खुशियों की तलाश में हैं? श्रेया शरण से मिलिए

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प्राकृतिक, वीगन (शाक/शाकाहारी) और हाथ से बना हुआ। ये तीन शब्द ही श्रेया शरण के ‘ब्रस्ट ऑफ हैप्पीनेस’ को परिभाषित करते हैं।

27 साल की श्रेया एलर्जी और स्किन से जुड़ी समस्याओं से जूझ चुकी थीं। समस्याओं को दूर करने के लिए उन्होंने खुद ही बाथ और बॉडी प्रोडक्ट्स पर एक्सपेरिमेंट्स के साथ-साथ हेल्दी लाइफस्टाइल और ईटिंग हैबिट्स पर प्रयोग करना शुरू कर दिया। वह अपने प्रोडक्ट्स को सोशल मीडिया पर शेयर करने लगीं जिसके बाद उनके पास वैसे प्रोडक्ट्स के बारे में और जानकारी के लिए ढेरों सवाल आने लगे। इस हैरान कर देने वाले रिस्पॉन्स के बाद उन्हें नेचुरल स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के मार्केट की जरुरतों का अंदाजा हो गया।

श्रेया कहती हैं- “उसके बाद मैंने अपनी जॉब को छोड़ दिया और साबुन बनाने, स्किनकेयर फॉर्मुलेशन और भारत में कॉस्मेटिक इंडस्ट्री के बारे में सब कुछ सीखा।” 2010 में गहरे और श्रमसाध्य रिसर्च एवं प्रयोगों के बाद वह स्किन केयर प्रोडक्ट्स के बारे में सब कुछ सीखने में जुट गई। घर पर जो कुछ भी उन्होंने सीखा और एक्सपेरिमेंट किया उसी ने 2012 में Burst Of Happyness के रूप में आकार लिया।

इसका प्रोडक्शन यूनिट भिवाड़ी में है और सारे प्रोडक्ट्स वीगन (शाक के) हैं और प्रिजर्वेटिव मुक्त हैं जिन्हें कस्टमाइज किया जा सकता है। अपने प्रोडक्ट्स के बारे में वह बताती हैं- “ये कस्टमर्स की मांग पर निर्भर करता है। मैं हर 15 दिन पर एक पोल करती हूं ताकि ये पता चल सके कि कस्टमर्स किस तरह के प्रोडक्ट्स के बारे में रुचि रखते हैं। फिर वैसे प्रोडक्ट्स को तैयार करने पर काम किया जाता है।”

किसी नए प्रोडक्ट को इंट्रोड्यूस करने में महीनों तक तो सिर्फ इस पर काम होता है कि कस्टमर्स की जरुरतें क्या हैं? फिर इसके बाद हम कई तरह के प्रोडक्ट का ऑप्शन तैयार करते हैं। इसके बाद शुरू होता है इनग्रेडिएंट्स (घटकों) पर गहन रिसर्च। प्रोडक्ट के उद्देश्य के लिए कौन सा इनग्रेडिएंट्स सुटेबल होगा इस पर गहन शोध होता है। श्रेया कहती हैं- “इसमें ऑयल्स चाहे बोटेनिकल्स हों या इसेंशियल, उनके गुण-धर्म और फायदों का अध्ययन होता है। काफी रिसर्च के बाद सभी इनग्रेडिएंट्स का चुनाव होता है ताकि वह सभी एक साथ मिलकर प्रोडक्ट की गुणवत्ता और प्रभाव को बढ़ा सकें। हम सभी प्रोडक्ट्स के लिए कई फॉर्मुलेशन तैयार करते हैं जिनको अलग-अलग सीज़न के दौरान टेस्ट किया जाता है। चूंकि, हम अपने प्रोडक्ट्स में किसी भी तरह के केमिकल इमल्सिफायर्स का इस्तेमाल नहीं करते हैं इसलिए हमारे प्रोडक्ट्स अलग-अलग सीजन के दौरान अलग-अलग बिहैव करते हैं। इन फॉर्मुलेशंस को इच्छुक वॉलंटियर्स, फैमिली और फ्रेंड्स के पास उनके फीडबैक के लिए भेजते हैं। फिर हम उन फीडबैक्स के आधार पर अपने प्रोडक्ट को और बेहतर बनाते हैं।”

वह पुराने ‘दादी-नानी के नुस्खे’ और आयुर्वेदिक औषधियों से भी प्रेरणा लेती हैं। उनका फेवरिट नेचुरल इनग्रेडिएंट क्या है, ये पूछने पर श्रेया कहती हैं- “इसेंसियल ऑयल्स मेरे फेवरिट नेचुरल इनग्रेडिएंट्स हैं- मुझे नए सेंट्स बनाने के लिए उनका मिश्रण तैयार करना काफी पसंद है। मगर जब इनका किसी स्किन केयर प्रोडक्ट में इस्तेमाल करना होता है तो इसके लिए काफी विस्तृत अध्य्यन की जरुरत पड़ती है ताकि ये सुनिश्चित हो सके कि ये प्रोडक्ट के उद्देश्यों की पूर्ति में सहायक है। मुझे रूम फ्रेशनर्स, परफ्यूम्स, डिओ जैसे आर्टिफिशियल फ्रेग्रेंस से हमेशा से एलर्जी रही हैं। इसलिए मैं हर प्रोडक्ट में इसेंसियल ऑयल्स का इस्तेमाल करती हूं।” उनकी कोर टीम में उनको लेकर 3 सदस्य हैं। “फ्रेंड्स और फैमिली ने विभिन्न स्तरों पर हमेशा सहायता की है। जब वर्क लोड काफी बढ़ जाता है तो वे साबुन काटने, पैकेजिंग, लेबलिंग और ऑर्डर्स को पूरा करने में मदद करते हैं।” शुरुआत में वह सिर्फ तकनीकी पहलूओं को देखा करती थीं मगर अब ऐसा नहीं है। वह कहती हैं- “मुझे अपने वेबसाइट प्रोवाइडर से शानदार सपोर्ट सिस्टम मिला है और कुछ टेकी फ्रेंड्स हमेशा मदद को तैयार रहते हैं।” ऐसा नहीं था कि उनकी एंटरप्रेन्योरियल जर्नी के दौरान चुनौतियां नहीं थी। श्रेया का वेंचर बूटस्ट्रैप्ड रहा है और वह खुद की सब कुछ कर रही थी। मगर समय बीतने के साथ उन्हें अहसास हुआ-“काम को आउटसोर्स करने के लिए लोगों को ढूढ़ना अनिवार्य है। आप सब कुछ खुद ही नहीं कर सकते।”

इसके अलावा उन्हें जरुरी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए सही और उचित सूचना पाने में भी बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। श्रेया कहती हैं- “सही रास्ता पाने के लिए बहुत सारे रिसर्च करने पड़े, अनुभव लोगों और अधिकारियों से बात करनी पड़ी।”

आर्मी वाले की बेटी होने की वजह से श्रेया हमेशा आगे बढ़कर चुनौतियों से निपटती रही हैं। वह देश भर में छोटे शहरों और कैंट्स में रही हैं मगर पुणे को वह अपना घर मानती हैं। उन्होंने पुणे के फर्गुसन कॉलेज से इकोनॉमिक्स में बीए किया और जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ कम्यूनिकेशन, मुंबई से एडवर्टाइजिंग एंड मार्केटिंग में पीजीडीएम किया। इसके बाद उन्होंने पुणे के सिम्बियोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से मार्केटिंग में एमबीए करती है। बीच-बीच में वह एडवर्टाइजिंग सेक्टर में काम भी करती रहीं और कुछ मैनेजमेंट इवेंट्स को भी आयोजित किया। जब वह एमबीए कर रहीं थी तभी उनकी अपने स्वीटहॉर्ट से शादी भी हो गई। उन्होंने कई शानदार कॉरपोरेट जॉब ऑफर को ठुकराया क्योंकि वह अपने पति के साथ रहना चाहती थीं। वह अपने पति के साथ पंजाब के एक छोटे शहर चली गई। वह कहती हैं- “दिल से मैं एक जिप्सी हूं और मैं नियमित तौर पर कुछ महीनों में नई जगहों पर जाती हूं। यात्रा करना मुझे आनंदित करता है और मुझे अपने पति के साथ नई जगहों को खोजना बहुत पसंद है।”

अभी वो चेरी ब्लेयर वुमन मेंटरिंग प्रोग्राम (छोटे बिजनेस वाली महिलाओं के लिए एक इंटरनेशनल प्रोग्राम) में एक मेंटी हैं। बतौर मेंटी वह अपने कामों के सोशल इंपैक्ट को बढ़ाने के लिए प्रयास करती हैं। वह इसमें लोवर इन्कम ग्रुप वाली अनपढ़ महिलाओं की सेवा लेती हैं।

श्राय कहती हैं- “हालांकि वह बहुत तेजी से तकनीकों को सीख लेती हैं मगर वह प्रोडक्शन के लिए हमारे SOPs को फॉलो नहीं कर पाती, प्रोडक्ट लेबल्य या रिकॉर्ड्स को मैंटेन नहीं कर पाती क्योंकि ये सभी इंग्लिश में होते हैं। इसलिए हमने उनकी सहूलियत के लिए सभी इंटरनल पेपरवर्क को हिंदी में कर दिया है और सभी रॉ मैटेरियल की लेबलिंग भी हिंदी में है। इसके अलावा मैं उन्हें बेसिक कंप्यूटर स्किल्स भी सिखा रही हूं। मैंने महसूस किया है कि लोगों को अगर सोचने की आजादी दी जाए तो वह बेहद क्रिएटिव और प्रॉब्लम सॉल्विंग आइडिया लेकर आते हैं। ”

उनकी कस्टमर्स ज्यादातर 25-35 एज ग्रुप की कामकाजी महिलाएं हैं। इनमें से कुछ सिंगल हैं तो कुछ अगले कुछ महीनों में शादी करने वाली हैं तो कुछ नव विवाहिता हैं या कुछ न्यू मदर्स हैं। मगर श्रेया के लिए ये सिर्फ कस्टमर्स ही नहीं हैं बल्कि बेहद खास हैं। श्रेया का मोट्टो है- बी सिंपल एंड ट्रू। इसलिए जब कस्टमर्स उन्हें लिखकर बताते हैं कि कैसे उनके प्रोडक्ट्स ने उन्हें या उनके परिवार वालों को फायदा पहुंचाया है तो ये श्रेया को खुश करता है। और श्रेया के लिए यही सबसे बड़ी प्रेरणा है आगे बढ़ने का।

वह बहुत जल्द ही बेबी प्रोडक्ट्स को लॉन्च करेंगी। अपने प्रोडक्शन को विस्तार देने के उद्देश्य से उन्होंने पुणे में एक वर्कशॉप आयोजित करने की योजना बनाई है। श्रेया आत्मविश्वास भरे मुस्कान के साथ कहती हैं- “हम कुछ ईको-रिसॉर्ट्स के साथ बातचीत भी कर रहे हैं ताकि वो अपने गेस्ट्स को हमारे प्रोडक्ट्स उपलब्ध कराएं। वी आर ऑन ए रोल!”

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