चमक-धमक वाली मुंबई में महिला कलाकारों की दर्दनाक आपबीती

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प्रत्यूषा बनर्जी, शिखा जोशी, जिया खान, नफीसा जोसेफ, ऐसे जाने कितने-कितने महिला कलाकारों के नाम, सुनहरे पर्दे के पीछे की बदसूरती का राज खोलते हैं। आइए जानते हैं ऐसे कुछ चित्र-विचित्र, दुखद वाकये।

फोटो साभार: यूट्यूब
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कलाकारों की लाइफ स्टाइल बहुत खराब है। देर रात जगने से स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। घरवालों से दूर रहने से भी जिंदगी अधूरी लगती है। काम का दबाव इतना रहता है कि रातों को नींद भी नहीं आती। 

तनावों से गुजर रहीं अभिनेत्री शिखा जोशी ने 16 मई 2015 को मुंबई के अंधेरी इलाके में ही चाकू से गला काटकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के दिनों में वह बेरोजगारी से जूझते हुए रोजी की तलाश में थीं। 

मुंबई की सिनेमाई दुनिया बाहर से दिखने में खुशनुमा लगती मगर वहां कवि-साहित्यकारों, खासकर कवियत्रियों, महिला कलाकारों के लिए स्थितियां कितनी तकलीफदेह होती हैं, कैसे उनकी योग्यता, उनके स्वाभिमान, उनकी रचना-शक्ति की अनदेखी होती रहती है और यहां तक कि उनमें अपने जीवन के प्रति ही मोहभंग सा होने लगता है। सिल्क स्मिता, परवीन बॉबी, मोना खन्ना, कुलजीत रंधावा, दिशा गांगुली, बिदिशा, प्रत्यूषा बनर्जी, शिखा जोशी, जिया खान, नफीसा जोसेफ, ऐसे जाने कितने-कितने महिला कलाकारों के नाम, सुनहरे पर्दे के पीछे की बदसूरती का राज खोलते हैं। आइए जानते हैं ऐसे कुछ चित्र-विचित्र, दुखद वाकये

कवयित्री एवं फिल्म कलाकार असीमा भट्ट खुद बताती हैं कि 'मुम्बई में हाल के महीनो में दो ऐक्ट्रेस/मॉडल की आत्महत्या की ख़बर आई थी। एक दौर आया था, जब मुझे भी काम नहीं मिल रहा था, जबकि मैं एनएसडी ग्रेजुएट हूँ और एफटीआईआई से फ़िल्म एप्रिसीयेशन कोर्स किया है। कई फिल्मों में कास्टिंग के बाद भी काम नहीं कराया गया। कुछ फ़िल्में चली नहीं। कुछ फ़िल्म बन गईं, रिलीज़ नहीं हुईं, कुछ आधा बन के रुकी पड़ी रहीं। पिता गुज़र गए। बहुत डिप्रेशन में थी।' उन्होंने बताया कि उनके जेहन में बार-बार आत्महत्या का ख्याल आता रहा। जो भी मेरे जानने वाले अच्छे कास्टिंग डायरेक्ट थे, सबसे काम मांगती रही। कहीं कुछ नहीं हुआ। एक दिन मरने से पहले मेरे पिता की कही बात याद आयी कि "लिखना मत छोड़ना" (मैं पहले पत्रकार थी। उसे छोड़कर एनएसडी पहुंच गई थी।) तब मैंने लिखना शुरू किया।

असीमा ने बताया कि अभी वह कई पत्र-पत्रिकाओं में स्थायी स्तम्भ से लेकर लगातार लेखन कर रही हैं और मेडिटेशन भी शुरू किया। इसके अलावा जब अपनी पसंद का एक्टिंग का काम आता है, करती हूँ। वरना थियेटर करती हूँ। एक चमत्कार और बता दू कि मैं आये दिन अपना पर्स, मोबाइल या रोज़मर्रा के काम भूल जाती हूँ लेकिन चार एकल नाटक करती हूँ और उनके संवाद मुझे याद रहते हैं। अभिनेत्री/मॉडल अपने काम को लेकर बहुत क्रेज़ी या डेस्परेट होती हैं। जब काम नहीं मिलता डिप्रेशन में चली जाती हैं और बाद में अंजाम आत्महत्या तक पंहुच जाता है। अगर एक काम नहीं मिल रहा तो कोई बात नहीं। अपने अंदर छिपी किसी दूसरी प्रतिभा को पहचानो। ख़ुद को एक्स्प्लोर करो। डिस्कवर करो। काम करने वालों के लिए दुनिया बहुत छोटी पड़ जाती है। बस चारों तरफ़ एक बार नज़र दौड़ाने की ज़रूरत है।'

सिल्क स्मिता और परवीन बॉबी ने मुंबई की चमकदार दुनिया में रिश्तों के दुखद अनुभव से गुजरते हुए आत्महत्या का रास्ता चुना। शोला और शबनम जैसी हिट फिल्मा देने वाली दिव्या भारती को कौन नहीं जानता होगा। उनकी महज 19 साल की उम्र में ही मृत्‍यु हो गयी थी। इनकी मौत आज भी रहस्य का पर्दा पड़ा हुआ है। वैसे तो बात 1 जनवरी 2016 की है, लेकिन आज भी कुलजीत रंधावा का वह वाकया भूला नहीं होगा। पश्चिम बंगाल के रानीगंज में जन्मी कुलजीत रंधावा टीवी एक्ट्रेस और मॉडल की अचानक मौत हो गई थी। उन्होंने जुहू के एक अपार्टमेंट में आत्महत्या कर ली थी। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा था, 'मैं जिंदगी के दबाव को झेल नहीं पा रही हूं, इसलिए सुसाइड करने जैसा कदम उठा रही हूं।'

इसी तरह दिशा गांगुली ने अप्रैल 2015 में सुसाइड किया। वह दक्षिण कोलकाता स्थित अपने आवास पर मृत पायी गई थीं। उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इससे पहले जिया खान ने 3 जून 2013 को खुदकुशी कर ली थी। पहली बार अभिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'नि:शब्द' से अपने करियर की शुरुआत करने वाली जिया का असली नाम नसीफा खान था। वैसे जिया की पहली फिल्म 'दिल से' थी। इसमें उन्होंने एक बाल कलाकार का किरदार निभाया था। 29 जुलाई 2004 को नफीसा जोसेफ ने मुंबई में स्वयं अपनी जान दे दी। वह मॉडल और एमटीवी जॉकी थी। 1997 में उन्होंने मिस इंडिया यूनिवर्स का खिताब भी जीता था।

इसी साल 17 जुलाई 2017 को अभिनेत्री बिदिशा ने सुशांत लोक, गुड़गांव (हरियाणा) में अपने फ्लैट पर आत्महत्या कर ली। वह मूल रूप से असम की रहने वाली थीं। इसी क्रम में एक और नाम आता है, मूलतः इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) की रहने वाली अंजली श्रीवास्तव का। वह भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री थीं। कोस्टा कैफ़े के पास परिमल सोसायटी, अंधेरी (मुंबई) में उन्होंने खुदकुशी कर ली। इसी तरह निजी जीवन में तरह-तरह के तनावों से गुजर रहीं अभिनेत्री शिखा जोशी ने 16 मई 2015 को मुंबई के अंधेरी इलाके में ही चाकू से गला काटकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के दिनों में वह बेरोजगारी से जूझते हुए रोजी की तलाश में थीं। उन्होंने मरने से पहले पुलिस को भी अपना ऐसा ही बयान दर्ज कराया था। इसी क्रम में अभिनेत्री मोना खन्ना का नाम आता है। उन्होंने वर्ष 2014 में मुंबई के वर्सोवा स्थित अपने फ्लैट में फांसी लगा कर आत्महत्या की थी। सुसाइड नोट में उन्होंने लिखा था कि वह फिल्मों में काम न मिलने से काफी चिंतित हैं।

जमशेदपुर की टीवी कलाकार प्रत्युषा बनर्जी ने 1 अप्रैल 2016 को फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली। उन्हें अत्यंत गंभीर अवस्था में कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्रत्युषा की मौत ने मायानगरी मुंबई की चकाचौंध के पीछे छिपे दर्द को जगजाहिर कर दिया था। कई फिल्मों में काम कर चुकी लबोनी चटर्जी कहती हैं कि कलाकारों की लाइफ स्टाइल बहुत खराब है। देर रात जगने से स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। घरवालों से दूर रहने से भी जिंदगी अधूरी लगती है। काम का दबाव इतना रहता है कि रातों को नींद भी नहीं आती। इतना ही नहीं, शूटिंग के दौरान महिला कलाकारों को और भी तरह की परेशानियों से जूझना पड़ता है।

हाथ से रोजी न निकल जाए, इसलिए वे खामोशी साधे रहती हैं। एक अभिनेत्री ने जब प्रोड्यूसर से शिकायत की कि 12 घंटे की शिफ्ट में उन्हें कई अन्य महिलाओं के साथ वॉशरूम शेयर करना पडता है। प्रोड्यूसर का ईगो हर्ट हो गया। उसने कहा, कहीं और काम देख लो। अभिनेत्री वाहबिज़ दोराबजी कहती हैं, प्रोड्यूर्स महिला कलाकारों के हाईजीन का ख्याल नहीं रखते हैं। टीवी सीरियल में हैवी कॉस्टयूम के साथ ब्रेक में अगर शौच जाना हो तो उनकी हालत ख़राब हो जाती है। यहां तक संजय लीला भंसाली जैसे निर्देशकों की निगरानी वाले परिसरों में टॉयलेट की हालत असहनीय होती है। जबकि सेफ वॉशरूम ह्यूमन राइट है, फिर भी ध्यान नहीं दिया जाता है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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