फेसबुक के जरिये जानवरों को बचाने की अनोखी मुहिम

0

समाज में ज्यादातर लोग अपने हक की लड़ाई लड़ना जानते हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही लोग होते हैं जो जानवरों के हक की भी आवाज उठाते हैं। अमृतिका फूल भी इन्हीं गिने चुने लोगों में से एक हैं, यूं तो इनका जन्म बैंकॉक में हुआ था और वहीं उनकी स्कूली पढ़ाई भी हुई, लेकिन 18 साल की उम्र में जब वो भारत आई तो इन्होने स्ट्रीट डॉग्स की भरमार देखी जो बुरी हालत में रहते थे। जिसके बाद इन्होने आवारा जानवरों के लिए एनिमल केयर सोसायटी बनाकर उनके लिये काम करना शुरू कर दिया। इसके अलावा आवारा जानवरों के हक की आवाज उठाने के लिए अमृतिका फूल ने फेसबुक पर ‘इंडियन एनिमल फोरम’ की स्थापना की। ताकि उनकी जैसी सोच रखने वालों को एक प्लेटफॉर्म मिल सके साथ ही मुश्किल में फंसे जानवरों की मदद भी की जा सके। 5 लोगों की कोशिश से शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म में अब तक करीब 25 हजार लोग जुड़ चुके हैं।


अमृतिका फूल दिल्ली से सटे गुडगांव में रहती हैं और जब 80 के दशक में भारत आईं तो उस वक्त इन डॉग्स के लिए काम करने वाली कोई संस्था नहीं थी। तब इन्होने सोचा कि वो ऐसे जानवरों के लिये काम करेंगी। अमृतिका के मुताबिक “तब मैंने देखा कि लोगों में इस बात की जानकारी का अभाव है कि किसी जानवर पर होने वाले अत्याचार से उसे कैसे बचाया जा सकता है, कहां पर इसकी शिकायत की जा सकती है।” उनका कहना है कि कई बार ऐसे हालात बनते हैं कि कोई व्यक्ति सड़क से गुजरते हुए किसी जानवर को बीमार या घायल देखता है तो वो चाह कर भी उसकी मदद नहीं कर सकता, क्योंकि एक तो उसके पास वक्त की कमी होती है और दूसरा उसे ये नहीं पता होता कि उस जानवर का इलाज कहां पर और कैसे किया जा सकता है।


इसी समस्या को दूर करने के लिए अमृतिका ने करीब 6 साल पहले फेसबुक पर एक ऐसा प्लेटफॉर्म तैयार किया जहां पर लोग इस तरह की जानकारी एक दूसरे के साथ साझा कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर किसी जानवर की मदद भी कर सकते हैं। ‘इंडियन एनिमल फोरम’ की स्थापना अमृतिका सहित 5 लोगों ने मिलकर की थी लेकिन आज ये संख्या करीब 25 हजार के आसपास हो गई है। इस फोरम में कोई भी व्यक्ति किसी पीड़ित जानवर की जानकारी एक दूसरे के साथ बांट सकता है। अमृतिका के मुताबिक लोगों में जानवरों को लेकर जागरूकता बढ़ी है यही वजह है कि अगर कोई किसी घायल जानवर को देखता है तो फोरम के सदस्य उसकी मदद के लिये जुट जाते हैं। उनका मानना है कि जानवरों को लेकर समाज में तीन तरह की धारणाएं हैं जहां पर एक तरह के लोग वो होते हैं जो उनसे प्यार करते हैं, दूसरे वो होते हैं जो उनसे नफरत करते हैं और तीसरे वो होते हैं जो ना तो जानवरों से प्यार करते हैं और ना ही नफरत लेकिन वो कुछ बोलते नहीं हैं। ऐसे में अमृतिका की कोशिश रहती है कि वो ऐसे लोगों को अपने साथ जोड़कर जानवरों की मदद करे।


ये फोरम ना सिर्फ जानवरों के इलाज में मदद करता है बल्कि उनके अधिकारों की लड़ाई भी लड़ता है। तभी तो अगर फोरम के सदस्यों को पता चलता है कि किसी जानवर के साथ अत्य़ाचार हो रहा है तो ये मिलकर उस जगह पहुंचते हैं और लोगों को समझाते हैं कि वो जानवरों के साथ क्रूरता से पेश ना आएं। खास बात ये है कि फोरम से जुड़े लोग वॉलंटियर के तौर पर काम करते हैं। अमृतिका का दावा है कि उनका फोरम देश भर में हर दिन 15-20 जानवरों को ना सिर्फ लोगों की क्रूरता से बचाता है बल्कि बीमार जानवरों का इलाज भी करवाता है। फोरम के सदस्यों ने अब स्थानीय स्तर पर व्ट्स ऐप ग्रुप भी बना लिये हैं। ताकि एक दूसरे को जानवरों से जुड़ी जानकारी तत्काल दी जा सके। इतना ही नहीं ‘इंडियन एनिमल फोरम’ में ना सिर्फ देश के बल्कि विदेशों से भी लोग जुड़े हैं।


इसके अलावा अमृतिका फूल पिछले 14 सालों से एनिमल केयर सोसायटी चला रही हैं। इसके तहत गुडगांव में जानवरों के लिए एक रिहेब सेंटर स्थापित किया गया है। जहां पर बीमार जानवरों के इलाज के अलावा उनकी देखभाल भी की जाती है। आज इस रिहेब सेंटर में 50 डॉग्स, 2 घोड़े, 2 गाय और 5 बिल्लियां रह रही हैं। करीब 2 एकड़ में फैले इस सेंटर में ऐसे भी जानवर रखे गये हैं जिनको उनके मालिकों ने किन्ही वजहों से छोड़ दिया है। ये लोग ऐसे जानवरों के लिये नया घर ढूंढने में मदद करते हैं। इसके अलावा इस रिहेब सेंटर में ऐसे भी जानवर हैं जिनको लोग बीमारी या दूसरी वजह से अपने साथ नहीं रखना चाहते। अमृतिका का पुरजोर तरीके से कहना है कि जितना हक इंसान को जीना का है उतना ही हक जानवर को भी है और उनकी कोशिश इन जानवरों को उनका सही हक दिलाने की है।

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...