हर किसी के लिये निःशुल्क शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाते हुए खान एकेडमी का साथ देने आगे आए रतन टाटा

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टीम वाईएसहिंदी

लेखिकाः श्रृद्धा शर्मा

अनुवादकः निशांत गोयल


देश के एक जाने-माने और प्रतिष्ठित गैर लाभकारी संगठन खान एकेडमी ने समान रूप से प्रतिष्ठित टाटा ट्रस्ट्स के साथ भागीदारी की है और अब ये दो दिग्गज मिलकर विशेष रूप से भारत की आवश्यक्तानुसार आॅनलाइन सामग्री तैयार करेंगे। करोड़ों डाॅलर की यह साझेदारी न सिर्फ भारतीय शिक्षकों को अपने साथ जोड़ेगी बल्कि भारतीय भाषाओं मं आॅनलाइन सामग्री भी तैयार करेगी जो मुख्यतः एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्ताकों पर आधारित होगी।

याॅरस्टोरी की नजरों में यह भागीदारी शिक्षा के क्षेत्र के अलावा शिक्षकों, स्कूलों, कंटेट तैयार करने वालों, देशभर में शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक काम करने का प्रयास कर रहे एजुटेक स्टार्टअप संचालकों के साथ-साथ उन छात्रों के लिये एक संभावित क्रांति साबित होगी जो गुणवत्ता वाली शिक्षा और शिक्षण सामग्री तलाशने के क्रम में संघर्ष करते हैं। इसके अलावा अंततः यह भारत के करोड़ों डाॅलर के शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता लाते हुए उसे प्रत्येक तबके तब पहुंचाने का एक माध्यम बनने में भी सफल होगी। खान एकेडमी के संस्थापक सलमान खान का कहना है कि वे देशभर के एड-टेक स्टार्टअप्स के साथ काम करने के लिये खुले हाथों से तैयार हैं ताकि वे अपने संगठन के प्रत्येक व्यक्ति को निःशुल्क और विश्वस्तरीय शिक्षा वह भी दुनिया में कहीं भी प्रदान करने की दृष्टि को अमली जामा पहना सकें।

सबसे दिलचस्प बात यह है कि तमाम सामग्री बहुत ही कम लागत वाले उपकरणों के माध्यम ये आॅनलाइन और आॅफलाइन दोनों ही माध्यमों में उपलब्ध करवाई जाएगी। खान एकेडमी पहले से ही विभिन्न स्कूलों में पायलट प्रोग्राम संचालित कर रहा है और शिक्षकों को उनके कौशल को सुधारते हुए बेहतर करने में मदद करने का काम कर रहा है। इसके अलावा इनका इरादा और अधिक पेशेवरों को सामने लाना है जो शिक्षा का प्रसार करते हुए लाखों लोगों के जीवन को प्रभावित करने का इरादा रखते हों। उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा से इतर बात करें तो भी भारत में शिक्षा तक पहुंच ही एक काफी जटिल समस्या है। खान एकेडमी के पाठ्यक्रम का इरादा शिक्षकों को हटाना नहीं बल्कि उन्हें कुछ छूट देना है ताकि वे छात्रों को अतिरिक्त सहायता प्रदान करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकें।

टाटा ने खान के इस दृष्टिकोण को ‘‘रिफ्रेशिंगली डिफरेंट’’ बताया है क्योंकि उन्हें लगता है कि एक प्रकार से यह विश्व को न सिर्फ निरक्षर से साक्षर बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है बल्कि यह प्रत्येक किसी को, कहीं भी और किसी भी समय शिक्षा प्रदान करती है। यह एक ऐसा माॅडल है 109 बिलियन डाॅलर के टाटा टस्ट्स की पहुंच में वृद्धि करने में ही मददगार साबित होगी।

टाटा ने आगे कहा, ‘‘एक भारतीय और दुनिया के एक नागरिक के रूप में मेरे लिये इस साझीदारी की नींव रखना बहुत ही बड़े सम्मान की बात है। मेरी नजरों में यह आने वाली पीढि़यों के लिये सफलतापूर्वक बदलाव का एक बड़ा वाहक बनने में सफल होगी।’’

जिन लोगों ने खान के बारे में नहीं सुना है, वे एमआईटी और हार्वर्ड से डिग्री प्राप्त एक पूर्व हेज-फंड विश्लेषक हैं। इन्होंने अपने एक चचेरे भाई को पढ़ाई में सहायता करने के लिये कुछ वीडियो ट्यूटोरियल्स तैयार किये और फिर इसके बाद इनके अन्य रिश्तेदारों ने भी इनसे वैसे ही वीडियो ट्यूटोरियल्स की मांग की। इस प्रकार से समय के साथ कई ऐसे वीडियो ट्यूटोरियल्स तैयार करने में सफल रहे जिन्हें इन्होंने बाद में इंटरनेट पर अपलोड कर दिया और फिर कुछ समय बाद इन्होंने अपनी एकेडमी की स्थापना की। जैसे-जैसे इनकी ख्याति चारों ओर फैली इन्हें सिर्फ अमरीका में रहने वाले लोगों से ही नहीं बल्कि दुनिया के हर कोने से पत्र आने लगे जिनमें लोग विस्तार से बताते कि कैसे उनके इन वीडियो ट्यूटोरियल्स की मदद से लोग अपनी एलजेब्रा क्लास पास करने में सफल रहे या फिर दोबारा काॅलेज का हिस्सा बनने में सफल रहे या फिर उन्होंने अपने बच्चों की मदद की। खान कहते हैं, ‘‘लोगों से निरंतर मिल रही प्रतिक्रियाओं से बहुत ही जल्द यह बिल्कुल स्पष्ट हो गया कि इस प्रकार की सामग्री की बहुत व्यापक स्तर पर आवश्यकता है। इससे हमें यह भी प्रतीत हुआ कि दुनियाभर के लोगों के बीच अपनी क्षमताओं का विस्तार करने की कितनी लालसा है।’’

खान एकेडमी के पास गणित, विज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान के विषयों के अलावा मानविकी और परीक्षाओं की तैयारियों से संबंधित करीब 2700 वीडियो उपलब्ध हैं जिनका उपयोग निःशुल्क किया जा सकता है और प्रप्येक वीडियो करीब 10 मिनट की अवधि का है। अपने मूल चरित्र के अनुसार खान एकेडमी अपनी पाठ्य सामग्री अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध करवाती है। कुछ दिनों पूर्व ही अस्तित्व में आने वाले खान एकेडमी के हिंदी पेार्टल के बारे में बात करते हुए खान कहते हैं, ‘‘जब आप गहरा प्रभाव छोड़ने के लिये उच्च जनसंख्या के साथ विशाल आवश्यकता वाले क्षेत्रों के बारे में बात करते हैं तो भारत उस सूची में शीर्ष पर आता है। यह बात बिल्कुल स्पष्ट है कि मेरे परिवार की जड़े यहीं है और यह मेरे दिल के सबसे करीब है। अभी तो सिर्फ शरुआत ही है। आने वाले 4 से पांच वर्षों में और दशकों में हम स्वयं को एक भारतीय संगठन के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।’’

पहले चरण में यह भागीदारी अपना सारा ध्यान शहरी क्षेत्रों में रहने वाले मध्यम और कम आय वर्ग वाले परिवारों के बच्चों को लाभ पहुंचाने में मददगार शैक्षणिक संसाधनों को तैयार करने पर रहेगा। दूसरे चरण में इनका इरादा विभिन्न भारतीय भाषाओं में सामग्री तैयार करने का है। टाटा ट्रस्ट्स के साथ साझीदारी मुख्यतः भारतीय छात्रों के लिये सामग्री तैयार करने, सबसे पहले उपशीर्षक और अंततः विभिन्न भारतीय भाषाओं में मूल सामग्री तैयार करने पर केंद्रित है। इसके अलावा इन्हें उम्मीद है कि ये भारत में निवास कर रहे अन्य ‘सलमान’ को तलाशने में भी सफल रहेंगे।

खान का सपना है कि प्रत्येक भारतीय इतना सक्षम हो जाए कि वह उन्हीं विषयों पर अपना ध्यान केंद्रित करे जो वास्तव में उसके लिये महत्व रखते हैं और साथ ही वह उसे उस भाषा में पढ़ने में सक्षम हो जो उस संदर्भ से सबसे अधिक प्रासंगिक हो। उनका इरादा है कि कंप्यूटर और कम कीमत वाले फोन की सहायता से उसतक सबकी आसान पहुंच बन सके और यही एकेडमी का सपना भी है।

खान कहते हैं, ‘‘जब मैंने अपना एक मिशन स्टेटमेंट लिखा जिसमें मेरा इरादा दुनिया में कहीं भी निवास करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को बिल्कुल निःशुल्क शिक्षा पाने में सक्षम बनाने का था तो मुझे लगा कि कहीं यह मेरा भ्रम तो नहीं। लेकिन 30 मिलियन उपयोगकर्ताओं के साथ हमें सफलता मिली और अब यह मुझे दूर का सपना होने की जगह संभावित अधिक लगता है। हमें इस काम के लिये टाटा ट्रस्ट्स से बेहतर साथी नहीं मिल सकता था।’’

खान और टाटा एक परस्पर मित्र के माध्यम से मिले, आम लोगों के लिये निःशुल्क शिक्षा की अवधारणा को अमली जामा पहनाने के प्रयासों पर वार्ता प्रारंभ की और अंततः इस साझेदारी की स्थापना करने में सफल रहे।

याॅरस्टोरी का निष्कर्ष

अगर हम वैश्विक स्तर पर खान एकेडमी के प्रभाव को देखें तो यह कहने की आवश्यकता ही नहीं है कि यह एक जाना-माना नाम बन चुकी है और यह साबित हो चुका है कि गैर-सिद्ध हुए माॅडल के लिये गैर-लाभकारी माॅडल अधिक व्यवहारिक है, विशेषकर अगर आप ऐसा प्रभाव छोड़ने की सोच रहे हैं जो व्यापाक और गहरा होने के अलावा तकनीक पर आधारित है।

अंत में सिर्फ संख्सा ही नहीं बल्कि प्रभाव ही वह कारक है जो मायने रखता है। एक बार प्रभाव स्थापित होने के बाद दाता बार-बार आपका साथ देने के लिये आगे आते रहते हैं। एक तरफ जहां उद्यम पूंजी माॅडल मुख्यतः राजस्व और मुनाफे को ध्यान में रखता है (जिसमें कुछ गलत भी नहीं है) वहीं दूसरी तरफ मिशन विभिन्न उम्मीदों से प्रभावित हो जाता है जिसके चलते लक्ष्य से दूर होने का जोखिम काफी बढ़ जाता है।


(विशेषः रतन टाटा याॅरस्टोरी के निवेशकों में से एक हैं।)

Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

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