गरीबों को फ्री में शॉपिंग मॉल का एक्सपीरियंस और शॉपिंग करा रहा चेन्नई का यह स्टोर

 चेन्नई के तीन दोस्तों ने सामाजिक गैरबराबरी को खत्म करने के लिए उठाया एक सार्थक कदम...

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मॉल के बाहर भीख मांगते बच्चों को ही ले लीजिए, शायद उन्हें कभी मॉल के भीतर घुसने का अनुभव नहीं हासिल हो सकेगा। आपको क्या लगता है कि ऐसी सामाजिक गैरबराबरी सही है? आपके विचार कुछ भी हों, लेकिन आप कहेंगे कि नहीं। लगभग सभी को यही लगता है कि सबको समाज में प्रतिष्ठा के साथ जीने का हक होना चाहिए।

थुली के अंदर शॉपिंग करते लोग
थुली के अंदर शॉपिंग करते लोग
 चेन्नई में इस अनोखे स्टोर ने शुरू के दो महीने में ही 2,000 से ज्यादा लोगों को स्टोर का अनुभव कराया। अब वे दूसरे एनजीओ की मदद से पढ़ाई और हेल्थकेयर जैसे मुद्दों पर भी काम करना चाहते हैं।

हर शहर में शॉपिंग करने के लिए विशालकाय और भव्य मॉल बन गए हैं। लेकिन देश की एक बड़ी आबादी है जिन्हें कभी इन मॉल के अंदर घुसने का मौका नसीब नहीं हो पाता। मॉल के बाहर भीख मांगते बच्चों को ही ले लीजिए, शायद उन्हें कभी मॉल के भीतर घुसने का अनुभव नहीं हासिल हो सकेगा। आपको क्या लगता है कि ऐसी सामाजिक गैरबराबरी सही है? आपके विचार कुछ भी हों, लेकिन आप कहेंगे कि नहीं। लगभग सभी को यही लगता है कि सबको समाज में प्रतिष्ठा के साथ जीने का हक होना चाहिए। चेन्नई के तीन दोस्तों ने इस गैरबराबरी को खत्म करने के लिए एक सार्थक कदम उठाया है।

शिवाजी प्रभाकर, अजीत और जेयबाला ने इसी साल फरवरी में एक अभियान शुरू किया जिसका नाम है 'थुली'। यह एक ऐसी पहल है जिसमें पिछड़े तबके के लोगों को शॉपिंग मॉल का अनुभव कराया जाएगा। इसका मकसद है, 'चैरिटी विद डिग्निटी', यानी सम्मान के साथ परोपकार। 'थुली' के तहत उन कपड़ों और ऐक्सेसरीज को इकट्ठा किया जाता है जो लोगों द्वारा चैरिटी में मिले होते हैं। इसके बाद उन्हें जरूरत और हालत के हिसाब से छांटा जाता है। छांटने के बाद उनकी अच्छे से धुलाई होती है। जरूरत के हिसाब से ड्राई क्लीनिंग भी की जाती है। धुलने और प्रेस करने के बाद साइज और जेंडर के हिसाब से इन्हें स्टोर में लगा दिया जाता है।

अब बारी आती है गरीबों को शॉपिंग स्टोर तक लाने की। उन्हें 500, 1000 और 2,000 रुपये तक के वाउचर्स दे दिए जाते हैं, जिससे वे स्टोर के अंदर रखे सामानों को खरीद सकते हैं। इससे उन्हें पैसे भी नहीं खर्च करने पड़ते और शॉपिंग स्टोर का अनुभव मिलने के साथ ही कपड़े भी मुफ्त में मिल जाते हैं। वे अपने मन मुताबिक कपड़ों का चुनाव कर सकते हैं। थुली के संस्थापक अजीत कुमार ने द हिंदू से बात करते हुए कहा, 'कुछ दिनों पहले हमने इस पहल की जानकारी सोशल मीडिया पर शेयर की तो लोगों का गजब का रिस्पॉन्स मिला।' कुमार एक हेल्थकेयर सपोर्ट सर्विस में काम करते हैं।

'थुली' ने इस काम के लिए एलॉफ्ट होटल और प्रवीन ट्रैवल्स के साथ पार्टनरशिप की है जो कि लॉन्ड्री और ट्रांसपोर्ट सर्विस प्रदान करती है। प्रवीन ट्रैवल्स के माध्यम से कपड़ों को रिसीव करना और डिलिवर करने तक का प्रॉसेस संपन्न किया जाता है। इसके अलावा कई सारे संस्थानों ने इन्हें सपॉर्ट करने के लिए वॉलंटीयर उपलब्ध कराए हैं। चेन्नई में इस अनोखे स्टोर ने शुरू के दो महीने में ही 2,000 से ज्यादा लोगों को स्टोर का अनुभव कराया। अब वे दूसरे एनजीओ की मदद से पढ़ाई और हेल्थकेयर जैसे मुद्दों पर भी काम करना चाहते हैं।

इस स्टोर की एक और खास बात ये है कि यहां से लोग वाउचर्स कलेक्ट कर सकते हैं और उन्हें जरूरतमंदों को दे सकते हैं। ताकि वे भी इस स्टोर का अनुभव ले सकें। इस पहल के पीछे की सोच के बारे में बताते हुए अजीत कहते हैं, 'शुरू में हमने छोटे स्तर पर ये काम शुरू किया था। लेकिन बाद में इसे परमानेंट करने की योजना बनी। जब हमने इस पर काम करना शुरू किया था तो सोचा नहीं था कि इतना अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा।'

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