अब टेस्ट कराने के लिए लैब जाने की ज़रूरत नहीं, घर से ही सैंपल ले रहा यह स्टार्टअप 

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आज हम आपको बेंगलुरु आधारित '5th Vital' नाम के स्टार्टअप के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने ग्राहकों को पैथॉलजी टेस्ट्स आदि के लिए घर पर ही सैंपल कलेक्शन की सुविधा मुहैया करा रहा है।

5th Vital के संस्थापक  डॉ. वसीम अफ़सार, प्रताप चंद्रा, हरजोत सिद्धू और प्रवीण पोतलुरी
5th Vital के संस्थापक  डॉ. वसीम अफ़सार, प्रताप चंद्रा, हरजोत सिद्धू और प्रवीण पोतलुरी
इस स्टार्टअप की शुरुआत 40 लाख रुपए के निवेश के साथ हुई थी। इसके बाद कुछ निवेशकों और ब्रैंड कैपिटल (टाइम्स ऑफ़ इंडिया की निवेश इकाई) की मदद से कंपनी ने 5 लाख डॉलर फ़ंडिंग हासिल की। अब उनका लक्ष्य है कि इस साल सीरीज़ ए लेवल की फ़ंडिंग हासिल की जाए।

स्टार्टअप: फ़िफ़्थ वाइटल (5th Vital)
फ़ाउंडर्स: डॉ. वसीम अफ़सार, प्रताप चंद्रा, हरजोत सिद्धू और प्रवीण पोतलुरी
शुरुआत: 2017
जगह: बेंगलुरु
काम: लोगों के घरों तक हेल्थकेयर सुविधाएं पहुंचाना
सेक्टर: हेल्थकेयर
फ़ंडिंग: $500,000 (5 लाख डॉलर)

आज हम आपको बेंगलुरु आधारित '5th Vital' नाम के स्टार्टअप के बारे में बताने जा रहे हैं, जो अपने ग्राहकों को पैथॉलजी टेस्ट्स आदि के लिए घर पर ही सैंपल कलेक्शन की सुविधा मुहैया करा रहा है। इस स्टार्टअप के चारों फ़ाउंडर मेंबर्स की पहचान 'कॉल हेल्थ' नाम की कंपनी में काम करने के दौरान हुई। साथ काम करते हुए, सभी की यह इच्छा थी कि हेल्थ केयर सेक्टर में एक स्टार्टअप की शुरुआत की जाए। चारों ही लोग काफ़ी अनुभवी थे और पिछले करियर में उन्होंने ऑन्त्रप्रन्योरशिप की बारीकियों के संबंध में काफ़ी कुछ सीखा था।

कंपनी के को-फ़ाउंडर डॉ. वसीम एमबीबीएस होने के साथ-साथ आईआईएम इंदौर से एमबीए ग्रैजुएट भी हैं। वह मूलरूप से ओडिशा के रहने वाले हैं और हेल्थकेयर सेक्टर में इंडियन नेवी, स्वास्थ्य मंत्रालय, सउदी अरब और टाटा हॉस्पिटल्स के साथ काम कर चुके हैं। डॉ. वसीम कॉलेज के दिनों से ही अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते थे, लेकिन उनकी यह इच्छा 40 की उम्र के बाद पूरी हो सकी।

कंपनी के को-फ़ाउंडर हरजोत पंजाब के रहने वाले हैं और वह इंजीनियरिंग ग्रैजुएट हैं। 34 वर्षीय हरजोत ने डेलोइटे और सत्यम कंप्यूटर्स के साथ काम किया है। साथ ही, उन्होंने आईआईएम कोलकाता से एमबीए की डिग्री ली है और वह इस स्टार्टअप से पहले भी एक स्टार्टअप चला चुके हैं, जिसमें उन्हें कुछ हद तक सफलता भी मिली थी। कंपनी के को-फ़ाउंडर और झारखंड के रहने वाले प्रताप चंद्रा ने भी आईआईएम कोलकाता से एमबीए किया है और वह एशियन पेंट्स, आईएफ़बी और कोहलर के साथ काम कर चुके हैं। प्रताप पूर्व में दो स्टार्टअप्स चला चुके हैं, लेकिन दोनों ही बार उन्हें सफलता का ज़ायका चखने नहीं मिला। कंपनी के चारों फ़ाउंडर मेंबर्स में प्रवीण का करियर ही ऑन्त्रप्रन्योरशिप के लिहाज से सबसे सफल रहा है। प्रवीण ने आईएसबी से एमबीए की डिग्री ली है और 38 वर्षीय प्रवीण हैदराबाद में अपनी पत्नी के साथ मिलकर बिज़नेस चला रहे हैं।

हैदराबाद स्थित 'कॉलहेल्थ' नाम के स्टार्टअप में काम करते हुए ही इन चारों को हेल्थकेयर सेक्टर में एक नए प्रयोगात्मक मॉडल के साथ ख़ुद का स्टार्टअप शुरू करने की प्रेरणा मिली। आज के दौर की बेहद व्यस्त ज़िंदगी में लोगों की मदद के उद्देश्य के साथ चारों ने 2017 में बेंगलुरु से '5th Vital'की शुरुआत की।

प्रताप ने अपने स्टार्टअप के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया, "हमारे ग्राहकों को अपना चेक-अप या टेस्ट कराने के लिए पैथॉलजी लैब तक नहीं जाना पड़ता; बल्कि लैब ख़ुद चलकर उनके घर तक आती है यानी ग्राहकों के सैंपल लेने के पैथॉलजी लैब का कर्मचारी उनके घरों तक जाता है। इस मॉडल की मदद से हमारे लैब पार्टनर्स के बिज़नेस को भी बढ़ावा मिल रहा है और ग्राहकों को भी पहले से कहीं अधिक सहूलियत मिल रही है।" मरीज कॉल सेंटर, वेबसाइट या वॉट्सऐप के ज़रिए अपनी बुकिंग करा सकते हैं और साथ ही, अपने प्रेसक्रिप्शन आदि भी शेयर कर सकते हैं।

हेल्थकेयर में, शरीर के चार सबसे महत्वपूर्ण मानक होते हैं, शरीर का तापमान, ब्लड प्रेशर, पल्स और ब्रीदिंग रेट। '5th Vital' के फ़ाउंडर्स ने इस आधार पर ही अपने स्टार्टअप का नाम रखा, जो यह स्पष्ट करता है कि इन चार मानकों के अलावा भी कई ऐसे महत्वपूर्ण मानक होते हैं, जिनका पता हम बिना जांच के नहीं लगा सकते।

इस स्टार्टअप की शुरुआत 40 लाख रुपए के निवेश के साथ हुई थी। इसके बाद कुछ निवेशकों और ब्रैंड कैपिटल (टाइम्स ऑफ़ इंडिया की निवेश इकाई) की मदद से कंपनी ने 5 लाख डॉलर फ़ंडिंग हासिल की। अब उनका लक्ष्य है कि इस साल सीरीज़ ए लेवल की फ़ंडिंग हासिल की जाए।

प्रताप बताते हैं कि उनकी पूरी कोशिश रहती है कि सैंपल कलेक्शन के लिए पैथॉलजी का कर्मचारी समय पर मरीज के पास तक पहुंचे। साथ ही, कंपनी इस बात का भी पूरा ध्यान रखती है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के सभी प्रोटोकॉल्स का पालन किया जाए। सैंपल कलेक्ट करने के बाद स्टार्टअप अपने लैब पार्टनर्स की मदद से जांच करवाता है और इसके बाद मरीजों को रिपोर्ट ऑनलाइन भेज दी जाती है। प्रताप ने बताया कि अपने फ़ील्ड फ़ोर्स मैनेजमेंट ऐप की मदद से वह पूरी प्रक्रिया की बारीकी से जांच करते रहते हैं।

प्रताप ने कहा, "ग्राहकों से मिलने वाले भुगतान में से प्रोसिसिंग फ़ी पार्टनर लैब्स को दे दी जाती है। अगर किसी रिपोर्ट में कोई ग़लती पाई जाती है तो ग्राहकों को पूरा पैसा वापस कर दिया जाता है और इसके बाद दो अलग-अलग लैबों की मदद से फिर से पूरा टेस्ट कराया जाता है।" '5th Vital'ने डॉ. रेमेडीज़ लैब, टेकमेड, थायरोकेयर और स्ट्रैंड लाइफ़ साइंसेज़ के साथ पार्टनरशिप कर रखी है। साथ ही, कंपनी ने विजया डायग्नोस्टिक्स लैब्स के साथ भी करार कर रखा है, ताकी उनके ग्राहकों को स्कैनिंग, इमेजिंग सर्विसेज़ आदि की सुविधा भी मिल सके। प्रताप ने बताया कि कंपनी की कोर टीम में अभी 27 सदस्य जुडे़ हुए हैं।

'5th Vital' की टारगेट ऑडियंस 30 साल से अधिक उम्र वाले लोग हैं और विशेष रूप से वह आबादी जो अपनी लाइफ़स्टाइल के चलते इतने व्यस्त हैं कि उनके पास रूटीन चेकअप इत्यादि के लिए लैब तक जाने का समय ही नहीं है। प्रताप का दावा है कि 2017 में लॉन्च के बाद से अभी तक उनके पास 50 हज़ार रजिस्टर्ड कस्टमर्स हैं और कंपनी अभी तक 3 लाख से ज़्यादा टेस्ट करा चुकी है। साथ ही, कंपनी के कस्टमर बेस का रिपीट रेट 25 प्रतिशत है।

प्रताप का दावा है कि उनका ऐनुअल ग्रोथ रेट 1,144 प्रतिशत का है और कंपनी की योजना इस वित्तीय वर्ष में 4 मिलियन डॉलर के एग्ज़िट रेट तक पहुंचने की है। प्रताप ने बताया कि फ़िलहाल उनकी कंपनी रोज़ाना 150 सैंपल्स की प्रोसेसिंग करवाती है और उनका लक्ष्य है कि इस आंकड़े को अगले वित्तीय वर्ष तक 10 गुना तक बढ़ाया जाए। प्रताप का मानना है कि उनकी मेडिकल प्रोटोकॉल का उपयुक्त ढंग से पालन करती है और इस वजह से ही ग्राहक उन्हें प्राथमिकता देते हैं। हाल ही में, '5th Vital'ने पुणे में भी अपनी सुविधाएं शुरू कर दी हैं। कंपनी की योजना है कि जल्द से जल्द चेन्नई, हैदराबाद और मुंबई में सर्विसेज़ लॉन्च की जाएं।

भारत में होम हेल्थकेयर सेगमेंट (डायग्नोस्टिक्स) अनुमानित रूप से 2 बिलियन डॉलर का है और इसका कम्पाउंड ऐनुअल ग्रोथ रेट 20 प्रतिशत का है। जल्द ही भारतीय शहरों में टेस्ट कराने के लिए क्लीनिक या लैब तक जाना एक पुरानी बात हो जाएगी।

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