सही प्लानिंग न होने के कारण दिल्ली एक बार फिर भारी प्रदूषण की चपेट में 

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हमें यह समझने की ज़रूरत है कि पटाखे या फिर पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण सिर्फ़ कुछ समय के लिए होता है, जबकि साल भर प्रदूषण के दूसरे स्रोत की वजह से दिल्ली की हवा साँस लेने लायक नहीं रहती है।

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
हम उम्मीद करते हैं कि सरकार ज्यादा जिम्मेदारीपूर्वक वायु प्रदूषण से निपटने की कोशिश करेगी और प्रदूषण के सभी स्रोतों से निपटने के लिये लोगों को विश्वास में लेगी तथा कठोर नियम और मानको को लागू करेगी।

हर साल दिवाली के बाद प्रदूषण का विश्लेषण करना हमारी आदत में शुमार हो चुका है। हमें यह समझने की ज़रूरत है कि पटाखे या फिर पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण सिर्फ़ कुछ समय के लिए होता है, जबकि साल भर प्रदूषण के दूसरे स्रोत की वजह से दिल्ली की हवा साँस लेने लायक नहीं रहती है।

सबसे बड़ी विडम्बना है कि हम प्रदूषण के सभी स्रोत चाहे वो कोयला पावर प्लांट हो, औद्योगिक और परिवहन से निकलने वाला प्रदूषण हो या फिर दिवाली और पराली जलाने से निकलने वाला प्रदूषण हो, इन सबसे निपटने के लिये एक ठोस कार्ययोजना बनाकर उसे लागू करना अभी भी हमारे लिये एक बड़ी चुनौती है। आंकड़े बताते हैं कि इन पटाखों की वजह से दिवाली पर दिल्ली की हवा में 2017 के मुकाबले ज्यादा जहर घुला। पीएम 10, कार्बन मोनोऑक्साइड और तमाम अन्य जहरीली गैसें भी पिछले साल के मुकाबले कहीं ज्यादा थीं। 

हम उम्मीद करते हैं कि सरकार ज्यादा जिम्मेदारीपूर्वक वायु प्रदूषण से निपटने की कोशिश करेगी और प्रदूषण के सभी स्रोतों से निपटने के लिये लोगों को विश्वास में लेगी तथा कठोर नियम और मानको को लागू करेगी।

हाल ही में भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर आयोजित सम्मेलन में दिसंबर तक राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम को लागू करने का वादा किया है। अब हमलोग उम्मीद करते हैं कि इस कार्यक्रम में उत्सर्जन को कम करने के लिये समय सीमा भी तय की जायेगी और तीन साल में 35 प्रतिशत और अगले पांच साल में 50 प्रतिशत वायु प्रदूषण को कम करने के लक्ष्य को शामिल किया जायेगा।"

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