'लव यू पापा'- एक पिता के अपनी बेटी में विश्वास की कहानी आपकी आंखें नम कर देगी

पिता-बेटी के खूबसूरत संबंधों को बयां करती शॉर्ट फिल्म है, 'लव यू पापा'।

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लव यू पापा, ये शब्द हर एक लड़की जो अपने पैरों पर खड़ी है, अपने पिता को कहना चाहती है। एक लड़की के पापा की परी से दुनिया की रानी बनने तक का ये सफर ढेर सारे यादगार पलों से बना होता है। पापा का होमवर्क कराना, टेबल पर ही सो जाने पर गोद में उठाकर बिस्तर तक ले जाना, कंधे पर बिठाकर घुमाने ले जाना, हर रोज एक नई दुनिया से वाकिफ कराना... इन सबको समेटे हुई है शॉर्ट फिल्म 'लव यू पापा'।

एक पिता अगर अपनी बेटी के सपनों को समझता है... उसे सपोर्ट करता है, तो दुनिया में ऐसी कोई चीज़ नहीं जो उस लड़की को उसकी मंज़िल तक पहुंचने से रोक सके और वहीं बेटी के लाड़-प्यार और उसके अपने पापा को बेस्ट मानने के विश्वास से एक पिता खुद को सौभाग्यशाली समझता है। संबंधों की इसी खूबसूरती को बयां करती शॉर्ट फिल्म है, 'लव यू पापा'।

'लव यू पापा' नाम की 6 मिनट की ये फिल्म आपको एक नॉस्टैल्जिया टूर पर ले जाती है। फिल्म के साथ-साथ आप भी अपने बचपन में चले जाते हैं, उसी के साथ हंसते हैं रोते हैं। जब फिल्म में पापा की वो बेटी सफल होती है तो आपके चेहरे पर भी वो चमक आ जाती है। वो पिता जब अपनी बेटी को उसी की रोलमॉडल जितना सफल देखता है, तो उसका गर्व से चौड़ा सीना आपको बहुत कुछ अच्छा फील करा जाता है। एक पिता अगर अपनी बेटी के सपनों को समझता है, उसे सपोर्ट करता है तो दुनिया में ऐसी कोई भी चीज नहीं है जो उस लड़की को अपनी मंजिल तक पहुंचने से रोक सके और वहीं बेटी के लाड़-प्यार और उसके अपने पापा को बेस्ट मानने के विश्वास से एक पिता खुद को सौभाग्यशाली समझता है।

एक लड़की के लिए उसके पापा सिर्फ पिता ही नहीं होते बल्कि अच्छे दोस्त भी होते हैं। पिता ही बेटी की जिंदगी में ऐसा पहला इंसान होते हैं, जिसकी छाया में वह खुद को सुरक्षित महसूस करती है और पिता के लिए उनकी बेटी किसी राजकुमारी से कम नहीं होती।

अपनी बेटी को अपने हाथों बड़ा करना, उसका रख-रखाव करना पिता के लिए अलग और नया अनुभव होता है। पिता जीवन में खुद उस उम्र एवं पड़ाव से गुजर चुका होता है। उसे पता होता है, कि लड़के कैसे होते हैं? कब, क्या, क्यों और कैसा चाहते हैं?

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बेटे की हरकतें, खेल, लड़ाई, शैतानियां आदि पिता के लिए उतनी नई नहीं होती, जितनी बिटियों की हंसी, आवाज, अदाएं, कोमलता और सौंदर्य। ऐसा देखा गया है, कि जब भी कोई दम्पति माता-पिता बनने वाले होते हैं, तो उनमें से मां यही कहती है, ‘मुझे तो लड़का चाहिए' और पति छूटते ही कहता है 'न न लड़के तो बदमाश होते हैं मुझे तो एक प्यारी सी बेटी चाहिए।’ शायद बेटी के प्रति लगाव पिता में पुत्री की तरफ पहले से ही होता है। उसको पाल-पोसकर बड़ा करना, उसके हक में बात करना उसे अच्छा लगता है।

इन्हीं सब बेहद महीन मानवीय आदतों को निर्देशक प्रवाल रमन ने बड़े ही जहीन तरीके से इस फिल्म में उतारा है। उन्होने ये फिल्म मशहूर सॉफ्टवेयर कंपनी निहिलेंट के लिए बनाई है। फिल्म में बैकग्राउंड म्यूजिक दिया है संगीतकार हितेश प्रसाद ने, जो कि इस फिल्म की तरह ही काफी प्यारा और दिल को छू लेने वाला है। फिल्म की स्क्रिप्ट मशहूर फोटोग्राफर और निहिलेंट के संस्थापक एल सी सिंह ने लिखी है। वह इससे पहले बड़े परदे के लिए बनारस - ए मिस्टिक लव स्टोरी जैसी अंतर्राष्ट्रीय ख्याति पाने वाली फीचर फिल्म भी बना चुके हैं।

6 मिनट की 'लव यू पाना' नाम की इस पूरी फिल्म यहां देखें...

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