ताकि प्रदूषित न हो जल: चॉकलेट से बनाया गणपति, मिल्कशेक बनाकर बच्चों को पिलाया गया

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लुधियाना में इस बार केमिकल और प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह चॉकलेट की मूर्ति बनाई गई और उसे पानी में विसर्जित करने के बजाय गरीब बच्चों में खाने के लिए बांट दी गई।

चॉकलेट से बने गणपति (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
चॉकलेट से बने गणपति (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
रविवार को 20 कैफे द्वारा मिलकर दस दिनों में 10 किलोग्राम वजनी गणेश जी की मूर्ति तैयार की गई थी। इसे विसर्जित करने के लिए 100 लीटर दूध का इस्तेमाल किया गया। 

दुनियाभर में पर्यावरण प्रदूषण से निपटने की रणनीतियां बनाई जा रही हैं। पर्यावरण प्रदूषण के अंतर्गत जल का दूषित होना एक अहम मुद्दा है। भारत में भी नदियों और झीलों की हालत किसी से छिपी नहीं है। हर साल मूर्ति विसर्जन, धार्मिक क्रियाकलापों से नदियों का जल प्रदूषित होता है। इसके लिए कई तरह की मुहिम की शुरुआत होती है, लेकिन हालात जस के तस दिखते हैं। इन दिनों गणेशोत्सव के दौरान मूर्ति विसर्जन किया गया और फिर से यह बात उठी कि केमिकल युक्त मूर्तियों से नदियों को नुसकसान पहुंच रहा है। लेकिन पंजाब के लुधियाना में इससे निपटने का काफी कारगर और अनोखा तरीका खोजा गया।

लुधियाना में इस बार केमिकल और प्लास्टर ऑफ पेरिस की जगह चॉकलेट की मूर्ति बनाई गई और उसे पानी में विसर्जित करने के बजाय गरीब बच्चों में खाने के लिए बांट दी गई। बीते रविवार को मूर्ति विसर्जन की अनोखी घटना सामने देखने को मिली। 65 किलोग्राम वजनी इस मूर्ति को बेल्जियन चॉकलेट से बनाया गया था। इसे लुधियाना के ही एक रेस्टोरेंट मालिक हरजिंदर सिंह कुकरेजा ने बनाया था। हरजिंदर 'बेलफ्रैंस' नाम से एक कैफे चलाते हैं जहां कई तरह की बैल्जियम इम्पोर्टेड चॉकलेट तैयार की जाती हैं।

रविवार को 20 कैफे द्वारा मिलकर दस दिनों में 10 किलोग्राम वजनी गणेश जी की मूर्ति तैयार की गई थी। इसे विसर्जित करने के लिए 100 लीटर दूध का इस्तेमाल किया गया। बाद में इस चॉकलेट को मिल्कशेक का रूप दिया गया और इसे 'गणपति विसर्जन प्रसादम' के रूप में गरीब बच्चों में बांट दिया गया। ये बच्चे दिल्ली रोड स्थित स्लम में रहने वाले थे। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कुकरेजा ने कहा, 'रस्मों को निभाने के लिए चॉकलेट से बनी मूर्ति को सांकेतिक तौर पर दूध में विसर्जित किया गया। बाद में इसे बच्चों में बांट दिया गया।'

कुकरेजा ने कहा कि जब त्योहारों की बात आती है तो हम सिख और हिंदू के बीच का फर्क भूल जाते हैं। क्योंकि गणेश जी भाग्य और खुशी के देवता हैं। उन्होंने कहा, 'सांप्रदायिक सौहार्द से ज्यादा ये त्यौहारों को इको फ्रैंडली तरीके से मनाने की बात है। हमारी कोशिश है कि नदी और झीलों का पानी दूषित न होने पाए।' दूध को पीने के बाद बच्चों के चेहरे पर तैर रही खुशी वाकई में अविश्वसनीय थी। कुकरेजा ने बताया कि इन बच्चों को रोज दूध नसीब नहीं होता है इसलिए जब उन्हें चॉकलेट शेक पीने को मिला तो वे बड़े उत्साहित और प्रसन्न नजर आए।

बेकरी के सह मालिक सतिंदर सिंह कुकरेजा ने कहा कि हमें खाने की बर्बादी पर भी ध्यान देना होगा क्योंकि लाखों लोगों को रोजाना भूखे पेट सोना पड़ता है। उन्होंने कहा, 'सिख धर्म हमें हमेशा भूखों को भोजन देने के लिए प्रेरित करता है यही वजह है कि हर जगह लंगर की व्यवस्था की जाती है। लंगर का मतलब ही यही होता है कि कोई भी व्यक्ति भूखे न सोने पाए। हर जरूरतमंद को अपना पेट भरने का हक है।' इस तरह से देखा जाए तो यह गणपति विसर्जन कई मायनों में हमें खुशियां देने वाला है। अगर देश के बाकी लोग भी धार्मिक अनुष्ठानों के प्रति इतने ही सजग हो जाएं तो हम पर्यावरण को हरा भरा बनाने में अपना अतुलनीय योगदान दे सकते हैं।

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