स्वदेशी कला शैलियों और वाणिज्यिक उत्पादों को बचाने के लिए आईआईटी खड़गपुर के नये प्रयास

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कश्मीर के ‘कांगड़ी’ की तरह एक खास क्षेत्र में सीमित स्वदेशी कला शैलियों और वाणिज्यिक उत्पादों को बचाने के लिए आईआईटी खड़गपुर ऐसे समुदायों को भौगोलिक संकेतक (जीआई)टैग हासिल करने और उनके उत्पादों के लिए व्यापक बाजार तैयार करने में उनकी मदद करेगा।

इस नयी परियोजना की घोषणा करते हुए आईआईटी खड़गपुर के निदेशक पी पी चक्रवर्ती ने कहा कि अगले तीन से पांच वर्षों में वे लोग देश भर से ऐसे 100 उत्पादों की पहचान करेंगे और समुदाय को जीआई टैग हासिल करने में उनकी मदद करेंगे।

इस दिशा में शुरआत करते हुए संस्थान की बौद्धिक संपदा शाखा ने पश्चिम बंगाल के मिदनापुर की अनूठी ‘गोयना बोरी’ ललित कला के लिए जीआई टैग हासिल करने की प्रक्रिया में मदद की शुरआत की है। राज्य के मिष्ठानों के अलावा आईआईटी की योजना कांगड़ी के लिए जीआई हासिल करने की भी है। इन पारंपरिक टोकरियों का इस्तेमाल कश्मीर के लोग अपने को गर्म रखने के लिए करते हैं।

टैगौर के शांतिनिकेतन के संरक्षण के लिए आईआईटी और एमआईटी ने मिलाया हाथ

ऐतिहासिक धरोहर रविंद्रनाथ टैगोर के आवास शांतिनिकेतन को संरक्षित करने के तरीकों की तलाश करने के लिए आईआईटी खड़गपुर के वास्तुकला के विद्यार्थी अमेरिका के संस्थान एमआईटी के साथ मिलकर शोध करेंगे।

आईआईटी खड़गपुर के वास्तुकला एवं क्षेत्रीय योजना विभाग और मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के स्कूल ऑफ टेक्चर के बीच ‘वर्तमान विकसित दुनिया में शहरीकरण’ से संबंधित पाठ्यक्रम के लिए साझेदारी की गई है। दोनों संस्थानों के स्नातक और स्नातक पूर्व स्तर के छह से आठ विद्यार्थी इस साल अक्तूबर में अपने शोध कार्य के लिए शांतिनिकेतन जाएँगे।

अधिकारियों ने बताया कि इस अवधि के दौरान वे विश्व भारती विश्वविद्यालय के समग्र स्थल प्रबंधन को लेकर प्रस्ताव भी बनाएँगे। वे विश्वविद्यालय परिसर के बिखरे और अव्यवस्थित विकास को नियंत्रित करने के लिए मार्गदर्शन भी देंगे ताकि इस संस्थान की स्थापना के पीछे टैगोर की मूल भावना को पुन:स्थापित किया जा सके।

विश्व भारती विश्वविद्यालय के अधिकारी बीते कुछ साल से इस स्थल को यूनेस्को की विश्व विरासतों की सूची में शमिल करवाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अब तक असफलता ही हाथ लगी है। एमआईटी हार्वर्ड बोस्टन समुदाय और आईआईटी खड़गपुर के शिक्षक सदस्य तथा शोधकर्ता इस काम में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करेंगे। अधिकारियों ने बताया कि ‘खोवाई’ के निकट पर्यावरण और बरसाती जल के संरक्षण के लिए वे रणनीतिक योजना भी बनाएँगे।

इस पर्यावरणीय क्षेत्र के लिए मिट्टी का क्षरण, कटाव में कमी, संरचना में बदलाव और वनस्पति तथा जीव-जंतुओं का कम होना जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।- पीटीआई