लोगों को एक रुपए में संगीत सिखाते हैं 'गिटार राव'

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लोगों को सिर्फ एक रुपए में गिटार-बांसुरी बजाना सिखाते-सिखाते आंध्रा के सिविल इंजीनियर एसवी राव लगी लगाई नौकरी छोड़कर इतने मशहूर हो चले हैं कि अब लोग उन्हें 'गिटार राव' कहकर पुकारते हैं। वह सिर्फ सिखाते ही नहीं, सीखने वालो को गिटार और बांसुरियां भी देते हैं। पीएफ के पैसे से उन्होंने कभी सौ गिटार खरीदे थे।

 मशहूर संगीतकार इलैयाराजा ने कभी कहा था कि संगीत में वह ताकत है, जेल में कैद आतंकवादी को भी साधु बना दे। इलैयाराजा की उसी सीख ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। संगीत की रुहानी ताकत वैज्ञानिकों को भी अपनी शक्ति का अहसास करा चुकी है। 

आंध्र प्रदेश के सिविल इंजीनियर एसवी राव के सिर पर पचपन साल की उम्र में ऐसा जुनून सवार हुआ कि इंजीनियरिंग की लगी-लगाई नौकरी छोड़कर स्वयं संगीत की शिक्षा लेने के बाद लोगों को सिर्फ एक-एक रुपए में संगीत सिखाने लगे हैं। गिटार, बांसुरी की टीचिंग करते-करते अब तो उनका नाम ही 'गिटार राव' पड़ गया है। वह सिखाते ही नहीं, प्रशिक्षुओं को तोहफे में एक बांसुरी भी देते हैं। वर्ष 2009 में नौकरी छोड़ने पर उन्हें जो पीएफ के दो लाख रुपए मिले, उस राशि से उन्होंने संगीत प्रेमियों देने के लिए सौ गिटार खरीद लिए थे। अब दिल्ली स्थित आंध्रा भवन उनका ठिकाना बन गया है। उनका जन्म आंध्र प्रदेश में हुआ था। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने कई साल तक एक प्राइवेट कंपनी में सिविल इंजीनियर की नौकरी की। उन्ही दिनो वह घरेलू झमेले में कर्जदार हो गए। कर्ज उनके लिए बोझ बन गया तो नौकरी के साथ-साथ घर भी छोड़कर तिरुपति चले गए।

तिरुपति की संगीत अकादमी में उन्होंने गिटार-बांसुरी आदि बजाने का प्रशिक्षण लिया। इससे उनका तनाव कम होने लगा। उसके बाद घर वापस लौटे इस संकल्प के साथ कि अब वह सिर्फ एक रुपए लेकर लोगों को संगीत सिखाने के अलावा और कोई काम नहीं करेंगे। संगीत शिक्षा ही उनके जीवन का लक्ष्य बन गया। घर-गृहस्थी व्यवस्थित करने के बाद वह एक बार फिर घर से निकल पड़े लोगों को संगीत सिखाने के लिए। वर्ष 2012 में दिल्ली आ गए। आंध्र भवन की लॉबी में रहते हैं। वहीं रात में सो जाते हैं, वहीं का बाथरुम का इस्तेमाल करते हैं। बाकी समय आंध्र भवन से विजय चौक तक लोगों को गिटार-बांसुरी सिखाते और बांटते रहते हैं। इसका भी उन्होंने एक टाइम टेबल बना रखा है। सुबह सात से नौ बजे तक आंध्रा भवन पर, दोपहर दो से छह बजे तक विजय चौक पर और शाम में छह से नौ बजे तक इंडिया गेट के पास लोगों को संगीत सिखाते हैं।

गिटार राव की जिंदगी में कभी हर वक्त दुख का राग गूंजा करता था, अब सुख का संगीत बजता रहता है। उनका मानना है कि 'संगीत में है ऐसी फुहार, पतझड़ में भी जो लाए बहार, संगीत को न रोके दीवार, संगीत जाए सरहद के पार, संगीत माने न धर्म जात, संगीत से जुड़ी कायनात, संगीत की न कोई ज़ुबान, संगीत में है गीता क़ुरान, संगीत में है अल्लाह-ओ-राम, संगीत में है दुनिया तमाम, तूफान का भी रुख मोड़ता है, संगीत टूटे दिल को जोड़ता है।' वह कहते हैं कि मशहूर संगीतकार इलैयाराजा ने कभी कहा था कि संगीत में वह ताकत है, जेल में कैद आतंकवादी को भी साधु बना दे। इलैयाराजा की उसी सीख ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। संगीत की रुहानी ताकत वैज्ञानिकों को भी अपनी शक्ति का अहसास करा चुकी है। पौधों को संगीत सुनाइए तो वह भी स्वस्थ रहते हैं, इसे सुनकर दुधारू मवेशी ज्यादा दूध देने लगते हैं, संगीत सुनकर बीमार आदमी स्वस्थ हो जाता है। वह कहते हैं कि अब लोग मेरा नाम लेने की बजाय गिटार राव कहकर बुलाते हैं। वह स्वयं को 'यूएसए' यानी यूनिवर्सिटी ऑफ संगीत कहते हैं। वह बचपन से ही संगीत सीखना चाहते थे लेकिन अवसर नहीं मिला।

गिटार राव बताते हैं कि दिल्ली आने के बाद से उनसे लगभग हज़ार लोग संगीत सीख चुके हैं, जिनमें पुलिस और फौज के आला अधिकारियों से लेकर सामान्य लोग तक शामिल हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, चंद्रबाबू नायडू तक उनकी सराहना कर चुके हैं। वह कहते हैं कि फुटपाथ हो या जंगल, हर जगह संगीत का अपना अलग ही आनंद होता है। वह चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत मिशन की तरह 'संगीत भारत' मिशन को प्रोत्साहित करें ताकि ज्यादा से ज्यादा देशवासियों तक संगीत पहुंचे। प्रशिक्षुओं से मिलने वाले एक-एक रुपए से उनका दैनिक खर्च निकल जाता है। खर्च भी क्या है मात्र दस-बीस रुपए। एक ही वक्त खाना खाते हैं, वह भी ज्यादातर सिर्फ गाजर-चुकंदर। ट्रेन यात्राओं के समय टिकट की बजाए टीटी को गिटार सुनाकर बांसुरी थमा देते हैं। परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं। एक बेटी की शादी हो गई है, दूसरी नेत्रहीन है, जो घर न लौटने के कारण उनसे नाराज़ रहती है। वह उससे बहाना कर चुके हैं कि संगीत से पीएचडी कर रहे हैं। पढ़ाई पूरी होने के बाद घर लौट आएंगे। पत्नी और बेटी उनके भाई के परिवार के साथ रहती हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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