प्रदूषित हवा को स्वच्छ करने की ताकत है “ओन मास्क” में

सितंबर, 2012 में हुई कंपनी की स्थापनाहैदराबाद में “ओन मास्क” का जलवाबार-बार हो सकता है “ओन मास्क” का इस्तेमाल

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कहते हैं आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। कुछ ऐसा ही कारण था “ओन मास्क” के जन्म लेने का। जब सत्या कृष्णा गन्नी मैकेनिकल और कंप्यूटर विज्ञान में इलिनोइस विश्वविद्यालय से एमएस करने का बाद भारत लौटे। तो यहां बढ़ते प्रदूषण से परेशान सत्या कृष्णा गन्नी को इससे निपटने के लिए ओन मास्क में इसका समाधान नजर आया।

सत्या “मार्ट मोबी” के संस्थापक भी रह चुके हैं। वहां उनके कई दोस्त बने इनमें से एक थे डॉक्टर अरूण कुमार जो सहसंस्थापक और सीटीओ थे। जो अमेरिका के जॉर्जिया इंस्टिट्यूट ऑफ टेकनॉलिजी में डॉक्टरेट उम्मीदवार थे। अरुण का केमिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कैसे नियंत्रण किया जाए इसको लेकर जुनून था। यही बात सत्या के विचारों को आकार देने के लिये काफी थी। तब दोनों ने मिलकर सितंबर 2012 में हैदराबाद में कंपनी की स्थापना की। अगले साल सितंबर 2013 में इस कंपनी के साथ शेफाली श्रीमाली, सीईओ के तौर पर जुड़ गई और आज वो कंपनी की एक हिस्सेदार भी हैं। शेफाली ने दिल्ली आईआईटी से डिग्री हासिल की और स्पेन के आईईएसई बिजनेस स्कूल से अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वो अपना खुद का व्यवसाय करना चाहती थी और उनको ये अच्छा मौका दिखा जिसके बाद वो भी इनके साथ जुड़ गईं।

दिनों दिन हवा की बिगड़ती गुणवत्ता चिंता का एक प्रमुख कारण है और “ओन मास्क” वायु प्रदूषण से लड़ने में काफी मददगार है। ये मास्क सुनिश्चित करता है कि हम बेहतर गुणवत्ता वाली हवा लें। “ओन मास्क” प्रदूषित हवा से लड़ने में तो कारगर है ही इसे धोया और दोबारा इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ये दूसरे मास्क की तरह नहीं है इसे काफी जांच परख कर तैयार किया गया है। पायलट रन के तौर पर जब इसका इस्तेमाल किया गया तो ग्राहकों के सुझाव पर इसमें बेहतरी के लिए कुछ बदलाव भी किए गए। “ओन मास्क” ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से बेचा जाता है इसके अलावा विभिन्न जगहों पर स्टॉल या खास मुहिम चलाकर भी इसे बेचा जाता है।

शेफाली बताती हैं कि “अब तक हमने इसके प्रचार और प्रसार के लिए कोई खास मार्केटिंग नहीं की है। ऑफलाइन के तौर पर हमारा ध्यान फिलहाल हैदराबाद पर है। जहां पर हमने मुहिम चलाकर लोगों को जागरूक करने की कोशिश की है और लोगों को इस तरह के विकल्प दिये है जहां से वो इन मास्क को खरीद सकें। इसी तर्ज पर हम अब दूसरे शहरों में भी इसे ले जाएंगे। मास्क को बेचने के दौरान हम इस बात को भी देखते हैं कि कितने लोग हमारे इस प्रोडक्ट के बारे में जानते हैं, कितने लोग इसको खरीदने की इच्छा रखते हैं और हकीकत में कितने लोग इसे खरीदते हैं।”

“ओन मास्क” का ध्यान फिलहाल उन बड़े शहरों में है जहां पर वायु प्रदूषण काफी ज्यादा है। इसके बाद उनकी कोशिश टीयर 2 शहरों में अपना मास्क ले जाने की है। इतना ही नहीं भविष्य की योजना के बारे में शेफाली का कहना है कि “ हमारी योजना कई तरह के उत्पाद लाने की है ताकि लोग अच्छी गुणवत्ता वाली हवा ग्रहण करें। इसके अलावा ऐसी औद्योगिक इकाइयां जहां पर मजदूर प्रदूषित हवा ग्रहण करने को मजबूर हैं उनके लिए खास तरह के उत्पाद बनाने की कोशिश है। ताकि उनको होने वाली खतरनाक बीमारियों से बचाया जा सके।“

कंपनी के तौर पर “ओन मास्क’’ लोगों को साफ हवा मुहैया करा रही है। बावजूद इसके इन लोगों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। शेफाली का कहना है कि “उपभोक्ताओं में इस उत्पाद को लेकर एक तरह का मेंटल ब्लॉक है क्योंकि लोग इस संबंध में ज्यादा जागरूक नहीं हैं। वो सिर्फ देखने भर के लिए चिंतित हैं। उदाहरण के लिए लोग धूल से बचने के लिए रूमाल का इस्तेमाल करते हैं और प्रदूषण से बचने के लिए हेलमेट का इस्तेमाल कर अपने को सुरक्षित महसूस करते हैं।”

इसी बात को ध्यान में रखते हुए ओन मास्क ने 8 और 9 जून, 2014 को हैदराबाद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें दूर दराज के कई इलाकों से लोग आए और उन्होने अपनी समस्याओं का जिक्र किया। यहां पर उन्होने बताया कि कैसे धूल और धुएं के कारण उनको कई बीमारियां हो गई है खास तौर से अस्थमा ने उनके शरीर में अपना घर कर लिया है। इस दौरान ओन मास्क ने इन लोगों को कई मास्क बेचे जिसके बाद इस बात की उम्मीद जगी है कि इससे इन लोगों को फायदा मिलेगा और दूसरे लोग भी जागरूक होंगे। आने वाले महीनों के बारे में शेफाली का कहना है कि “हम आने वाले वक्त में दो और उत्पाद बाजार में ला रहे हैं इसके अलावा हमारी कोशिश अपने काम को विस्तार देने की है इसके लिए हम ऑफलाइन गुंजाइश को और बढ़ाना चाहते हैं और हैदराबाद के बाद बेंगलौर हमारा अगला शहर होगा।”