पारंपरिक भोजन चाहिए तो ऑर्डर कीजिए, 'EatOnGo' के पास सब मिलता है...

बिहार, इंदौर और दिल्ली सहित देश के अन्य हिस्सों के पारंपरिक खानों को तैयार करने के लिये वहीं मंगवाते हैं तमाम सामग्रीफिलहाल सिर्फ बैंगलोर के कुछ हिस्सों को कर रहे हैं कवर और आने वाले दिनों में पूरे शहर में विस्तार का है विचारफिलहाल नाश्ते, ब्रंच और स्नैक्स के रूप में प्रतिसप्ताह 2500 से अधिक आर्डर कर रहे हैं सप्लाई30 लोगों की यह टीम 36 प्रकार के व्यंजनों को करती है तैयार और लगातार संख्या में कर रही है इजाफा

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कैसा होता अगर आप अपने घर पर बैठे-बैठे बिहार के प्रसिद्ध लिट्टी-चोखा, इंदौर के मसाला पोहा या फिर दिल्ली में मिलने वाली कचौड़ी और सब्जी का लुत्फ उठा सकते? और उससे भी अधिक गर इन व्यंजनों को तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली मूल सामग्री अपने इनके मूल स्थान से ही लाई गई हो तो? सुनकर ही आपके मुंह में पानी आने लगा ना?

इसी अवधारणा को मूर्त रूप देते हुए बैंगलोर की व्यस्त दिनचर्या से गुजर रहे पेशेवरों को लंच और ब्रंच की सुविधा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य को पूरी तरह से समर्पित है EatOnGo (ईटआॅनगो) जो एक आॅनलाइन मंच के रूप में उपभोक्ताओं को खाद्य और स्नैक सामग्री के विकल्प उपलब्ध करवाने का काम बखूबी कर रहा है।

तारु राज अग्रवाल और उदित सरन
तारु राज अग्रवाल और उदित सरन

इसके संस्थापक दो चचेरे भाईयों उदित सरन और तारु राज अग्रवाल की अपना एक व्यवसाय प्रारंभ करने की इच्छा आखिरकार फरवरी 2015 में इस उद्यम के माध्यम से मूर्त रूप लेने के कामयाब रही। खाद्य उद्योग में काम करने का अच्छा-खासा अनुभव रखने वाले उदित डेलमोंटे के अलावा जनरल मिल्स और पिल्सबरी के साथ काम कर चुके हैं। दूसरी तरफ तारु इस उद्यम को प्रारंभ करने से पहले मंत्रा और कैपिलरी टैक्नोलाॅजीज के साथ काम कर चुके हैं।

बैंगलोर में काम करने के दौरान एक दूसरे के साथ रहते हुए इन दोनों को अहसास हुआ कि कैसे इनकी जिंदगी में बहुत बड़ा बदलाव आ गया है क्योंकि इन लोगों हीने के अधिकतर दिनों में सुबह के समय खाली पेट ही अपने-अपने दफ्तरों के लिये निकलना पड़ता था। और इसके परिणतिस्वरूप EatOnGo का जन्म हुआ।

EatOnGo की यात्रा

प्रारंभिक दौर में इस जोड़ी ने अपने मित्रों और परिवार के सदस्यों से धन लेकर EatOnGo की स्थापना की। फिलहाल इनका यह उद्यम उद्योग के जीएसएफ एक्सीलरेटर्स के राजेश साहनी और शेफबास्केट के वरुण जवाहर और निपुण कटियाल जैसे दिग्गजों द्वारा वित्तपोषित किया गया है।

फरवरी में 8 लोगों की एक छोटी सी टीम के साथ प्रारंभ हुआ यह उद्यम अब 30 लोगों की टीम के रूप में विस्तारित हो चुका है जिसमें किचन स्टाफ के रूप में कार्यरत 12 कर्मचारियों के अलावा 12 कर्मचारी डिलीवरी ब्वाॅयस् के रूप में कार्यरत हैं। अपने संचालन के पहले महीने में जहां यह स्टार्टअप प्रतिसप्ताह सिर्फ 100 से 150 भोजन उपलब्ध करवा रहा था वहीं अब यह महीने दर महीने 50 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर प्रतिसप्ताह 2500 से भी अधिक आॅर्डर तक आ गया है। वर्तमान में इस स्टार्टअप के पास 300 से भी अधिक सक्रिय उपभोक्ताओं का आधार है जिसमें से 60 प्रतिशत इनके पास दोबारा आते हैं। इसके अलावा यह कंपनी फिलहाल करीब 8 लाख रुपये के राजस्व को छूने में कामयाब रहा है।

इस स्टार्टअप का लक्ष्य अगस्त महीने के अंत तक पहले चरण के तहत एक मिलियन रुपये का निवेश प्राप्त करने का है। इस निवेश में सहारे यह कंपनी अपने काम को आगे बढ़ाने के अलावा नए कर्मचारियों को अपने साथ जोड़ने और अपनी सेवाओं और उत्पादों के विस्तार करने का इरादा रखती है। बीते दो महीनों में ही इन्होंने अपने मेन्यू में 8 नए व्यंजन शामिल किये हैं और अब ये 36 प्रकार के विभिन्न व्यंजन अपने उपोगकर्ताओं को उपलब्ण करवा रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह जोड़ी अपने व्यापार को दक्षिणी बैंगलोर के मराथाली, एचएसआर लेआउट, कोरामंगला, इलेक्ट्राॅनिक सिटी, सरजरपुर रोड और व्हाइटफील्ड में भी विस्तारित करना चाहती है। फिलहाल यह स्टार्टअप इंदिरानगर, उल्सूर, कोडीहाली, मुरुगेशपलया और डोमलुर के आसपास के इलाकों में संचालन कर रहा हैं। इसके अलावा इनका इरादा जल्द ही एंड्रायड और आईओएस के लिये एक मोबाइल एप्लीकेशन को भी लाने की तैयारियां कर रहे हैं।

वह क्या चीज है जो इन्हें दूसरों से अलग मुकाम पर खड़ा करती है इसके सहसंस्थापक तारु बताते हैं कि व्यंजनों का मानकीकरण और प्रयोग होने वाली सामग्री का उसके मूल स्त्रोत से लाना इन्हें औरो से कहीं आगे खड़ा करता है।

तारु कहते हैं, ‘‘हम अपने उपभोक्ताओं के लिये व्यंजनों की पुरानी और मूल और संरक्षित की हुई पाक विधियों को प्रयोग में लाते हैं। इसके अलावा हम घर में तैयार किये हुए मसालों में मिश्रण का ही इस्तेमाल करते हैं और यही वह मूल कारण है जिसकी वजह से विभिन्न खाना पकाने वालों के हाथों तैयार होने के बावजूद हमारे यहां तैयार होने वाले भोजन के स्वाद और गुणवत्ता में कोई बदलाव नहीं आता है। हमें बहुत अच्छे तरीके से पता है कि हमें क्या और कैसे उपलब्ध करवाना है इसलिये हम अपने उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में कामयाब रहते हैं और कई बार तो उनकी सोच से भी आगे रहने में कामयाब हो रहे हैं। इसके अलावा हम हर खाद्य सामग्री को तैयार करने के लिये उसके मूल स्त्रोत ससे ही मूल सामग्री लाते हैं। उदाहरण के लिये हम लिट्टी-चोखा बनाने के लिये सत्तू बिहार से मंगवाते हैं और मसाला होहा तैयार करने में काम आने वाला चावल विशेष रूप से इंदौर से आता है और इसी वजह से हमारे यहां के पके व्यंजनों के स्वाद में प्रमाणिकता रहती है।’’

अबतक का सफर

इन दोनों ही सहसंस्थापकों का मानना है कि गलतियां और उनसे मिलने वाली सीख ही किसी भी संगठन की नींव को और भी अधिक मजबूत और बेहतर बनाने वाले मुख्य कारक हैं। कार्यों को एक अलग ही तरीके से करने के लिये तत्पर यह युवा जोड़ी अपने इस व्यवसाय में विभिन्न हितधारकों को जोड़ते हुए उनसे मिलने वाली सीखों को भी जानने के लिये उत्सुक हैं।

दोनों कहते हैं, ‘‘अपने खुद के द्वारा प्रारंभ किये गए उद्यम को दिन दूनी रात चैगुनी उन्नति करते हुए देखना एक बहुत ही सुखद अनुभूति है। चारों तरफ देखने पर हम पाते हैं कि करने के लिये असीमित संभावनाओं के साथ हमारे स्टार्टअप के वातावरण में कितनी सकारात्मकता बसी है। हम भविष्य में एक लंबा रास्ता तक करना चाहते हैं और हम खुद को एक ऐसे नाम के रूप में स्थापित करना चाहते हैं कि जब कभी लोगों के बीच नाश्ते, ब्रंच या स्नैक्स की बात हो तो उनकह जबान पर सिर्फ हमारा ही नाम आए।’’

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Worked with Media barons like TEHELKA, TIMES NOW & NDTV. Presently working as freelance writer, translator, voice over artist. Writing is my passion.

Stories by Nishant Goel