कस्टमर बेस, कम कीमत पर रेंट पर फर्नीचर मिलने और वर्ड ऑफ़ माउथ मार्केटिंग का उन्हें ज़रूर फायदा होगा और आनेवाले वक़्त में वो देश और दुनिया के बाकि हिस्सों में भी इसकी शुरुआत कर सकेंगे...


राहुल कहते हैं, 

"फिलहाल फंडिंग के लिए हमारी बातचीत चल रही है और उम्मीद है की आनेवाले कुछ महीनों में ये हो जायेगा जिसकी मदद से हम पुणे के अलावा कुछ और शहरों में भी जस्ट ऑन रेंट.कॉम की शुरुआत कर सकेंगे. एक बार फंडिंग हो जाने पर हमें अपने तकनीकि, मार्केटिंग और सप्लाई चेन को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी. फिलहाल हम बेसिक फर्नीचर रेंट पर देते हैं लेकिन भविष्य में ऑफिस फर्नीचर, ऐडवेंचर गियर, लॉन्ग डिस्टेंस कैब्स और दूसरे घरेलू उत्पादों को भी रेंट पर देने की योजना है."


राहुल मानते हैं की रेंटिंग एक ग्लोबल प्रैक्टिस है और इसके और ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है. इसलिए फिलहाल वो एक छोटी और सशक्त टीम चाहते हैं जो उनकी सोच और उनके उद्दम को और आगे ले जाये. इसलिए वो काफी मेहनत कर रहे हैं जिससे ना सिर्फ वो एक सफल उद्दमी बनें, बल्कि उन सारे लोगों की परेशानियां भी कम हों जिन्हें अपने घर से दूर कहीं और बसेरा बनाना पड़ता है.

राहुल कहते हैं, 

"इस सर्विस ने पुणे में रह रहे हज़ारों छात्रों और दूसरे नौकरीपेशा लोगों की परेशानियाँ बहुत हद तक कम कर दी हैं. जस्ट ऑन रेंट.कॉम से उन्हें कम कीमत पर बड़ी आसानी से फर्नीचर मिल जाता है और ज़रूरत ख़त्म होने पर इसे वापस कर देते हैं. अच्छी सर्विस के कारण हमें काफी पॉजिटिव पब्लिसिटी मिल रही है."

राहुल चाहते हैं की देश के हर शहर में ऐसी सुविधा हो ताकि जिन मुश्किलों का उन्होंने सामना किया वो दूसरों को ना करना पड़े. राहुल की सोच ने बहुतों की जिंदगी की रोज़मर्रा की दिक्कतों को काफी कम कर दिया है. ज़रूरत है ऐसी अच्छी और ज़रूरी सेवाओं को और आगे बढ़ाने की.    

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