'रीलोकेट एक्सपी' बस एक क्लिक और सामान शिफ्ट

- RelocateXP वेबसाइट के माध्यम से सामान शिफ्ट करना हुआ आसान। - संदीप और सौरभ ने की पैकर्स एण्ड मूवर्स इंडस्ट्री को व्यवस्थित करने की पहल। - पूरे भारत में नेटवर्क फैलाना चाहते हैं संदीप और सौरभ।

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एक स्थान से दूसरे स्थान पर शिफ्ट होना बहुत ही थकान और परेशानियों भरा अनुभव है। इस काम के दौरान बहुत सारी छोटी बड़ी ऐसी चीज़ें होती हैं जो आपको ध्यान में रखनी होती हैं। जैसे सबसे पहले तो एक सही पैकर्स एण्ड मूवर्स को चुनना। जब आप पैकर्स एण्ड मूवर्स चुनते हैं तो दिक्कत यह आती है कि हमारे देश में यह इंडस्ट्री बहुत ही अव्यवस्थित तरीके से चल रही है। जिससे एक आम ग्राहक को सही पैकर्स एण्ड मूवर्स को चुनने में बहुत दिक्कतें आती है। इसी दिक्कत को और इस इंडस्ट्री में फैली अव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए संदीप प्रकाश और उनके भाई सौरभ आनंद ने इस क्षेत्र में काम करने का मन बनाया।

कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद दोनों भाई एमएनसी में काम करने लगे। लेकिन दोनों का मन काम में रम नहीं पा रहा था। दोनों ही कुछ ऐसा काम करना चाहते थे जो नया हो और उन्हें उस काम को करने में मज़ा आए। फिर दोनों ने इस दिशा में सोचना शुरु किया कि आखिर ऐसी कौन सी इंडस्ट्री है जिसमें काम करने के लिए काफी स्कोप भी हो और वह इंडस्ट्री अभी पूरी तरह से आकार भी न ले पाई हो। सन 2011 में दोनों ने अपनी नौकरी छोड़ी और पैकर्स एण्ड मूवर्स इंडस्ट्री में कुछ अच्छा करने के इरादे से कूद पड़े।

फिर इन्होंने रीलोकेट एक्सपी नाम से एक वेबसाइट खोली। रीलोकेट एक्सपी एक ऑनलाइन पोर्टल है जोकि लोगों को पैकर्स एण्ड मूवर्स का सही चुनाव करने और उन्हें बुक करने में मदद करता है। ग्राहक दो आसान से स्टेप्स में एक अच्छे वेंडर की बुकिंग करा सकते हैं। पहले स्टेप में उन्हें रीलोकेट एक्सपी द्वारा सत्यापित वेंडर्स की कोटेशन लिस्ट में से अपने अनुसार किसी को चुनना होता है। और दूसरे स्टेप में अपने पसंद के वेंडर को बुक करना होता है। इसके बाद रीलोकेट एक्सपी आपके सामान की सही और समय पर डिलीवरी की जिम्मेदारी लेता है। यहां कस्टमर अपने सामान का स्टेटस भी ट्रैक कर सकता है। कॉरपोरेट्स के लिए यहां सिंगल विंडो सिस्टम है। यह लोग अब तक एक हजार से अधिक बुकिंग करा चुके हैं और कस्टमर इनसे काफी संतुष्ट हैं।

रीलोकेट एक्सपी का मकसद लोगों को घर या ऑफिस शिफ्ट करने में आ रही दिक्कतों को समझना व उनकी समस्याओं को दूर करना है। कई बार लोगों को एक स्टेट से दूसरे स्टेट में भी सामान पहुंचाना होता है। संदीप और सौरभ ने तकनीक के माध्यम से इस इंडस्ट्री को एक सुव्यवस्थित रूप देने की कोशिश की है। इससे जहां पैकर्स एण्ड मूवर्स को ज्यादा काम मिल रहा है वहीं लोगों की भी पेरशानी दूर हुई है।

अब तक इस इंडस्ट्री का सिर्फ तीन प्रतिशत हिस्सा ही सुव्यवस्थित नज़र आ रहा था इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि इंडस्ट्री अब तक अपना एक सुव्यवस्थित ढांचा खड़ा नहीं कर पाई थी। ऐसे में रीलोकेट एक्सपी के लिए अपना काम शुरु करना काफी मुश्किल भरा रहा। संदीप और सौरभ को भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा और कई दिक्कतों का यह लोग आज भी सामना कर रहे हैं। इनके आगे सबसे बड़ी और पहली दिक्कत यह थी कि विभिन्न पैकर्स एण्ड मूवर्स की अलग-अलग राज्यों के हिसाब से कोटेशन को अरेंज करना। क्योंकि हर कंपनी रेट को अलग-अलग पैमाने पर तय कर रही थी जैसे कोई सामान के वजन के अनुसार रेट तय कर रही थी तो कोई एक स्थान से दूसरे स्थान की दूरी के आधार पर। कोई इस बात पर कि सामान कौन से फ्लोर पर पहुंचाया जाएगा। इसके अलावा भी कई छोटी-छोटी बातें और भी थीं जिस पर अलग-अलग वेंडर्स के अलग-अलग रेट थे। यह बातें ग्राहकों को बहुत ज्यादा कंफ्यूज़ करने वाली थीं। दूसरी दिक्कत थी अच्छे और भरोसेमंद वेंडर्स का चुनाव कर उन्हें लिस्ट में शामिल करना। इसके लिए संदीप और सौरभ ने 25 ऐसे पैमाने बनाए जिन पर इन वेंडर्स को खरा उतरना था। साथ ही रीलोकेट एक्सपी के लिए यह काम भी बहुत चुनौतीपूर्ण था कि वे अपने ग्राहकों को भी यह भरोसा दिला सकें कि उन्होंने अपनी लिस्ट में जो वेंडर्स चुने हैं वे भरोसमंद और अच्छा काम करके देने वाले हैं। साथ ही मिलकर आमने-सामने बात कर सौदा तय करने की लोगों की मानसिकता को बदलना और उन्हें यह यकीन दिलाना कि यह काम वे ऑनलाइन भी कर सकते हैं। आज भी रीलोकेट एक्सपी डॉट काम को इस समस्या से रोज दो-चार होना पड़ रहा है।

काम का विस्तार -

रीलोकेट एक्सपी का मुख्यालय नोएडा में है। इनके कर्मचारियों की संख्या लगभग 25 है जोकि मुंबई, बैंगलोर, पुणे, हैदराबाद और अहमदाबाद में हैं।

कंपनी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। दोनों भाई इसे पूरे भारत में फैलाना चाहते हैं और चाहते हैं कि भारत में कोई भी अगर एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहा है तो उसके जहन में सबसे पहले रीलोकेट एक्सपी डॉट कॉम का ही नाम आए।

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