भाई के लिए आजीवन अनब्याही रहने का बहन ने लिया संकल्प 

रक्षाबंधन के मौके पर गुजरात की एक बहन ने मानसिक रूप से बीमार अपने भाई की आजीवन सेवा-सुश्रुषा के लिए शादी न करने का संकल्प लिया...

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इस बार 26 अगस्त को राखी का त्योहार मनाया जा रहा है। ज्योतिषी राखी बांधने से मना कर रहे हैं लेकिन बहनें अंधविश्वासों के झांसे में आने से रहीं। कई भाइयों ने तो अपनी बहनों को अनोखे तोहफे से नवाज कर उनके लिए त्योहार को अविस्मरणीय बना दिया है, वही गुजरात की एक बहन ने मानसिक रूप से बीमार अपने भाई की आजीवन सेवा-सुश्रुषा के लिए शादी न करने का संकल्प लिया है। हरियाणा और उत्तर प्रदेश के दो भाइयों ने इस बार राखी पर बहनों को शौचालय के तोहफे दिए हैं।

इस रक्षाबंधन पर जो भाई बहनों को उपहार में इज्जत घर (शौचालय) भेंट कर रहे हैं, उन पर उन्हें गर्व है। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी के मुताबिक ऐसे भाइयों को ब्लाक स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। 

वडोदरा शहर (गुजरात) के मोहल्ला गाजरावाड़ी, परेशनगर की मनीषा हरीशभाई बारोट ने राखी पर अपना पूरा जीवन मानसिक रूप से बीमार छोटे भाई की सेवा में समर्पित कर दिया है। उनका छोटा भाई जन्म से ही मानसिक रूप से बीमार है। वह न बोल सकता है, न चल-फिर सकता है। राखी बांधते हुए मनीषा ने संकल्प लिया कि वह जीवन भर भाई की देखभाल करेगी। मनीषा को उसके माता-पिता ने खूब समझाया भी कि शादी कर अपना घर बसा ले, लेकिन भाई की हालत देखकर उसने कभी शादी न करने का फैसला ले लिया।

इसी तरह ग्रेजुएशन कर रहे रोहतक (हरियाणा) के गांव चुलियाना निवासी सोमवीर शर्मा ने रक्षाबंधन पर अपनी मुंह बोली बहन वर्षा को शौचालय का तोहफा दिया है। सोमवीर ने काफी पहले इस बार राखी पर वर्षा को घर में शौचालय बनवाकर देने का वायदा किया था। गांव के सुरेंद्र ऑटो चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं। उनके परिवार में उनके अलावा बेटा भूपेंदर, आशू, सूरज और दसवीं में पढ़ रही बेटी वर्षा है। इसी गांव के सोमवीर शर्मा वर्षा को अपनी मुंहबोली बहन मानते आ रहे हैं। हर रक्षाबंधन पर वर्षा उन्हे राखी बांधती रही है। आर्थिक तंगी के कारण वर्षा के घर वाले शौचालय का निर्माण नहीं करवा पा रहे थे। सोमवीर ने इस बार राखी के तोहफे में वर्षा को शौचालय का तोहफा दे दिया। गांव वाले अब सोमवीर को इस काम के लिए सम्मानित करने जा रहे हैं। सोमवीर ने बताया कि इस काम में उनको अपने पिता लालचंद, बहन मोनिका और रितु से भी सहयोग मिला है।

आजमगढ़ (उ.प्र.) में तो राखी को रक्षा बंधन पर शौचालय भेट करने की मुहिम से फिल्म अभिनेत्री शबाना आजमी भी भावानात्मक रूप से जुड़ गई हैं। जिला प्रशासन ने ऐसे भाइयों को इस बार रक्षा बंधन पर सम्मानित करने की घोषणा की है। गौरतलब है कि शबाना आजमी इसी जिले की रहने वाली हैं। प्रशासन की इस अनूठी पहल की प्रशंसा करते हुए वह कहती हैं कि घर में शौचालय नहीं होने से बहनों और माताओं को दिक्कत होती है। इस रक्षाबंधन पर जो भाई बहनों को उपहार में इज्जत घर (शौचालय) भेंट कर रहे हैं, उन पर उन्हें गर्व है। जिलाधिकारी शिवाकांत द्विवेदी के मुताबिक ऐसे भाइयों को ब्लाक स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। इसी तरह तीज पर पत्नियों को उपहार स्वरूप शौचालय गिफ्ट करने वाले पतियों को जिला मुख्यालय पर सम्मानित किया जा रहा है।

राखी के त्योहार पर ये तो रहे कुछ सुखद वाकये लेकिन कई ऐसी भी घटनाएं सामने आई हैं, जो भाई-बहन के दिल दुखाने वाली हैं। एक वाकया प्रतापगढ़ (उ.प्र.) का है। पुलिस ने एक ऐसे भाई को गिरफ्तार कर लिया है, जो अपनी बहन की सास को धमकी देकर राखी पर दो लाख रुपये की फिरौती मांग रहा था। गांव नारायणपुर निवासी आरोपी भाई का कहना है कि कोधौर थाने के गांव मिसरौली निवासी सास सुशीला देवी उसकी बहन को बहुत परेशान करती है। वह उसे सबक सिखाना चाहता था। उसने इस बार राखी पर उसकी सास से दो लाख रुपए फिरौती मांगी। उसने सुशीला को कैश लेकर रामपुर रेलवे स्टेशन पर बुलाया। यह पैसा वह बहन को राखी पर भेट देना चाह रहा था। सुशीला ने रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसी बीच पुलिस ने नंबर ट्रेसकर सूरज को गिरफ्तार कर लिया।

जहानाबाद (उ.प्र.) के पंथू सिंह का पुरवा में तो रक्षा बंधन से पूर्व दो भाइयों की मौत ने बहन को झकझोर कर रख दिया। इस हृदय विदारक घटना के बाद गांव के अधिकांश घरों में चूल्हे नहीं जले। चंद्रपाल निषाद के दो पुत्रों गयाप्रसाद और विशाल की करंट से एक साथ जान चली गई। जब दोनों शव अंतिम संस्कार के लिए नजफगढ़ घाट ले जाए जाने लगे तो परिवार में कोहराम मच गया। बदहवासी में उनकी बहन दोनों भाइयों की कलाइयों पर बांधने के लिए राखी लेकर दौड़ पड़ी। उसके करुण क्रंदन से पूरे गांव ने कलेजा थाम लिया। हर किसी की आंखें नम हो गईं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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