अफगानी महिला खालाज़ादा ने खुद सीखकर दिया 360 महिलाओं को प्रशिक्षण

अब अफ़ग़ानिस्तान जाकर महिलाओं को आभूषण बनाने का प्रशिक्षण देना चाहती है खाला

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अपने पति को खो चुकीं अफगानिस्तान की खाला जादा लैपिस लैज्युली के छोटे छोटे मोतियों की मदद से हाथ से आभूषण बनाकर और बेचकर पिछले 17 वर्षों से आठ सदस्यों वाले अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं।

50 से अधिक उम्र वाली खाला नई दिल्ली के आम्रपाली स्टोर में गहरे नीले रंग के इस पत्थर के बने आभूषणों का संग्रह पेश करने के लिए एक प्रदर्शनी में भाग ले रही हैं। उन्होंने आभूषण बनाने की यह कला अपने एक पड़ोसी से सीखी थी जो काबुल में अब लघु स्तर एक कारोबार चलाता है।

यह संग्रह आम्रपाली और अफगानिस्तान की आयेंदा ज्वैलरी कोआपरेटिव के बीच साझीदारी के तहत प्रदर्शित किया गया है। स्थानीय अफगान महिलाएं आयेंदा ज्वैलरी कोआपरेटिव की सदस्य हैं।

खाला ने कहा, ‘‘मैं बचपन से ही घर के गलीचे बनाने का काम करती थी। मैं अब दिन के 10 घंटे आभूषण बनाती हूं और शेष समय घर को देती हूं। मैं ऐसा करने वाली अकेली महिला नहीं हूं। मेरे गांव में लगभग हर महिला अपने परिवार की मदद करने के लिए और अपनी पारिवारिक आय में योगदान देने के लिए यह करती है।

उन्होंने वर्ष 2013 में 35 अन्य कलाकारों के साथ जयपुर के इंस्टीट्यूट ऑफ जेम्स एंड जूलरी में आभूषण डिजाइन करने का प्रशिक्षण लिया था।

खाला ने कहा,‘‘भारत में मेरा प्रशिक्षण यादगार रहा है और मेरी यहां कई महिलाओं के लिए अच्छी मित्रता हो गई है। न तो मुझे और न ही मेरी बेटियों :उनकी तीन बेटियां और पांच बेटे हैं: को शिक्षा मिल सकी। जो मैंने सीखा है, उसे मैं अपने देश की महिलाओं को सिखाना चाहती हूं ताकि वे आजीविका कमा सकें।

आम्रपाली के दिल्ली संचालन की प्रमुख सुमन खन्ना ने कहा, ‘‘यहां प्रशिक्षण लेने के बाद खाला ने 360 महिलाओं को प्रशिक्षण दिया है और इनमें से कई इस प्रतिभा के जरिए अपने परिवार की मदद कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें अपने बेटों से जयपुर जाने की अनुमति देने के लिए उन्हें दो महीने तक मनाना पड़ा लेकिन अब वह इस कला का प्रयोग अफगानिस्तान में लोगों को प्रशिक्षित करने में करती हैं। (पीटीआई)

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