खिचड़ी को मिलेगा नेशनल फूड का दर्जा, वर्ल्ड फूड डे पर होगी घोषणा

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अगले चार नवंबर को हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली में वर्ल्ड फूड डे का आयोजन किया जाएगा जिसमें 800 किलोग्राम खिचड़ी बनवाने की योजना है। इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की भी तैयारियां चल रही हैं। 

सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
सांकेतिक तस्वीर (फोटो साभार- सोशल मीडिया)
खिचड़ी का जिक्र हमारे इतिहास में भी कई बार हुआ है। मुगल काल से लेकर आज तक खिचड़ी सर्वकालीन भोजन पर विराजमान है। फूड डे पर देश के उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।

भारत में कई सारे त्योहारों पर भी खिचड़ी खाई जाती है। उत्तर भारत में तो खिचड़ी नाम का एक पर्व ही है। पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों में इसकी अच्छी खासी लोकप्रियता की है। 

आमतौर पर खिचड़ी खाने की नौबत तभी आती है जब विशेष परिस्थितियों में डॉक्टर हमें इसे खाने की सलाह देते हैं। वैसे तो खिचड़ी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होती है और साथ ही अमीर-गरीब हर किसी की पहुंच में भी आसानी से होती है। अब वही खिचड़ी स्पेशल होने वाली है। दरअसल इसे नेशनल फूड घोषित किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने खिचड़ी को इंडिया का नेशनल फूड बनाने के बारे में सोचा है और दो दिन बाद 4 नवंबर को दिल्ली में मनाए जाने वाले फूड डे पर खिचड़ी को नेशनल फूड बनाने की घोषणा भी कर दी जाएगी।

आपको बता दें कि देश के पीएम नरेंद्र मोदी का भी पसंदीदा भोजन खिचड़ी ही है। कुछ दिन पहले ही अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर मोदी ने खिचड़ी खाने की चाहत जताई थी। वैसे मीडिया रिपोर्ट्स में कई बार ये भी आ चुका है कि वे दिन में एक वक्त सिर्फ खिचड़ी ही खाते हैं। खिचड़ी बनाने की कई सारी तरकीबें हैं और दाल, चावल और मसालों से बनी खिचड़ी को देश का राष्ट्रीय भोजन घोषित किया जाएगा। इस दौरान मशहूर शेफ संजीव कपूर के भी आने की खबरें आ रही हैं।

अगले चार नवंबर को हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली में वर्ल्ड फूड डे का आयोजन किया जाएगा जिसमें 800 किलोग्राम खिचड़ी बनवाने की योजना है। इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की भी तैयारियां चल रही हैं। खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय ने खिचड़ी को भारतीय भोजन के रूप में पेश करने का आइडिया दिया था, जिसे स्वीकार कर लिया गया है। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि चाहे अमीर हों या गरीब, खिचड़ी सबका पसंदीदा भोजन है। एक तरह से व्यंजनों का राजा है। सेहत के लिए लाभदायक है। चावल, दाल और सीमित मात्रा में मसाले रहते हैं, जिससे यह काफी स्वादिष्ट भी है। बेहद कम खर्च में और बेहद जल्दी तैयार हो जाती है।

खिचड़ी का जिक्र हमारे इतिहास में भी कई बार हुआ है। मुगल काल से लेकर आज तक खिचड़ी सर्वकालीन भोजन पर विराजमान है। फूड डे पर देश के उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने बताया कि खिचड़ी को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने के लिए मार्केटिंग रणनीति तैयार की गई है। मंत्री की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक खिचड़ी को विश्वभर के रेस्तरां में लोकप्रिय बनाने के बारे में जोर दिया जा रहा है। अगर ये सफल हुआ तो दुनिया के कई सारे देशों के मेन्यू में खिचड़ी को भी स्थान मिल जाएगा।

खिचड़ी को आयुर्वेदिक फूड माना जाता है। क्योंकि यह पूरी तरह से न केवल सुपाच्य होता है बल्कि संतुलित व बेहद पौष्टिक भी होता है। आमतौर पर मूंग दाल की खिचड़ी देश में काफी प्रचलन में है। मशहूर शेफ का कहना है कि खिचड़ी चूंकि पौष्टिक व सुपाच्य होती है इसलिए डॉक्टर बीमारी में खिचड़ी खाने की सलाह देते हैं। मूंग दाल फाइबर से भरपूर होती है अतः इसको खाने के बाद काफी देर तक भूख नहीं लगती है। इसे चावल और दाल के अलावा साबूदाने के साथ भी बनाया जाता है।

भारत में कई सारे त्योहारों पर भी खिचड़ी खाई जाती है। उत्तर भारत में तो खिचड़ी नाम का एक पर्व ही है। पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और गुजरात जैसे राज्यों में इसे अच्छी खासी लोकप्रियता मिल चुकी है। वहीं दक्षिण भारत में कुछ अलग तरह से इसे तैयार किया जाता है। तमिलनाडु में पोंगल नाम की रेसिपी खिचड़ी से मिलती जुलती है। कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम जैसे गुणों से युक्त दाल वाली खिचड़ी वाकई में अब खास बन जाएगी।

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