पंचम दा के वो गाने जो रिकॉर्ड तो हुए लेकिन रिलीज न हो सके

हमारे आज के 'डीजे वाले बाबू' लोग जो गाने अपने डीजे पर बजाते हैं, वे वही गाने हैं, जिन्हें बर्मन ने कई साल पहले बना कर बजने के लिए छोड़ दिया था...

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पंचम दा से पहले और पंचम दा के बाद, अब तक कोई ऐसा नहीं हुआ जिसने फिल्म इंडस्ट्री को इतने बेहतरीन और लाजवाब गाने दिये हों। बर्मन को तो सभी ने काफी सुना होगा। उनके अधिकतर गीत हिट हुए, खूब सुने गये, सराहे गये, पसंद किये गये और बॉक्स अॉफिस पर अब तक अपनी धूम मचा रहे हैं, लेकिन उनके उन्हीं गानों में कुछ गाने ऐसे भी हैं, जो रिकॉर्ड तो किये गये, मगर कुछ वजहों से रीलीज़ न हो सके। आईये जानते हैं, कि वो गाने हैं कौन से...

पंचम दा यानि की आर डी बर्मन। ये नाम वैसे तो किसी पहचान का मोहताज नहीं, लेकिन फिर भी बताने के लिए बता देते हैं कि ये वही हैं, जिन्होंने एक से बढ़ कर एक हिट गीत भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को दिये। हमारे आज के डीजे वाले बाबू लोग जो गाने अपने डीजे पर बजाते हैं, वे वही गाने हैं, जिन्हें बर्मन ने कई साल पहले बना कर बजने के लिए छोड़ दिया था।

आरडी बर्मन को फिल्मों में पहला ब्रेक मिला था, लीजेंडरी एक्टर महमूद ने 1961 में बनी फिल्म छोटे नवाब में। पंचम दा ने महमूद की फिल्म भूत बंगला में एक्टिंग भी की थी। 

आज आर डी बर्मन का जन्मदिन है और आज के ही दिन उनकी बात न हो, ऐसा भला हो सकता है। हिंदुस्तानी संगीत जगत के बेताज बादशाह राहुल देव बर्मन का जन्म 27 जून 1939 को कोलकाता में हुआ था। उनके पिता सचिन देव बर्मन की गिनती बॉलीवुड के महान संगीतकारों में होती है। राहुल ने अपने पिता की परंपरा को आगे बढ़ाया और संगीत को ही अपनी दुनिया बनाई। आर डी बर्मन को पंचम दा नाम से फिल्म जगत में पुकारा जाता था। पंचम दा नाम के पीछे एक मजेदार किस्सा है। 

आर डी बचपन में जब भी गुनगुनाते थे, शब्द का ही उपयोग करते थे। यह बात अभिनेता अशोक कुमार के ध्यान में आई, कि सा रे गा मा पा में ‘’ का स्थान पांचवा है। इसलिए उन्होंने राहुल देव को पंचम नाम से पुकारना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उनका यही नाम लोकप्रिय हो गया। आपको बता दें, आरडी वर्मन को फिल्मों में पहला ब्रेक मिला था, लीजेंडरी एक्टर महमूद की 1961 में बनी फिल्म 'छोटे नवाब' में। पंचम दा ने महमूद की फिल्म भूत बंगला में भी एक्टिंग की थी। उनके द्वारा संगीतबद्ध आखिरी फिल्म थी ‘1942 : ए लव स्टोरी’। इसके गाने बहुत हिट हुए। अफसोस की बात रही कि गानों के हिट होने के पहले ही राहुलदेव बर्मन दुनिया से विदा हो गए। 4 जनवरी 1994 को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा दिया।

पंचम दा के वो अनसुने गाने जो रिलीज़ न हो सके...

बहुत कम लोगों को पता होगा कि राहुल देव बर्मन को सबसे पहले निरंजन नामक फिल्मकार ने ‘राज’ के लिए 1959 में साइन किया था। आरडी ने दो गाने रिकॉर्ड भी किए। पहला गाना आशा भोसले और गीता दत्त ने तथा दूसरा शमशाद बेगम ने गाया था। यह फिल्म बाद में बंद हो गई। उनकी इस पहली फिल्म के अलावा भी पंचम दा का किया हुआ काम कई दफे रिलीज़ न हो पाया। न सिर्फ उनके फैन्स के लिए बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी ये एक बड़े नुकसान के तौर पर देखा जा सकता है। आज हम आपको बता रहे हैं उनके ऐसे ही कामों के बारे में जो रिकॉर्ड तो हुए लेकिन रिलीज नहीं हो पाए।

ऐसा सबसे चर्चित म्यूजिक अल्बम है गुलजार की फिल्म लिबास का। ये फिल्म 1988 में बनकर तैयार हुई थी लेकिन कई वजहों से उस वक्त रिलीज नहीं हो पाई। 2014 में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग की गई थी। उस वक्त भी उम्मीद की गई थी कि अब तो ये फिल्म रिलीज़ हो जाएगी। लेकिन फिर से ऐसा नहीं हो पाया। आप भी सुने लिबास का एक खूबसूरत गीत- खामोश-सा अफसाना...

खामोश-सा अफ़साना...
खामोश-सा अफ़साना...

80 के दशक के आखिरी में ही आरडी बर्मन साहब ने एक और फिल्म, फिल्म डायरेक्टर जब्बर पटेल के साथ की। फिल्म का नाम था मुसाफिर। लीड रोल में थे नसीर और रेखा। फिल्म का कथानक काफी अच्छा था। गाने लिखे थे गुलजार ने। बर्मन के संगीत ने इस फिल्म में चार चांद लगा दिया था, लेकिन ये फिल्म कभी सिनेमाहॉल तक न आ सकी। उस फिल्म से एक गाना जो कि बहुत रेयर वीडियो है, आप भी सुने, वीडियो में फिल्म के थोड़े बहुत अंश भी हैं... गीत के बोल हैं- सावन सांवरी अखियां...

सावन सांवरी अखियां...
सावन सांवरी अखियां...

बर्मन के खो चुके गानों की लिस्ट यहीं खत्म नहीं होती। आपको यकीन नहीं होगा लेकिन बर्मन मे फिल्म शोले के लिए एक कव्वाली भी बनाई थी। लेकिन ये कव्वाली कभी हमारे कानों तक नहीं पहुंच पाई। कव्वाली के बोल थे, चांद-सा कोई चेहरा न पहलू हो, तो चांदनी का मज़ा नहीं आता...

चांद-सा कोई चेहरा न पहलू हो, तो चांदनी का मज़ा नहीं आता...
चांद-सा कोई चेहरा न पहलू हो, तो चांदनी का मज़ा नहीं आता...

इसी लिस्ट में अगला गाना है फिल्म बॉम्बे टू गोआ का 'तुम मेरी जिंदगी में...'। 

ये गाना तो इतना ज्यादा खूबसूरत है कि आप हर बार यही सवाल पूछेंगे कि क्यों! क्यों ये रिलीज नहीं हो पाया। यहां सुनिए वो प्यारा गाना-

तुम मेरी ज़िंदगी में कुछ इस तरह से आये...
तुम मेरी ज़िंदगी में कुछ इस तरह से आये...

एक और गाना है जो फिल्म रिलीज की आखिरी सीढ़ी तक नहीं पहुंच पाया। 80 के दशक में एक फिल्म आई थी सितमगर। इसमें धर्मेंद्र के साथ-साथ बाकी की स्टारकास्ट भी बेहतरीन थी, मगर फिल्म बुरी तरह पिट गई। फिल्म में यदि कुछ हिट हुआ तो वो था फिल्म में बर्मन के कंपोज हुए गाने। इस फिल्म के गाने लोगों की जुबान पर चढ़ गए, लेकिन शैलेंद्र का गाया एक गाना फिल्म की ज़्यूकबॉक्स के बाहर ही रह गया... गीत के बोल थे- किसी गरीब के दिल से...

किसी गरीब के दिल से...
किसी गरीब के दिल से...

-प्रज्ञा श्रीवास्तव

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