एक गांव, जो भारी है कई शहरों पर....

- हिव्रेबजर गांव बना अन्य गांव के लिए प्रेरणा- महाराष्ट्र सरकार भी अपना रही है हिव्रेबजर की तरक्की का मॉडल- गांव के पूर्व प्रधान और स्थानीय लोगों के प्रयासों से बना हिव्रेबजर एक आदर्श गांव

0

भारत में कई लोगों ने समाज और देश के लिए ऐसे बेहतरीन काम किए जिसने देश को काफी फायदा पहुंचाया ये लोग समाज के लिए मिसाल बने व उनको देखकर लोगों ने प्रेरणा ली कि वे भी अपनी जिंदगी में कुछ न कुछ ऐसा काम करेंगे जिससे समाज और देश दोनों का भला हो।

आज हम कई ऐसे सामाजिक उद्यमियों के बारे में जानते हैं जिन्होंने काफी अच्छा काम किया और गरीब लोगों की जिंदगी में परिवर्तन लाए, उनकी जिंदगी सुगम बनाई। इनमें से कुछ ने ग्रामीण इलाकों में गरीब लोगों को नौकरी दी तो किसी ने खेती में नई तकनीक या औजारों की मदद से ग्रामीणों को खेती का नया विकल्प दिया हमारे सामने ऐसे कई उदाहरण हैं। लेकिन आज हम जिनकी बात करेंंगे उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से अपने गांव को एक मॉडल गांव बना दिया, एक ऐसा बेहतरीन गांव जिसे देखकर महाराष्ट्र सरकार ने भी उनकी सराहना की और वे भी अब उनके मॉडल को ही पूरे महाराष्ट्र में अपनाने की तैयारी में हैं।

भारत की एक बड़ी आबादी गांव में रहती है। हालाकि शहरों की तरफ ग्रामीण इलाकों के युवाओं का पलायन जारी है लेकिन अभी भी एक बड़ी संख्या गांव में ही रहकर जिंदगी व्यतीत करना चाहती है। किसी भी देश की तरक्की के लिए जरूरी है कि गांवों से शहरों की तरफ पलायन एक हद तक ही हो और सही अनुपात बना रहे लेकिन इसके लिए यह भी जरूरी है कि गांवों में भी लोगों को रोजगार व जरूरी सुविधाएं मिलें ताकि वे लोग अपनी गुजर बसर के लिए शहरों का रुख न करें।

महाराष्ट्र में एक गाव हिव्रेबजर है जो सूखे के लिए प्रसिद्ध था लगभग हर बार यहां सूखा पड़ता और गरीब लोग परेशान हो जाते क्योंकि उनके पास खाने तक के लिए कुछ नहीं होता था। बड़ी मुश्किल से ये लोग अपनी जिंदगी चला रहे थे। लेकिन गांव के सरपंच पोपात्रो पवार से लोगों की ये पीड़ा नहीं देखी जाती थी उन्होंने सरकार को कई बार इस दिशा में कदम उठाने के लिए कहा लेकिन उन्हें कुछ भी मदद नहीं मिली आखिर में उन्होंने सोचा कि अब उन्हें खुद ही गांव वालों के साथ मिलकर गांव की दशा व दिशा सुधारनी होगी और उन्होंने अपना कार्य शुरू किया, वे थके नहीं और ड़टे रहे उन्हें अपने गांववालों का भी पूरा साथ मिला और नतीजा ये हुआ की सूखे की मार झेलने वाला ये गांव आज पूरे राज्य ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया है।

पिछले 20 साल में हिव्रेबजर एक गरीब से समृद्ध गांव बन चुका है। यहां हर तरफ हरियाली है। एक ऐसी जगह जो सूखे के लिए प्रसिद्ध हो वहां हरियाली देखकर साफ पता चलता है कि इस गांव का कितने सुव्यवस्थित तरीके से विकास किया गया है।

--- हिव्रेबजर को एक मॉडल गांव बनाने के लिए पोपात्रो ने विभिन्न सुझाव दिए-

1) गांव वालो काो सशक्त किया जाए- आम तौर पर सरकारें दिल्ली के बंद कमरों से तय करती हैं कि कैसे ग्रामीणों की मदद की जाए औऱ वहीं बैठकर फैसला ले लिया जाता है जबकि जरूरत है कि गांव के फैसले गांव वालों के साथ मिलकर किए जाएं बंद कमरों में नहीं ग्रामीणों से उनकी जरूरत व सुझाव लिए जाएं व उसे देखकर ही कोई फैसला हो।

ज्यादातर बंद कमरों में बैठकर लिए फैसले धरातल से काफी दूर होते हैं इस कारण ग्रामीणों को उससे कोई लाभ नहीं होता। यदि वही फैसले गांव वालों के साथ बैठकर लिए जाएंगे तो गांव वालों को अपनी भागीदारी का भी अहसास होगा व वे लोग जमीनी स्तर पर जो दिक्कतें झेल रहे हैं उसको उन लोगों के सामने रख पाएंगें।

2) गांवों में पानी उनकी जिंदगी की लाइफलाइन होता है क्योंकि लगभग सभी गांव में खेती होती है इसलिए गांवों में पानी की अच्छी व्यवस्था अनिवार्य है। भारत में हिव्रेबजर जैसे कई गांव हैं जहां पानी की दिक्कत है या यहां सूखा पड़ता है। हिब्रेबजर के लोगों ने इस कारण गन्ने और केले की खेती बंद कर दी क्योंकि गन्ना और केले को खूब पानी चाहिए होता है साथ ही गांव में बरसात के पानी को एकत्रित करने की योजना पर काम किया गया । और जिसका नतीजा ये हुआ कि आज हिव्रेबजर के पास इतना पानी रहता है कि वहां के गांव वाले अपनी जरूरतें तो पूरी कर ही लेते हैं साथ में अतिरिक्त पानी को साथ के गांवों में बेचते भी हैं।

3) शिक्षा- शिक्षा खर्च नहीं बल्कि एक निवेश होता है। पोपात्रो ने इस बात को समझा और गांव के लोगों को उनके बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। 20 साल पहले जहां हिव्रेबजर में केवल 30 प्रतिशत लोग ही शिक्षित थे वहीं आज यहां 95 प्रतीशत साक्षरता है। यह समझना होगा कि जितने लोग शिक्षित होंगे वे उतनी ही नई तकनीक को अपनाने में रुचि दिखाएंगे।

4) गांव में ज्यादा से ज्यादा नौकरियां- यदि गरीबी को कम करना है तो नौकरियां प्रदाना करनी होंगी। जितने लोग ज्यादा नौकरी करेंगे उतनी ही गांवों से गरीबी कम होगी और लोगों की जिंदगियों में सुधार आएगा। आज हिव्रेबजर में केवल 3 परिवार हैं जो गरीबी रेखा से नीचे हैं जो कि किसी भी गांव के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। पोपात्रो ने गांव में लोगों को विभिन्न कार्यों के लिए प्रोत्साहित किया जिसका नतीजा आज सबके सामने है।

5) सफाई- पोपात्रो ने मलेरिया व अन्य बिमारियों से बचाने के लिए गांव को इतना नीट ऐंड क्लीन कर दिया कि यहां कीड़े मकोडे ही नहीं हैं। ये इतना साफ सुथरा गांव है कि नेता और टूरिस्ट भी यहां की सफाई देखने आते हैं इसी कड़ी में शादी से पहले यहां के लोग वर और वधु का एच आई वी टेस्ट भी करवाते हैं।