बैंको को ग्राहकों के पैसों और लेन-देन की जानकारी देता, “ClinkNow”

“ClinkNow” और “Ezetap” में गठजोड़“ClinkNow” की शुरूआत जुलाई, 2013 में हुई“ClinkNow” की टीम में 11 लोग

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सफलता भी उन्ही लोगों के कदम चूमती है जो तमाम मुश्किलों का सामना कर आगे बढ़ना जानते हैं। ऐसे ही कुछ चुनिंदा लोगों में से एक हैं अभिषेक नायक। जिन्होने पहले Gharpay जैसे उद्यम को खड़ा किया और उसे उस बुलंदी तक ले गए जहां पर Delhivery कंपनी ने उसका अधिग्रहण कर लिया। इसके बाद जुलाई, 2013 में उन्होने कुछ नया करने का सोचा और इसके लिए उन्होने ClinkNow की स्थापना की। ये एक विश्लेषणात्मक उपकरण है जो बैंको को उपलब्ध ऑनलाइन आंकडों के माध्यम से ग्राहकों के आचरण की जानकारी देता है।

अभिषेक नायक, सह-संस्थापक, ClinkNow
अभिषेक नायक, सह-संस्थापक, ClinkNow

बेंगलूर स्थित फर्म Ezetap ने ClinkNow के साथ गठजोड़ कर दुकानदारों को बिना इंटरनेट के भुगतान की सुविधा मुहैया कराई है। बस इसके लिए मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना होता है। इन दोनों कंपनियों के मिलने से जहां Ezetap ने भुगतान की सुविधा को आसान बनाया वहीं ClinkNow से लेन-देन की क्षमता का विश्लेषण करने में आसानी होती है। इससे इनके ग्राहक को कोई भी फैसला लेने में मदद मिलती है। इन्ही खूबियों की वजह से जब ClinkNow का Ezetap के साथ गठजोड़ हुआ तो उस वक्त ClinkNow के पास रत्नाकर बैंक लिमिटेड एक ग्राहक था जो अपने डेढ़ लाख डेबिट और क्रेडिट कार्ड धारकों के इनकी सेवाएं ले रहा था। ClinkNow के संस्थापक अभिषेक के मुताबिक “ हमने अपना पॉयलट एचडीएफसी बैंक के साथ पिछले छह महीनों से कर रहे हैं, जबकि कई दूसरे बैंको के साथ भी हमारी बातचीत जारी है। हम ऐसे मुश्किल बाजार में हैं जहां पर अपना उत्पाद हमें बैंको के बेचना पड़ता है।वहीं दूसरी ओर लेन देन के बाजार में ज्यादा पैसा नहीं है। जहां पर वीएएस और दूसरी सेवाएं इस मामले में काफी आगे हैं।” ClinkNow वीएएस सेक्टर में Ezetap के साथ मिलकर काम कर रहा है। जिसका बैसिक वर्जन अगले कुछ ही महीनों में लांच कर दिया जाएगा।

ClinkNow की शुरूआत जुलाई, 2013 में उस वक्त हुई जब Gharpay को Delhivery ने अधिग्रहण कर लिया था। ये अभिषेक के लिये किसी बड़ी चुनौती से कम नही था क्योंकि Gharpay अलग तरह का कारोबार था तो ClinkNow अलग तरह का। इतना ही नहीं Gharpay की टीम को इस क्षेत्र (डिलवरी पर नकदी) का कोई अऩुभव भी नहीं था। ClinkNow का डिजाइन पूरी तरह से ऑनलाइन लेनदेन पर आधारित था। ClinkNow की शुरूआत तब हुई जब देश में कोई भी लेनदेन के डाटा को ग्राहकों के आचरण से देखने में इस्तेमाल नहीं करता था। अभिषेक के मुताबिक इन लोगों ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस दिशा में काम करना शुरू कर दिया था। जिस तरीके से इन लोगों की टीम ने भुगतान की प्रक्रिया को आसान बना दिया वो काफी प्रभावशाली है।

पिछले 10 महीनों के दौरान अभिषेक और उनकी टीम को काफी कुछ सीखने का मौका मिला। इस दौरान अभिषेक को कई ऑस्ट्रेलियन बैंक और विश्व के दूसरे बैंको से मिलने का मौका मिला। टीम को उम्मीद है कि आगे भी उनको ऐसे ही सीखने का मौका मिलेगा। इन लोगों का मानना है कि अपना ये उत्पाद बैंकों को बेचना भले ही मुश्किल हो लेकिन धैर्य और मजबूती से राह आसान हो जाती है। बैंकों के साथ काम करने पर काफी पैसा बनाया तो जा सकता है लेकिन इसमें काफी वक्त लगता है। इसके अलावा बैंकों के लिए ग्राहकों से जुड़ा उत्पाद बनाना मुश्किल था और टीम पहली बार इस काम को कर रही थी। लेकिन इस टीम ने अपनी मेहनत से अपने काम को अंजाम तक पहुंचाया।

संजय स्वामी
संजय स्वामी

ClinkNow और Ezetap का एक स्वभाविक गठजोड़ है। इसकी कई वजह हैं। Ezetap ने भविष्य के लिए खाका तैयार कर लिया है। इतना ही नहीं उसके पास एक अनुभवी टीम है जो शानदार उत्पाद बनाती है। संजय और अभिजीत ने ClinkNow की टीम को बहुत जल्दी समझ कर तय कर लिया कि ये उनके लिए बेहतर विकल्प है। इसके अलावा इनकी सोच दूरदर्शी है जिसमें भुगतान कोई बाधा नहीं है। वहीं दूसरी ओर ClinkNow को अपने साथ जोड़ने के बाद Ezetap के सह-संस्थापक संजय स्वामी का कहना है कि “ClinkNow परेशानियों को अच्छी तरह समझता है और आज के बाजार के लिए इनका बनाया उत्पाद बेहद जरूरी भी है। हम एक दूसरे को काफी समय से जानते थे और शुरूआत में एक साथ काम भी करना चाहते थे लेकिन इस तरह का गठजोड़ ज्यादा बेहतर है।“ वहीं अभिषेक का कहना है कि Ezetap का Clinknow से गठजोड़ बेहतर टीम के कारण हुआ है। वो कहते हैं कि” हमारे पुराने इंजीनियर Ezetap में नौजवान इंजीनियर हैं बावजूद इसके हर किसी को उचित जिम्मेदारी और काम दिया गया है।” अभिषेक के मुताबिक Clinknow की 11 सदस्यों की टीम है जिनको Ezetap में अच्छी जगहों पर काम करने का मौका है। अभिषेख खुद Ezetap में डॉयरेक्टर के पद पर गए हैं जबकि उनकी ही टीम के एक अन्य सदस्य रोशन सेल्स का काम देखेंगे। जबकि अर्पित वरिष्ठ इंजीनियर को तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे। जिस तरीके से दोनों कंपनियों में चीजें आगे की ओर बढ़ रही हैं उसको लेकर अभिषेक संतुष्ट हैं। अभिषेक के मुताबिक इस गठजोड़ की सबसे बढ़िया बात ये है कि उनको पैसा जुटाने या अच्छे लोगों को जुटाने का काम नहीं करना पड़ेगा वहीं वो Clinknow के लिए इंजीनियरिंग और उत्पाद का काम पहले की ही तरह जारी रख सकेंगे।.