लौह अयस्क के बाद एनएमडीसी की नज़र और सोने रेत पर, दुर्लभ खनिज उत्खनन के क्षेत्र में दस्तक का इरादा

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सार्वजनिक क्षेत्र की खनन कंपनी एनएमडीसी दुलर्भ खनिज, तटवर्ती रेत खनन समेत अन्य क्षेत्र में दस्तक दे सकती है। खनन कंपनी जरूरी मंजूरी के लिये परमाणु खनिज निदेशालय (एएमडी) से संपर्क पर विचार कर रही है क्योंकि कुछ खनिज वो खनन करना चाहती है, वह रेडियो धर्मी खनिजों के परिवार के अंतर्गत आते हैं।

सूत्रों ने कहा, ‘‘अब तक हमारा जोर केवल लौह अयस्क तथा कुछ हीरा खनन पर था। अब हमारा जोर दुर्लभ खनिज, सोना तथा तटवर्ती रेत खनन पर है। तटवर्ती रेत खनन में सात ऐसे खनिज हैं जिसे भारी खनिज कहा जाता है।’’ उसने कहा, ‘‘भारी खनिज में मोनाजाइट एक हिस्सा है, जिसमें यूरेनियम तथा थोरियम जैसे रेडियो सक्रिय तत्व हैं। अगर भारी खनिजों में मोनाजाइट 0.75 प्रतिशत से अधिक है तो इसको एएमडी देखता है।

 एएमडी को विशेष मंजूरी देने का अधिकार मिला हुआ है। हम एएमडी से संपर्क करेंगे। हमारा मानना है कि भविष्य इस क्षेत्र में है।’’ सूत्रों ने यह भी कहा कि एनएमडीसी ने तंजानिया में पायलट स्वर्ण रिफाइनरी लगाने पर विचार कर रही है। कंपनी ने तंजानिया में स्वर्ण खदान का अधिग्रहण किया है।

सार्वजनिक क्षेत्र की यह कंपनी अब तक  कंपनी भारत में स्वर्ण खनन नहीं करती। उल्लेखनीय है कि  भारत सरकार के पूर्ण स्वामित्व वाले सरकारी उद्यम के रूप में वर्ष, 1958 में स्थापित एनएमडीसी इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन है । एनएमडीसी प्रारंभ से ही खनिजों की विस्तृत श्रृंखला का गवेषण करता है, जिसमें लौह अयस्क, कॉपर, रॉक, फास्फेट, चूना-पत्थर, डोलोमाइट, डिप्सम, बेंटोनाइट, मेगनेसाइट, हीरा, टिन, टंगस्टन, ग्रेनफाईट, बीच सैंड आदि शामिल हैं। (पीटीआई के सहयोग के साथ)