भारत में सबसे कम उम्र में ड्रोन बनाने वाले इस बच्चे के बारे में जानते हैं आप!

आधिकारिक तौर पर देश के सबसे युवा ड्रोन डेवलपर आर्यमान...

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आर्यमान वर्मा का नाम ‘इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स” में दर्ज हो गया। आर्यमान अब आधिकारिक तौर पर देश के सबसे युवा ड्रोन डेवलपर बन गए हैं। उन्होंने एक क्वाडकॉप्टर यानी 4 पंखों से उड़ने वाला ड्रोन तैयार किया है, जो 70 फ़ीट की ऊँचाई तक उड़ सकता है।

अपने पैरेंट्स के साथ आर्यमान
अपने पैरेंट्स के साथ आर्यमान
इससे पहले मार्च 2015 में आर्यमान ने कमांड पाकर लाइन फ़ॉलो करने वाला रोबॉट बनाया था। यह रोबॉट उन्होंने 45 दिन की एक रोबोटिक वर्कशॉप के दौरान तैयार किया था, जिसकी ख़ास बात यह है कि वह कहीं भी सफ़ेद फ़्लोर की पहचानकर उसपर आगे बढ़ सकता है। 

किसी भी इंसान के लिए उम्र के हिसाब से उपलब्धता के दायरे निर्धारित नहीं किए जा सकते। ख़बरों के ज़रिए हम ऐसे की कई कच्ची उम्र के हुनरमंदों के बारे में जानते रहते हैं, जिन्होंने अपनी उम्र, समाज और सिस्टम द्वारा निर्धारित दायरों से ऊपर उठकर सोचा और अपनी मेहनत के बल पर सभी मानकों को फिर से गढ़ने की हिदायत दे डाली। कुछ ऐसी ही कहानी है पंजाब और भारत के सबसे प्रमुख इंडस्ट्रियल शहरों में से एक लुधियाना के रहने वाले 13 वर्षीय आर्यमान की।

आर्यमान वर्मा का नाम ‘इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स” में दर्ज हो गया। आर्यमान अब आधिकारिक तौर पर देश के सबसे युवा ड्रोन डेवलपर बन गए हैं। उन्होंने एक क्वाडकॉप्टर यानी 4 पंखों से उड़ने वाला ड्रोन तैयार किया है, जो 70 फ़ीट की ऊँचाई तक उड़ सकता है। ड्रोन आमतौर पर एक छोटे मानवरहित हेलिकॉप्टर की तरह उड़ते हैं, जिसे रिमोट या किसी अन्य कंट्रोलर की मदद से नियंत्रित किया जा सकता है। सुरक्षा और क़ानून व्यवस्था के लिए निगरानी करने के अलावा इसका इस्तेमाल दुनियाभर में फ़िल्म की शूटिंग, सामान की डिलिवरी, और नक़्शे बनाने आदि के लिए किया जाता है। फ़िलहाल भारत में एक नागरिक का ड्रोन उड़ाना ग़ैरक़ानूनी है।

आर्यमान लुधियाना के सैट पॉल मित्तल स्कूल में 8वीं कक्षा में पढ़ते हैं। बचपन से ही टेक्नॉलजी में दिलचस्पी रखने वाले आर्यमान को इस ड्रोन को पूरी तरह से तैयार करने में सिर्फ़ एक महीने का समय लगा। आर्यमान की मां, डिम्पल ने जानकारी दी, कि उन्होंने बचपन से ही आर्यमान को टेक्नॉलजी की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने आर्यमान को बेहद छोटी उम्र से ही उन इंजीनियरिंग वर्कशॉप्स में भेजा, जो इंजीनियरिंग के तीसरे सेमेस्टर के छात्रों के लिए कराई जाती थी। ग़ौरतलब है कि आर्यमान तब चौथी कक्षा में पढ़ रहे थे।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रयोगशील इस्तेमाल से आर्यमान ने घर पर ही कई दिलचस्प और उपयोगी आविष्कार किए। इन अविष्कारों में से एक ‘ऑटोमेटिक इलेक्ट्रिक कंट्रोल सिस्टम’ भी शामिल है, जिसकी मदद से पूरे घर के पंखे, टीवी और लाइटों को एक रिमोट से ही कंट्रोल किया जा सकता है। अपने स्कूल का इलेक्ट्रॉनिक नोटिस बोर्ड भी ख़ुद आर्यमान ने तैयार किया है। सिर्फ़ इतना ही नहीं, वह भविष्य में एक ऐसा रोबोट बनाना चाहते हैं, जो साइंस और टेक्नॉलजी के क्षेत्र में उन्हें एक ख़ास पहचान दिलाने के साथ-साथ देश के भी काम आ सके।

अंग्रेज़ी अख़बार ‘एशियन एज’ से बात करते हुए आर्यमान के परिवारवालों ने बताया कि उन्होंने इस ड्रोन की जानकारी ‘गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ को भी दी है, और उन्हें उम्मीद है कि आर्यमान को वहां भी अपना नाम दर्ज करवाने में सफलता मिलेगी। अंग्रेज़ी अख़बार ‘ट्रिब्यून’ ने आर्यमान वर्मा का इंटरव्यू किया, जिसमें वह बताते हैं कि उन्हें इस ड्रोन को तैयार करने में एक महीने का समय लगा। और उनके पिता ने, हर चीज़ की तरह इसमें भी उनको पूरा समर्थन दिया। आर्यमान यह भी बताते हैं कि जब भी वह कोई ऐसी चीज़ बनाते हैं तो उन्हें उनके पिता से इनाम में पैसे मिलते हैं। अपने अगले प्रोजेक्ट में आर्यमान एक एयर क्वॉलिटी मॉनिटर बनाने पर काम कर रहे हैं, जो यह बताएगी कि किसी जगह पर हवा सांस लेने लायक है या नहीं। उनके मुताबिक़, प्रोग्रामिंग छोड़कर मशीन में बाक़ी सब लगभग तैयार है।

इससे पहले मार्च 2015 में आर्यमान ने कमांड पाकर लाइन फ़ॉलो करने वाला रोबॉट बनाया था। यह रोबॉट उन्होंने 45 दिन की एक रोबोटिक वर्कशॉप के दौरान तैयार किया था, जिसकी ख़ास बात यह है कि वह कहीं भी सफ़ेद फ़्लोर की पहचानकर उसपर आगे बढ़ सकता है। इस तरह के लाइन-फ़ॉलोअर रोबॉट का इस्तेमाल बड़ी-बड़ी फ़ैक्ट्रियों में मटीरियल को ढोने के लिए किया जाता है, जहां ज़मीन पर एक रंग की लाइन खींच दी जाती है और रोबॉट पूरे काम के दौरान उसे ही फॉलो करता है।

आर्यमान 2015 में इस तरह का रोबोट बनाने वाले सबसे युवा भारतीय बने थे और ‘इंडिया बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स’ ने उनके इस कारनामे को अपनी किताब में जगह दी थी। इसके साथ-साथ आर्यमान ने दिल्ली आईआईटी में हुए फ़ेस्ट में सर्किट बनाने की प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया था। आर्यमान साइंस के अलावा ख़ाली समय में पढ़ना और शतरंज खेलना बेहद पसंद करते हैं। उनका हालिया अविष्कार, क्वाडकोर ड्रोन, कई तरह के सेंसर, कैमरा और जीपीएस डिवाइस से लैस है। अपनी इस सफलता के बाद आर्यमान जून में होने वाली अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने की तैयारी कर रहे हैं।

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