पुराने नोट अध्यादेश को मिली मंत्रिमंडल की मंजूरी

500 रुपए और एक हजार रुपए के पुराने नोटों पर अध्यादेश जारी किया गया है।10 से अधिक नोट मिलने पर लगेगा जुर्माना।

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चलन से बाहर किये गये 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट रखने वालों पर अब जुर्माना लगेगा। उन्हें जेल की सजा भी हो सकती है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज इस तरह के प्रावधान वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस अध्यादेश को मंजूरी दी गई है। इसमें निर्धारित तिथि के बाद 500, 1000 रुपये के अमान्य नोट रखने वालों पर जुर्माना लगाने के साथ-साथ जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। रिजर्व बैंक कानून में संशोधन वाले एक अन्य अध्यादेश को भी मंजूरी दी गई है, जिसमें अमान्य किये गये इन नोटों के दायित्व से सरकार और केन्द्रीय बैंक को मुक्त किया गया है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद से बचा जा सके।

आधिकारिक सूत्रों ने अध्यादेश को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने की जानकारी दी है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया, कि दंड का यह प्रावधान किस तिथि के बाद लागू होगा। 

सरकार ने 500, 1,000 रुपये के अमान्य नोटों को बैंकों में जमा कराने के लिये 50 दिन की समयसीमा तय की थी। यह समय 30 दिसंबर को समाप्त हो रहा है। इसके अलावा यह भी कहा गया था, कि एक घोषणा पत्र के साथ 31 मार्च तक इन नोटों को रिजर्व बैंक के विशिष्ट कार्यालयों में जमा कराया जा सकेगा। 

अध्यादेश के प्रावधानों के अनुसार दस से अधिक अमान्य नोट रखने पर वित्तीय जुर्माना लग सकता है और कुछ मामलों में चार साल तक जेल की सजा भी हो सकती है। सरकार ने 8 नवंबर की मध्यरात्रि से 500, 1,000 रूपये के पुराने नोटों को अमान्य घोषित कर दिया था। ऐसे नोटों को नये नोटों से बदलने अथवा बैंक, डाकघर खातों में जमा कराने को कहा गया। सरकार ने हालांकि, नोट बदलने की सुविधा को तो कुछ समय बाद वापस ले लिया लेकिन पुराने नोट बैंक और डाकघर खातों में जमा कराने के लिये शुक्रवार 30 दिसंबर तक का समय है।

साथ ही कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है, कि नोटबंदी का फैसला सही कदम है, लेकिन सरकार नकदी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उचित व्यवस्था करने में असफल रही जिसकी वजह से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘मोदी सरकार द्वारा 1,000 रपये और 500 रपये के नोटों को चलन से बाहर करने का फैसला सही है।’ उन्होंने कहा, ‘हालांकि सरकार उचित व्यवस्था करने में असफल रही जिसकी वजह से लोगों को निराशा हुई।’