देश के 36 द्वीपों के ‘समग्र विकास’ की योजना में डीज़ल की बजाए सौर, पवन, ज्वार व उष्मीय उर्जा पर ज़ोर

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केंद्र सरकार ने देश के विभिन्न राज्यों में 36 द्वीपों की पहचान की है, जिनका संबंधित राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों एवं अन्य पक्षों से विचार विमर्श करके ‘समग्र विकास’ किया जायेगा।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत नीति आयोग से प्राप्त जानकारी के अनुसार नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता में ‘द्वीपों के समग्र विकास’ विषय पर एक बैठक आयोजित हो चुकी है जिसमें चिन्हित द्वीपों के समग्र विकास के लिए उपयुक्त रणनीति बनाने की जरूरत पर चर्चा की गई।

नीति आयोग की दिसंबर 2015 की बैठक के दौरान गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने बताया कि 36 द्वीपों का प्राथमिकता के आधार पर विकास करने के लिए चयन किया गया है। इनमें अंडमान निकोबार के 13 द्वीप, लक्ष्यद्वीप के 7 द्वीप, महाराष्ट्र के 3 द्वीप, गोवा का एक द्वीप और गुजरात के 7 द्वीप शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इन चिन्हित द्वीपों की समग्र विकास योजना बनाने की जरूरत है, जिसमें संबंधित राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और अन्य पक्षों से विचार विमर्श किया जाए।

आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैठक में नीति आयोग की ओर से यह सुझाव दिया गया है कि इन द्वीपों में डीजल के उपयोग की बजाए सौर उर्जा, पवन उर्जा, ज्वार उर्जा, समुद्री उष्मीय उर्जा आदि का उपयोग किया जाए ।

इन चिन्हित द्वीपों में नौवहन कारोबार, जहाजरानी, मत्स्यपालन, पारिस्थितिकी पर्यटक, समुद्र के अंदर खनन, तेल एवं गैस तथा अन्य सामाजिक आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की संभावनाएं हैं। ऐसे में द्वीपों के विकास की योजना में आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के उपायों को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

दिल्ली स्थित आरटीआई कार्यकर्ता गोपाल प्रसाद ने नीति आयोग से द्वीप के समग्र विकास की योजना का ब्यौरा एवं अन्य जानकारी मांगी थी। आरटीआई के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, बैठक में बताया गया कि देश में द्वीपों की कुल संख्या 1382 है ।

इस विषय को अंतिम रूप देने संबंधी रिपोर्ट तैयार करने के लिए पांच उप समूहों का गठन किया गया था जिसमें एक द्वीपों की संख्या का आकलन करने, दूसरा द्वीपों में जीवों एवं वनस्पतियों की पहचान करने एवं औषधीय उपयोग वाले पौधों एवं फसलों को उगाने के विषय पर विचार करने, तीसरा पर्यटन गतिविधियों पर विचार करने, चौथा वाणिज्यिक एवं विकास की गतिविधियों की पहचान करने और पांचवां द्वीपों के सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।

इन्हीं विषय वस्तु के आधार पर चिन्हित द्वीपों के समग्र विकास को आगे बढ़ाया जायेगा ।(पीटीआई)

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