रेडबस को हमेशा मिली है बस हरी झंडी

आॅनलाइन बस टिकट बुकिंग में अग्रणी है रेडबस80 हजार मार्गों पर उपलब्ध है सुविधा2 इंजीनियर दोस्तों ने 2006 में शुरू की कंपनीबीते वर्ष 800 करोड़ में बिकी कंपनी

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पिछली बार जब मैंने देश के पहले आॅनलाइन बस के टिकट बुक करने वाले पोर्टल ‘‘रेडबस’’ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) प्रकाश संगम से बात की थी तब उन्हें दफ्तर संभाले हुए 24 घंटे का समय भी नहीं हुआ था। अब से करीब नौ महीने पहले उन्होंने कंपनी के संस्थापक और सीईओ फणीन्द्र रेड्डी समा का स्थान लिया था। इतने दिनों वे जान गए हैं कि क्यों यह कंपनी औरों से आगे है और कैसे आगामी समय में इसे औरों से आगे रखना है।

रेडबस देशभर के करीब 80 हजार मार्गों पर 15 हजार बस संचालकों के सहयोग से 3 करोड़ से अधिक टिकट इंटरनेट, मोबाइल और काॅल सोंटर के द्वारा बेच चुकी है। इस तरह से यह कंपनी इस वर्ग में सबसे आगे खड़ी है और आॅनलाइन टिकटिंग के करीब 70 प्रतिशत बाजार पर इस कंपनी का कब्जा है।

रेडबस का गठन बिट्स पिलानी के दो इंजीनियरों फणीन्द्र रेड्डी समा और चरण पद्मराजू की दूरदृष्टि के परिणामस्वरूप अगस्त 2006 में हुई। बीते वर्ष इस कंपनी में कई बड़े फेरबदल हुए और इस कंपनी को दक्षिण अफ्रीका की कंपनी आईबीबो ने करीब 800 करोड़ रुपयों में इस कंपनी को अपने अधिकार में ले लिया।

हालांकि वर्तमान में भारत में आॅनलाइन टिकटिंग की दुनिया में बहुत कुछ नया हो रहा है और कई नए खिलाड़ी इस क्षेत्र में पैर पसार रहे हैं, लेकिन रेडबस अपाने काम में लगी हुई है और रोजाना तरक्की के नए मुकाम छू रही है।

प्रकाश संगम हमसे बात करते हुए भविष्य की अपनी योजनाओं के बारे में बताते हैं। प्रकाश कहते हैं कि, ‘‘हम अपने स्तर पर काफी कुछ करने में लगे हुए हैं, विशेषकर तकनीक के क्षेत्र में। आने वाले समय में हम बाजार अैर अपने ग्राहकों को काफी कुछ नया परोसने की तैयारी में हैं।’’ पिछले वर्ष ही हमने बसों की स्थिति की जानकारी रखने वाली कंपनी याॅरबस को भी अधिगृहित किया था और हमें इसका भी काफी फायदा मिला है।

रेडबस का संचालन करने वाले मानते हैं कि उनका काम सिर्फ उपभोक्ताओं को टिकट उपलब्ध करवाना ही नहीं हैं बल्कि उन्हें एक सुखद अनुभव देना उनका लक्ष्य है। इस दिशा में कंपनी ने अपने उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिये गूगल मैप की भी सहायता लेनी शुरू की हे जिससे उपभोक्ता अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकें।

इसके अलावा कंपनी यात्रा से दिन पहले अपने ग्राहकों को यात्रा संबंधी सुझाव के मोबाइल संदेश भी भेजती है। इस बारे में जानकारी देते हुए प्रकाश बातो हैं कि ‘‘जैसे, अगर आपको पुणे से मुंबई तक की यात्रा करनी है, और वहां जोरदार बारिश हो रही है तो आपके मोबाइल पर कंपनी की ओर से ‘कृपया अपने साथ छाता लेकर यात्रा करें, क्योंकि मुंबई में बारिश हो रही है’ का मैसेज आएगा।’’

इसके अलावा कंपनी ने किसी भी शहर में पहली बार जाने वाले अपने ग्राहकों के लिये भी एक एप की सेवा शुरू की है। गूगल मैप्स आधारित इस एप का उपयोग करके आप अपने गंतव्य के नजदीकी स्थान का पता लगा सकते हैं। साथ ही हमारी करीब 1500 बसें जीपीएस से लैस हैं। कंपनी को उम्मीद हे कि इस वर्ष के अंत तक उनके मार्ग में चलने वाली करीब 80 प्रतिशत बसों में जीपीएस ट्रैकिंग की सुविधा होगी।

एक बार बस में जीपीएस लगने के बाद उसके संचालक भी अपने वाहन पर नजर रखने में सफल रहेंगे और बस की लोकेशन, स्पीड इत्यादि के बारे में उन्हें जानकारी रहेगी।

फिलहाल कंपनी नए ग्राहकों को लुभाने के लिये गुजरात में उन्हें सिर्फ 99 रुपये में सस्ते टिकट भी दे रही है। अभी कंपनी की यह योजना 12 मार्गोंं पर उपलब्ध है। इस योजना के लाभ पाने के लिये उपभोक्ता को एक सप्ताह पूर्व में ही अपना टिकट बुक करवाना होगा। यानि उसे सफर करने से 7 दिन पहले ही अपना टिकट बुक करवाना होगा।

उपरोक्त सब बातों के अलावा प्रकाश संगम बताते हैं कि रेडबस के द्वारा वे यात्रियों और अपने उपभोक्ताओं क सफर के दौरान आने वाली दिक्कतों का तकनीक की सहायता से समाधान करना चाहते हैं। साथ ही कंपनी का उद्देश्य बस के सफर को दोबारा विश्वसनीय सफर बनाने का है।

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