कैसे बिगबास्केट ने चर्चा में आने से पहले बदला ग्रॉसरी ई-कॉमर्स मार्केट का स्वरूप

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आज से करीब 10 साल पहले साल 1999 में हरी मेनन, वी.एस. सुधाकर, अभिनय चौधरी और विपुल पारेख ने फैब मार्ट की स्थापना की जिसे एक ऑनलाइन मार्केट से फिजिकल ग्रॉसरी बिजनेस में बदला गया।

टेकस्पार्क्स के पहले दिन के दूसरे सत्र में लोगों से खचाखच भरे हुए हॉल में बिगबास्केट के एचआर हेड टी.एन. हरी पैनल संचालन कर रहे थे। इस दौरान हरी मेनन ने साल 1999 में फैबमार्ट की मदद करने के लिए सिटी बैंक को धन्यवाद दिया।

योरस्टोरी टेकस्पार्क्स के 9वें संस्करण में सबसे बड़े ऑनलाइन ग्रॉसरी स्टोर बिग बास्केट के संस्थापक और बड़े अधिकारी पहली बार एक मंच पर इकठ्ठे हुए। यहां उन्होंने दूसरी बार उद्यमी बनने और सबसे बड़े ग्रॉसरी स्टोर बिग बास्केट के फाउंडर बनने की कहानी बताई। यह एकदम अलग है कि मीडिया से हमेशा दूर रहने वाले बिगबास्केट के फाउंडर्स एक मंच पर आए और उभरते उद्यमियों से भरे हॉल में 'दी बिगबास्केट जर्नी' नाम के पैनल डिस्कसन में खुलकर बात की हो। ऑन डिमांड ग्रॉसरी और ई-कॉमर्स मार्केट में दिग्गज रहे इन उद्यमियों की यह दूसरी शुरुआत है।

आज से करीब 10 साल पहले साल 1999 में हरी मेनन, वी.एस. सुधाकर, अभिनय चौधरी और विपुल पारेख ने फैब मार्ट की स्थापना की जिसे एक ऑनलाइन मार्केट से फिजिकल ग्रॉसरी बिजनेस में बदला गया। टेकस्पार्क्स के पहले दिन के दूसरे सत्र में लोगों से खचाखच भरे हुए हॉल में बिगबास्केट के एचआर हेड टी.एन. हरी पैनल संचालन कर रहे थे। इस दौरान हरी मेनन ने साल 1999 में फैबमार्ट की मदद करने के लिए सिटी बैंक को धन्यवाद दिया।

साल 2011 में चारों ने मिलकर बिगबास्केट की स्थापना की। बिग बास्केट ने इस मिथक को तोड़ दिया कि ई-कॉमर्स FMCG (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) सेक्टर में कामयाबी हासिल नहीं कर सकता। कंपनी एक मजबूत बिजनेस मॉडल के साथ धीरे-धीरे लेकिन लगातार आगे बढ़ी।

आज कंपनी सूरत, मैसूर और कोयम्बटूर जैसे छोटे शहरों को मिलाकर देश के कुल 25 शहरों में अपना कारोबार कर रही है। हरी के अनुसार, अभी इसमें विस्तार करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने मार्च 2019 तक इन 25 शहरों से हर महीने सेल 200 करोड़ रुपये से बढ़कर 500 करोड़ रुपये होने की उम्मीद जताई।

ऐसे मिली फंडिंग

2011 में बिगबास्केट की शुरुआत के समय कंपनी ने पहले दौर में शुरुआती फंडिंग के तौर पर 1 करोड़ डॉलर्स जुटाए और यह उस समय की सबसे ज्यादा फंडिंग पाने वाले चुनिंदा स्मार्टअप्स में शामिल हो गई थी।

फरवरी 2011 में बिगबास्केट ने अपने निवेशकों सैंड्स कैपिटल, इंटरनेशल फाइनेंस कॉर्पोरेशन और अबराज ग्रुप से 30 करोड़ डॉलर का फंड जुटाया। इस राउंड की फंडिंग की अगुवाई करते हुए अलीबाबा ग्रुप कंपनी का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बन गया। कंपनी की मुख्य टीम इसकी जटिलताओं को पहले ही समझती थी। लिहाजा, यह निवेशकों के लिए कोई बड़ा सिरदर्द नहीं बन पाया। फाउंडर्स का मानना था कि फंडिंग किसी बिजनेस का अहम हिस्सा होती है, जिसे उन्होंने सभी पड़ावों से गुजरने के बाद सीखा। सुधाकर कहते हैं, 'फंडिंग का दौर ग्रोथ के लिहाज से सबसे महत्वपूर्ण रहता है। मैंने इस चीज को सीखा कि जब मार्केट में पैसा हो तो आगे बढ़कर उसे बटोरना चाहिए। पैसे का इस्तेमाल दिमाग से करना चाहिए लेकिन अगर आप ग्रोथ-ओरिएंटेड बिजनेस में हैं तो जितना संभव हो सके उतने पैसे ले सकते हैं।'

बिजनेस को बढ़ाना

सुधाकर का कहना है, जिन लोगों के साथ आप काम करते हैं और उनके साथ आपका रिलेशन, दोनों ही बातें एक समान अहमियत रखती हैं। अपनी बात को समझाने के लिए सुधाकर कहते हैं कि अगर आप एक क्रिकेटर हैं और विकेट के बीच दौड़ रहे हैं तो आपको यह भी जानने की जरूरत होगी कि क्या दूसरे छोर पर खड़ा खिलाड़ी भी उसी तेजी से दौड़ सकता है। उन्होंने, 'ठीक यही चीज हमारे साथ है। हम चारों एक-दूसरे पर पूरा भरोसा करते हैं।'

वह कहते हैं कि बिजनेस में निरंतरता होना भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। खासकर तब, जब आपका बिजनेस केटर औसतन महज 23 उत्पादों का हो लेकिन यह साल में 30 बार होता हो। सुधाकर का मत है कि यह निरंतरता एक साथ ना मिलकर धीरे-धीरे एक प्रक्रिया के जरिए हासिल हुई है। साथ ही उन्होंने आगे कहा कि 'हम जो काम करते हैं उसमें हर व्यक्ति की जरूरत होती है और इस कारण ट्रेनिंग बहुत जरूरी हो जाती है। उदाहरण के तौर पर सामान डिलिवर करते समय उस पर लगा टैग हटाया जाता है। हमें उसे ग्राहकों से वापस लेकर स्टोर तक वापस लाना होता है। यह एक छोटी बात है लेकिन अगर आप देखेंगे तो भारत में अधिकतर लोग टैग लगे फुटवियर नहीं पहनते हैं क्योंकि फुटवियर में लगा टैग उनके पैर में चुभ सकता है।

बिगबास्केट अपने ग्राहकों को इस बात का विश्वास दिलाना चाहता है कि वह ग्राहकों की परवाह करता है। सुधाकर ने कहा कि अगर कोई ग्राहक किसी समस्या के समाधान के लिए हमारे कस्टमर केयर नंबर पर फोन करता है तो हम ये सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं कि 10 सेकंड में उनकी किसी प्रतिनिधि से बात हो जाए। अगर जरूरत हुई तो हम चारों में से कोई एक उससे फोन पर बात करे।

ऑनलाइन टू ऑफलाइन (O2O) बिजनेस की समझ

दी जाने वाली छूट और यूनिट इकनॉमिक्स के बीच संतुलन बेहद जरूरी है। विपुल ने कहा कि आप इससे दूर नहीं भाग सकते लेकिन जहां इसे लागू किया जाता है, वहां ये बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। विपुल कहते हैं किसी कारोबार को ऐसे बिजनेस मॉडल की जरूरत होती है जिसमें छोटे समय के लिए परिवर्तनशील लागत और लंबे समय के लिए स्थाई लागत में संतुलन बिठाया जा सके। ऐसा नहीं होने पर परेशानी खड़ी हो सकती है।

विपुल ने आगे कहा, दो स्टार्टअप्स दिखने में एक जैसे हो सकते हैं लेकिन उन्होंने पैसा कहां लगाया है, यह समझना जरूरी होता है। बिना किसी मॉडल के सिर्फ पूंजी लगाना ही सही नहीं है। इसके लिए आपके पास एक अच्छा बिजनेस मॉडल होना चाहिए।' उन्होंने कहा कि एक अच्छे बिजनेस मॉडल के बगैर आप केवल पूंजी न होने का बहाना नहीं बना सकते हैं। हालांकि, आज ग्रॉसरी मार्केट बहुत चर्चा में है। एमेजॉन की फूड मार्केट एंट्री के बाद अब कंपनियों की नजर ग्रॉसरी मार्केट पर है। एमेजॉन और अलीबाबा, दोनों ही कंपनियों ने ग्रॉसरी स्टार्टअप्स को खरीदा है।

यहां तक अमेरिका में ग्रॉसरी एक बड़ा मार्केट है। इसमें डिलीवरी प्वाइंट्स की संख्या और भौगोलिक स्थिति के मुताबिक सामान की वेरायटी रखने की जरूरत होती है। इससे आपको अपने ग्राहकों की जरूरतें पूरा करने में आसानी होती है। सुधाकर के अनुसार, एक नया ब्रैंड खड़ा करने में मुश्किल होती है, इसलिए एमेजॉन कंपनियों का अधिग्रहण कर रही है। हर कंपनी ग्राहकों तक पहुंचना चाहती है और अपना मार्केट शेयर बढ़ाना चाहती है। यह सारा खेल ऑनलाइन से ऑफलाइन मॉडल पर काम करता है।

बिगबास्केट को क्या चीज प्रासंगिक बनाए रखेगी

हरि ने कहा, 'सबसे बड़ा अंतर है कि हम ताजा उत्पादों का कारोबार कर रहे हैं। ग्रॉसरी ग्राहकों की सेवा और उनकी समस्याओं का समाधान बेहद जरूरी है और इस बात पर हम खासतौर पर ध्यान दे रहे हैं।' हमारा अधिकतर कारोबार मानव शक्ति (ह्यूमैन रिसोर्स) पर आधारित है। हमारे कर्मचारियों में 75 फीसदी लोग ब्लू-कॉलर वर्कर (लेबर क्लास) हैं और हमारा ध्यान उनके विकास के साथ उनकी उत्पादकता बढ़ाने पर है।

पहले दिन से बिगबास्केट ने ताजा उत्पाद की बिक्री में हाथ आजमाया, जो सबसे मुश्किल कैटिगरी है। कंपनी का मानना है कि ताजा उत्पादों का कारोबार इसे एक ब्रैंड के तौर पर स्थापित कर सकता है। क्योंकि आमतौर पर ग्राहक ऐसा सामान महीने में 4 बार खरीदते हैं। अभी हमें लंबा सफर तय करना है। ब्लू कॉलर कर्मचारियों को और अधिक ट्रेनिंग देने की आवश्कता है। जिससे वे अधिक उत्पादक काम कर सकें।

हरी ने कहा, यहां इस बात पर ध्यान रखने की जरूरत है कि वे (ब्लू कॉलर वर्कर) हमारे साथ कैसे तरक्की करें और अडवांस तकनीक को समझें और साथ ही उन्हें यह भी समझ आए कि वे हमारे लिए कितने जरूरी हैं। यहां तक कि अगर किसी सुबह 5 लोग भी नहीं आते हैं तो सामान की ऑर्डर और डिलिवरी करना काफी मुश्किल हो जाता है।

कारोबार में आगे मदद के लिए लोग ब्लू कॉलर वर्कर्स और अधिकारियों के बीच अच्छे संबंधों का एक पुल बनाते हैं और साथ ही सभी स्टार्टअप्स के लिए तकनीक ज्ञान का एक आधार भी बनाते हैं। इस दौरान टीएन हरी और हरी मेनन ने अपनी बुक Cutting the Gordian Knot भी लॉन्च की।

यह भी पढ़ें: कर्नाटक सरकार की 'उन्नति' योजना की घोषणा कर मंत्री प्रियांक खड़गे ने किया टेकस्पार्क्स 2018 का आगाज

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