ऑटो ड्राइवर की बेटी ने दसवीं में हासिल किए 98 प्रतिशत, डॉक्टर बनने का सपना

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हमेशा की तरह इस बार भी कई ऐसे स्टूडेंट्स ने टॉपर्स की लिस्ट में अपनी जगह बनाई है जिनके पास पढ़ने के पर्याप्त संसाधन भी नहीं थे। गुजरात स्टेट बोर्ड में दसवीं के एग्जाम में 98.31 प्रतिशत नंबर हासिल करने वाली 16 साल की आफरीन शेख उन स्टूडेंट्स में एक हैं।

अपने माता-पिता के साथ आफरीन शेख (फोटो- ANI, TOI)
अपने माता-पिता के साथ आफरीन शेख (फोटो- ANI, TOI)
पिता हमजा ने कहा कि उन्होंने कभी बेटे और बेटी में फर्क नहीं किया। उन्हें गर्व है कि उनकी बेटी ने दसवीं में इतने अच्छे नंबर हासिल किए हैं। वे कहते हैं कि उन्हें बेहद खुशी होगी अगर उनकी बेटी डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करेगी और आत्मनिर्भर बनेगी।

गर्मी की ये छुट्टियां उन बच्चों के लिए बेचैनी का सबब थीं जिन्होंने इस बार 10वीं और 12वीं के एग्जाम दिए थे। सीबीएससी सहित लगभग सभी स्टेट बोर्ड्स के नतीजे भी घोषित हो गए हैं। हमेशा की तरह इस बार भी कई ऐसे स्टूडेंट्स ने टॉपर्स की लिस्ट में अपनी जगह बनाई है जिनके पास पढ़ने के पर्याप्त संसाधन भी नहीं थे। गुजरात स्टेट बोर्ड में दसवीं के एग्जाम में 98.31 प्रतिशत नंबर हासिल करने वाली 16 साल की आफरीन शेख उन स्टूडेंट्स में एक हैं। आफरीन एक अत्यंत साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उनके पिता शेख मोहम्मद हमजा ऑटो ड्राइवर हैं।

एफडी हाई स्कूल में पढ़ने वाली आफरीन आगे चलकर मेडिसिन की पढ़ाई करना चाहती है और डॉक्टर बन समाज सेवा करना चाहती है। टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए आफरीन ने कहा, 'रिजल्ट आने पर मुझे खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मैंने साइंस स्ट्रीम में आगे की पढ़ाई करने का फैसला किया है। मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं क्योंकि मेरे परिवार में कोई भी इस मुकाम पर नहीं पहुंचा है। मुझे डॉक्टरी का पेशा इसलिए भी पसंद है क्योंकि वे दूसरों के दर्द का इलाज कर उनके जीवन में खुशियां लाने का काम करते हैं।' आफरीन अहमदाबाद के जुहापुरा में पढ़ती है।

पिता मोहम्मद हमजा ने कहा कि सीमित आय होने की वजह से बेटी को अच्छे स्कूल में पढ़ाना एक संघर्ष के जैसे था। उन्होंने कहा, 'मेरा चार लोगों का परिवार है। परिवार में कई तरह के खर्चे होते हैं, लेकिन मैं किसी भी तरह अपनी बेटी को अच्छी शिक्षा दिलाऊंगा और उसके डॉक्टर बनने के सपने को जरूर पूरा करूंगा।' हमजा ने कहा कि उन्होंने कभी बेटे और बेटी में फर्क नहीं किया। उन्हें गर्व है कि उनकी बेटी ने दसवीं में इतने अच्छे नंबर हासिल किए हैं। वे कहते हैं कि उन्हें बेहद खुशी होगी अगर उनकी बेटी डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करेगी और आत्मनिर्भर बनेगी।

हमजा ने कहा कि वे अभी से पैसे बचा रहे हैं ताकि आफरीन को डॉक्टर बना सकें। गुजरात बोर्ड ने 12 मार्च से 23 मार्च के बीच 10वीं के लिए सेकंडरी स्कूल सर्टिफिकेट (एसएससी) की परीक्षा का आयोजन कराया था जिसमें साढ़े सात लाख से ज्यादा बच्चों ने हिस्सा लिया था। इस बार कुल 67.5 प्रतिशत बच्चों ने सफलता हासिल की। दिलचस्प बात ये है कि एक तरफ जहां 63 प्रतिशत लड़के पास हुए हैं, वहीं लड़कियों के पास होने का प्रतिशत 72 प्रतिशत रहा। यानी लड़कियां लड़कों से काफी आगे रहीं।

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