सिनेमाघर में अक्षय कुमार की PADMAN देखने से पहले जानें असली पैडमैन 'अरुणाचलम मुरुगनाथम'  के बारे में

जिनकी जिंदगी पर अक्षय कुमार ने बनाई फिल्म, रीयल लाइफ का 'पैडमैन' अरुणाचलम मुरुगनाथम

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आ रही है अक्षय कुमार की नई फिल्म ‘पैडमैन’, तो आइए, पहले ये जान लेते हैं कि रील लाइफ के हीरो अक्षय भले हों, लेकिन रीयल लाइफ हीरो तो कोई और है, अरुणाचलम मुरुगनाथम, जिनकी जिंदगी पर पहले अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल खन्ना ने किताब लिखी- 'द लीजेंड ऑफ लक्ष्मी प्रसाद', उसके बाद इस पर उनके प्रोडक्शन हाउस से बनी पहली फिल्म आ रही है ‘पैडमैन’। कौन है असली पैडमैन, जिंदगी किस मोड़ पर, किन परिस्थितियों में उसने पैड बनाने की दुनिया की ऐसी सबसे सस्ती मशीन का आविष्कार कर डाला, जिसके कारण उसे भारत सरकार ने पद्मश्री से नवाजा और टाइम मैग्जीन ने जिसे दुनिया के सौ प्रमुख लोगों में शुमार कर डाला, आइए अक्षय की रील लाइफ से पहले जानते हैं अरुणाचलम मुरुगनाथम की रीयल लाइफ की कहानी...

अरुणाचलम मुरुगनाथम
अरुणाचलम मुरुगनाथम
अरुणाचलम मुरुगनाथम को सेनेटरी नैपकिन की मशीन बनाने में लगभग दो साल लग गए। कई बार निराशा हाथ लगी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी, और आखिरकार एक दिन उन्होंने कम लागत में सैनिटरी पैड बनाने की मशीन तैयार कर दी। अरुणाचलम ने मशीन का सुझाव 2006 में आईआईटी मद्रास के सामने रखा, जो सभी को काफी पसंद आया। फिर उनका नाम नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ग्रासरूट टेक्नोलॉजीकल इनोवेशन अवार्ड के लिए भेजा गया।

अभिनेत्री से लेखिका बनी अक्षय कुमार की पत्नी ट्विंकल खन्ना अब फिल्म प्रोडक्शन के क्षेत्र में पूरी तरह सक्रिय हो चुकी हैं। उनके प्रोडक्शन हाउस का नाम है मिसेज फ़नीबोंस। इस प्रॉडक्शन हाउस की पहली फिल्म है- ‘पैडमैन’, जिसका कथानक ट्विंकल खन्ना की किताब 'द लीजेंड ऑफ लक्ष्मी प्रसाद' से लिया गया है। यह किताब तमिलनाडु के सामाजिक कार्यकर्ता अरुणाचलम मुरुगनाथम पर केंद्रित है। गौरतलब है कि अरुणाचलम मुरुगनाथम ने सैनिटरी नैपकिन बनाने वाली सस्ती-सी मशीन से एकदम सस्ते पैड का अविष्कार किया है।

उनके जिंदगीनामे पर ही फिल्म ‘पैडमैन पूरी तरह फोकस है। आने से पहले ही, ट्रेलर के बाद से मीडिया, सोशल मीडिया में धूम मचा रही है अक्षय कुमार की आर. बल्कि निर्देशित नई फिल्म ‘पैडमैन’। सदी के नायक अमिताभ बच्चन बता रहे हैं कि अमेरिका के पास सुपरमैन है, बैटमैन है, स्पाइडरमैन है लेकिन इंडिया के पास ‘पैडमैन’ है।’ इस कॉमेडी-ड्रामा फिल्म में अक्षय के साथ अभिषेक बच्चन, सोनम कपूर, राधिका आप्टे, सुधीर पांडेय, माया आदि अन्य कलाकार मुख्य भूमिकाओं में हैं, साथ में अमिताभ बच्चन का कैमियो भी। आर. बल्कि 'चीनी कम', 'पा', 'शमिताभ', 'की ऐंड का' आदि फिल्में भी निर्देशित कर चुके हैं।

अरुणाचलम मुरुगनाथम की उम्र समय लगभग 56 वर्ष है। उनका जन्म अरुणाचलम कोयंबटूर (तमिलनाडु) के एक अत्य गरीब परिवार में 1962 में हुआ था। अरुणाचलम मुरुगनाथम जब वे बहुत छोटे थे तो उनके पिता का देहांत हो गया। मां ए. वनिता ने मेहनत मजदूरी करके उन्हे पाला-पोसा। चौदह साल की उम्र में उनको स्कूल से निकाल दिया गया तो गुजर बसर करने के लिए वह जहां-तहां नौकरियां करने लगे। सन 1998 में उनकी शादी शांति से हुई। मुरुगनाथम बताते हैं कि 'शादी के बाद सभी आदमियों की तरह मैं भी अपनी पत्नी को इम्प्रेस करने में लगा हुआ था। एक दिन मैंने देखा कि मेरी पत्नी अपने पीछे कुछ छिपाए हुए है। मेरे पूछने पर उसने जवाब दिया कि तुम्हारे काम की चीज नहीं है।

दरअसल, वह पीरियड्स के लिए इस्तेमाल करने वाला कपड़ा छिपा रही थी। मैंने अपनी पत्नी से पूछा कि तुम कपड़ा क्यों इस्तेमाल करती हो तो उसका जवाब था कि पैसे बचाने के लिए। फिर क्या, अपनी पत्नी को इम्प्रेस करने के लिए मैंने उसे सेनेटरी नैपकिन गिफ्ट किया। मैंने 20-30 की उम्र में पहली बार नैपकिन को छुआ था। उन्हीं दिनो मुझे आश्चर्य हुआ कि इसके लिए कंपनी इतना पैसा वसूलती है। फिर मैंने सोचा कि मैं अपनी पत्नी के लिए सस्ते में नैपकिन बनाऊंगा। इसके टेस्ट के लिए मैंने खून की एक पाइप लगाई और एक बॉल कमर पर बांध लिया। जब मैं चलता या साइकिल चलाता तो खून रिस कर नैपकिन में गिरता। इसके बाद औरतों के प्रति मेरा सम्मान बढ़ गया। सेनेटरी नैपकिन के निर्माण के लिए मैंने सस्ते में मशीन बनाई और ग्रामीण इलाको में उसे पहुंचाने का काम किया।'

उसके बाद तो यह आइडिया इतना हिट कर गया कि वह गांव-गांव जाकर महिलाओं को पैड के इस्तेमाल के प्रति जागरूक करने लगे। उनकी इसी संघर्षपूर्ण कहानी को फिल्मी पर्दे पर अभिनेता अक्षय कुमार प्रस्तुत करने जा रहे हैं। अरुणाचलम मुरुगनाथम को इसके लिए भारत सरकार पद्मश्री से सम्मानित कर चुकी है। उनको 'टाइम' मैग्जीन विश्व के 100 प्रभावशाली लोगों की सूची में भी शामिल कर चुकी है। उन्हें ज्वैल्स ऑफ कोयंबटूर अवार्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनकी इस कामयाब और प्रेरक जिंदगी पर कई डोक्यूमेंट्री बन चुकी हैं।

अरुणाचलम मुरुगनाथम को सेनेटरी नैपकिन की यह मशीन बनाने में लगभग दो साल लग गए। कई बार निराशा हाथ लगी, लेकिन हिम्मत नहीं हारी, और आखिरकार एक दिन उन्होंने कम लागत में सैनिटरी पैड बनाने की मशीन तैयार कर दी। अरुणाचलम ने मशीन का सुझाव 2006 में आईआईटी मद्रास के सामने रखा, जो सभी को काफी पसंद आया। फिर उनका नाम नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ग्रासरूट टेक्नोलॉजीकल इनोवेशन अवार्ड के लिए भेजा गया। अरुणाचलम यह अवार्ड जीतने में कामयाब रहे और फिर उन्होंने जयाश्री इंडस्ट्रीज की स्थापित की। इस इंडस्ट्री में 1300 से ज्यादा मशीनें बनाई, जो इस समय 27 राज्यों के अलावा सात देशों में स्थापित की गई हैं।

तत्कालीन राष्ट्रपति के साथ अरुणाचलम
तत्कालीन राष्ट्रपति के साथ अरुणाचलम

इस समय लगभग साढ़े चार हजार गांवों में उनके प्रॉडक्शन हाउस से तैयार सेनेटरी पैड महिलाएं इस्तेमाल कर रही हैं। कई कंपनियों ने अरुणाचलम के इस आविष्कार को खरीदने का ऑफर दिया, लेकिन उन्होंने इंकार कर दिया। आज अरुणाचलम इस मुद्दे पर कार्यक्रम भी सम्बोधित किया करते हैं।

फिल्म ‘पैडमैन’ अरुणाचलम मुरुगनाथम की बायोपिक है। अब तो मुरुगनाथम 'पैडमैन' के नाम से तमिलनाडु के घर-घर में फेमस हो चुके हैं। इस फिल्म का आइडिया उस समय ट्विंकल खन्ना को आया, मुरुगनाथम को उनके काम के लिए 2016 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। यह भी गौरतलब है कि अक्षय कुमार की फिल्म 'पैडमैन' अब नौ फरवरी को रिलीज होगी।

संजय लीला भंसाली की विवादित फिल्म 'पद्मावत' से बॉक्स ऑफिस पर टक्कर से बचने के लिए अपनी मोस्ट अवेटेड फिल्म 'पैडमैन' को टालने पर अक्षय कुमार राजी हो गए। पहले 'पैडमैन' 25 जनवरी को रिलीज होनी थी। 'पैडमैन' का ट्रेलर जबरदस्त है। सोशल मीडिया पर भी इसे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। बॉलीवुड से लेकर आम लोगों को ट्रेलर और अक्षय की परफॉर्मेंस खूब रास आ रही है। 'पैडमैन' बॉक्स ऑफिस पर चलती है तो बहुत ही अच्छा होगा और अगर कमाई के मामले में फीकी रहते हुए भी जो मैसेज यह फिल्म देना चाहती है, अगर उसमें यह कामयाब हो जाती है तो भी सब वसूल हो जाने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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