मुस्लिम युवक को मॉब लिन्चिंग से बचाने वाले उत्तराखंड के पुलिसकर्मी को मिला पुलिस मेडल

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गगनदीप ने उस घटना के बाद कहा था कि वो सिर्फ अपना फर्ज़ अदा कर रहे थे। अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से निभाते हुए उन्होंने लड़के को भीड़ से बचाया जिसका उन्हें पुरस्कार भी मिला। 

गगनदीप सिंह
गगनदीप सिंह
गगनदीप जैसे ही वहां पहुंचे उन्होंने लड़के को अपने सीने से लगा लिया और भीड़ से आने वाली गालियां, धमकियां और धक्के भी खुद ही सह लिए। इस साहस पर पूरे सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ हुई और उन्हें सलाम किया गया।

बीते माह उत्तराखंड के रामनगर में कुछ लोगों की भीड़ ने एक मुस्लिम युवक को इस आरोप के तहत पकड़ लिया था क्योंकि वह एक हिंदू लड़की के साथ मंदिर तक पहुंच गया था। वह लड़की उसकी दोस्त भी थी, लेकिन फिर भी उपद्रवी उस लड़के को पीटने पर उतारू हो गए थे। इसी बीच सब इंस्पेक्टर गगनदीप मौके पर पहुंचे और उन्होंने अपनी ड्यूटी निभाते हुए लड़के को भीड से बचाया। भीड़ जिस तरह से उस लड़के को मारने पर आमादा थी अगर गगनदीप वहां नहीं पहुंचते तो पता नहीं क्या हो जाता।

गगनदीप जैसे ही वहां पहुंचे उन्होंने लड़के को अपने सीने से लगा लिया और भीड़ से आने वाली गालियां, धमकियां और धक्के भी खुद ही सह लिए। इस साहस पर पूरे सोशल मीडिया पर उनकी जमकर तारीफ हुई और उन्हें सलाम किया गया। बीते 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उत्तराखंड के डीजीपी अनिल रतूड़ी ने उन्हें 'फ्रंटियर सर्विस रिस्पेक्ट मार्क' अवॉर्ड से सम्मानित किया।

जिस घटना के लिए उन्हें सम्मानित किया गया वह नैनीताल जिले के रामनगर में घटित हुई थी। दरअसल रामनगर में जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के पास एक मंदिर है। मंदिर के पास ही एक नदी भी बहती है जहां अक्सर युवक युवतियां अपने दोस्तों के साथ बैठे रहते हैं। लेकिन दरअसल वो युवक मुस्लिम था इसलिए उस पर लव जिहाद का आरोप लगाकर कुछ संगठन केक लोग वहां पहुंच गए थे।

गगनदीप ने उस घटना के बाद कहा था कि उवे सिर्फ अपना फर्ज़ अदा कर रहे थे। अपनी ड्यूटी को ईमानदारी से निभाते हुए उन्होंने लड़के को भीड़ से बचाया जिसका उन्हें पुरस्कार भी मिला। आज समाज जिस तरफ जा रहा है उस स्थिति में हमें गगनदीप जैसे पुलिसकर्मियों की सख्त जरूरत है। उनकी बहादुरी पर मिलने वाला सम्मान इस बात की तस्दीक करता है कि अपना काम पूरी ईमानदारी करने पर जो परिणाम मिलता है उससे बड़ी खुशी किसी के लिए क्या ही होगी।

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