सऊदी में मां के कार चलाने पर क्या सोचते हैं बच्चे, बताया इस महिला पत्रकार ने

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 सऊदी के एक धार्मिक नेता ने कहा था कि महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि उनके पास पुरुषों के मुकाबले एक चौथाई दिमाग होता है, इसलिए वे सही से गाड़ी नहीं चला पाएंगी।

डॉक्युमेंट्री का एक सीन
डॉक्युमेंट्री का एक सीन
 इस मानसिकता को जवाब देने के लिए सऊदी की एक महिला फिल्मकार ने एक छोटी सी डॉक्युमेंट्री बनाई है जिसमें दिखाया गया है कि महिलाओं की ड्राइविंग को लेकर जो सोच बनाई गई है वह गलत है। 

 हया ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा बहुत जरूरी है और इसलिए महिलाओं को कार चलाने का अधिकार मिलना चाहिए। यह तभी संभव होगा जब पूरा समाज इसके लिए आगे आएगा। 

इस्लामिक देश सऊदी अरब में महिलाओं को भी कार चलाने का अधिकार देने की तैयारियां हो गई हैं। कुछ महीने पहले वहां के किंग ने इस बारे में घोषणा की थी जिसका पूरी दुनिया के लोगों स्वागत किया था। लेकिन सऊदी में ही कई सारे लोगों ने इस पर आपत्ति जताई थी। कार न चलाने देने के पीछे वहां के लोगों का तर्क था कि इससे महिलाओं के अंडाशय पर बुरा असर पड़ता है। सऊदी के एक धार्मिक नेता ने कहा था कि महिलाओं को गाड़ी चलाने की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए क्योंकि उनके पास पुरुषों के मुकाबले एक चौथाई दिमाग होता है, इसलिए वे सही से गाड़ी नहीं चला पाएंगी।

कुछ का तो यह भी कहना था कि इससे दुर्घटनाओं में बढ़ोत्तरी होगी और सड़क पर ट्रैफिक जाम भी लगेगा। इस मानसिकता को जवाब देने के लिए सऊदी की एक महिला फिल्मकार ने एक छोटी सी डॉक्युमेंट्री बनाई है जिसमें दिखाया गया है कि महिलाओं के ड्राइविंग को लेकर जो सोच बनाई गई है वह गलत है। एक सोशल एक्सपेरिमेंट के तहत डायरेक्टर प्रोड्यूसर हया अल सुवायद ने कई सारे बच्चों से बात की और उसे कैमरे में भी कैद किया। उन्होंने उन सभी बच्चों से पूछा कि अगर ड्राइवर की जगह उनकी मां उन्हें स्कूल छोड़ने और लेने जाएं तो उन्हें कैसा लगेगा?

यूट्यूब पर पोस्ट किए गए वीडियो में अल हयात ने बच्चों की उन बातों को कैद किया है जिनमें वे यह कहते हुए काफी उत्साहित दिख रहे हैं कि अगर उनकी मांएं उन्हें स्कूल ले जाने और वहां से लाने आएंगी तो उन्हें काफी अच्छा लगेगा। वीडियो में एक छोटा बच्चा कहते हुए नजर आता है, 'मुझे काफी खुशी होगी, मेरी मां ड्राइवर से ज्यादा अच्छी गाड़ी चलाती हैं।' एक और बच्चे ने कहा, 'मेरी मां हमेशा स्कूल भेजने से पहले मुझे नाश्ता देती हैं और मुझे बाय कहती हैं। अब वह मेरे साथ कार से स्कूल तक चलेंगी।' हया अल हयात अखबार में पत्रकार हैं। वह फोटो भी खींचती हैं और एएफपी जैसी मशहूर एजेंसियों के लिए भी काम करती हैं। उन्होंने चिल्ड्रेन पार्लियामेंट की स्थापना की है।

हया अल ने सऊदी के एक दैनिक अखबार को दिए गए इंटरव्यू में इस एक्सपेरिमेंट के बारे में बताया है। उन्होंने कहा, 'मुझे लगता है कि समाज में लोगों की दूषित मानसिकता को बदलने की शुरुआत सबसे पहले बच्चों से की जानी चाहिए। युवा पीढ़ी बदलाव लाने में सबसे आगे रहती है।' हया ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा बहुत जरूरी है और इसलिए महिलाओं को कार चलाने का अधिकार मिलना चाहिए। यह तभी संभव होगा जब पूरा समाज इसके लिए आगे आएगा। उन्होंने बताया कि सऊदी में कई तरह की अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि महिलाओं के गाड़ी चलाने से दुर्घटनाओं में बढ़ोत्तरी होगी।

सऊदी में महिलाओं पर कई तरह की बंदिशें लागू हैं। वहां की महिलाओं को पासपोर्ट, वीजा और बैंक में खाता खुलवाने जैसे कामों के लिए पुरुषों की इजाजत लेनी होती है। वहां के सरकारी कार्यालयों में महिलाओं के लिए अलग एंट्री गेट्स होते हैं और पुरुषों को पता ही नहीं होता है कि महिलाओं से कैसे बात करनी है। यही वजह है जिससे गाड़ी चलाने संबंधी नए आदेश को लागू करने में कई सारी दिक्कतें भी आ सकती हैं।

यहां देखें पूरी डॉक्युमेंट्री...

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