अपनी बेबाक राय रखने वाली भारतीय शूटर हिना सिद्धू

मशहूर भारतीय शूटर हिना सिद्धू...

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मशहूर भारतीय शूटर हिना सिद्धू अपनी कामयाब खेल प्रतिस्पर्द्धा के कारण ही नहीं, अपनी बेबाक और दो टूक विचारों के नाते भी प्रायः सुर्खियों में आ जाती हैं। कभी राष्ट्रगान को लेकर तो कभी हिजाब ड्रेस कोड के मुद्दे पर। वह नहीं चाहती हैं खेल भावना के साथ धार्मिक आस्था के प्रश्न को जोड़ा जाए, न ही मनोरंजन के समय देशभक्ति निभाने के लिए बाध्य किया जाए।

हिना सिद्धू
हिना सिद्धू
हिना सिद्धू का कहना था कि वह खिलाड़ी होने पर खुद को खुशकिस्मत मानती हैं, बिना राष्ट्रगान सुने मेडल जीतना आधा भी अच्छा नहीं लगता है लेकिन राष्ट्रगान के दौरान खड़ा नहीं होने और फोन पर जोर-जोर से बात करने के बारे में वह सोच भी नहीं सकती हैं।

देश की नामवर खिलाड़ियों में एक हिना सिद्धू उन हस्तियों में एक हैं, जिन्हें फोर्ब्स इंडिया ने '30 अंडर 30' यानी 31 दिसंबर 2017 तक 30 साल से कम उम्र के कामयाब लोगों में शुमार किया है। हिना वह पहली भारतीय महिला हैं, जो इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन में नंबर वन प्लेयर बनी थीं। तब से लगातार उनकी परफॉर्मेंस शानदार होती जा रही है। सन् 2014 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। हिना देश-दुनिया में अपने खेल-कौशल के अलावा बुद्धि-पटुता के लिए भी सुर्खियों में रहती हैं।

उनसे जुड़ा एक ऐसा ही वाकया नवंबर 2017 में मीडिया चर्चाओं के केंद्र में आ गया था। हिना ने सवाल उठा दिया था कि वह समझ नहीं पा रहीं कि सुप्रीम कोर्ट ने क्यों सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को एक नियम बना दिया है? इस आदेश की अनेक प्रमुख नेताओं, फिल्मकारों और खेल शख्सियतों ने भी आलोचना और प्रशंसा दोनो की थी। यह मुद्दा उस समय दोबारा चर्चा में आया, जब जम्मू कश्मीर के दो युवाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें कहा गया कि ये दोनों राष्ट्रगान के समय खड़े नहीं हुए थे। राजौरी जिले की बाबा गुलाम शाह बादशाह यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले दोनों छात्र राष्ट्रगान के समय न केवल खड़े नहीं हुए बल्कि वे सेल्फी लेते रहे।

यह वाकया उस वक्त हुआ, जब सभी छात्र सिल्वर रोलिंग ट्रॉफी के दौरान विदाई सामारोह में शरीक हुए थे। इस समारोह में राज्य के गवर्नर एनएन वोहरा, राजौरी के डिप्टी कमिश्नर, एसएसपी और यूनिवर्सिटी के उपकुलपति भी मौजूद थे। इस पर एक और वाकया उस समय सामने आया, जब जयपुर के मेयर अशोक लाहोटी ने यह फरमान जारी किया कि उनके स्टाफ को हर सुबह राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत का पाठ करना होगा। सुबह के राष्ट्रगान के बाद किसी स्टाफर की बायोमैट्रिक एंट्री नहीं होगी।

हिना सिद्धू का कहना था कि वह खिलाड़ी होने पर खुद को खुशकिस्मत मानती हैं, बिना राष्ट्रगान सुने मेडल जीतना आधा भी अच्छा नहीं लगता है लेकिन राष्ट्रगान के दौरान खड़ा नहीं होने और फोन पर जोर-जोर से बात करने के बारे में वह सोच भी नहीं सकती हैं। राष्ट्रगान के दौरान खड़े न होने का तो यही मतलब हुआ कि आप पॉपकॉर्न खा सकते हैं, आपस में चिट-चैट कर सकते हैं और फोन तेज आवाज में बात कर सकते हैं। मनोरंजन को देशभक्ति से मिलाया जा रहा है। लोगों को मजबूर किया जा रहा है कि फिल्म शुरू होने से पहले वे खड़े होकर राष्ट्रगान गाएं, जबकि वे घर से फिल्म देखने के लिए निकलते हैं। फिर कहा जाता है कि ऐसा करना वैकल्पिक है। लिहाजा या तो इसको कानून नहीं बनाया जाए या अपनी संस्कृति और परंपराओं का ध्यान रखा जाए।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रगान को फिल्म शुरू होने से पहले अनिवार्य कर दिए जाने से शरारती तत्वों को इसका अपमान करने का मौका मिल जाता है. राष्ट्रगान को फिल्म शुरू होने से पहले नहीं बजाना चाहिए। उनके इस सवालिया अभिमत पर पांच बार की वर्ल्ड चैंपियन रह चुकीं मैरी कॉम ने कहा था कि राष्ट्रगान सभी भारतीयों की पहचान का प्रतीक है। राष्ट्रगान बजना राष्ट्र को आदर देना है।

हिना सिद्धू गोरेगांव, मुंबई के जाट परिवार से हैं। उन्होंने 2013 में बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी क्वालिफाई किया था। उनके पिता और भाई भी खेल शूटर रहे हैं। उनके चाचा बंदूक कस्टमाइज़र हैं। 7 फरवरी 2013 को पिस्टल शूटर रोनाक पंडित से शादी हुई थी। उन्होंने सन् 2006 में शूटिंग शुरू की थी। उसके बाद से राष्ट्रीय जूनियर खेलों और वरिष्ठ टीमों में भाग लेने लगीं। वर्ष 2009 में बीजिंग में आईएसएसएफ विश्व कप में उन्होंने रजत पदक जीता। केरल में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में उन्हें प्रथम स्थान मिला। उनको पहली बार जुलाई 2012 में लंदन ओलम्पिक की निशानेबाजी स्पर्धा में चीन की वेनजुन गो के मुकाबले निराशा हाथ लगी थी लेकिन अप्रैल 2014 में वह अपने शानदार प्रदर्शन के बाद दस मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में दुनिया की नंबर वन निशानेबाज बन गईं।

अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी महासंघ ने उनको शीर्ष स्थान दिया। उस समय हिना के खाते में 1699 रेटिंग अंक थे। इससे पहले हिना ने कुवैत में एशियन एयर गन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था और अमेरिका के फोर्ट बेनिंग में आईएसएसएफ राइफल/पिस्टल विश्वकप में रजत पदक हासिल किया था। साथ ही जर्मनी के म्यूनिख में विश्वकप में उन्होंने विश्व रिकार्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया था। सितंबर 2014 में हिना सिद्धू, राही सरनोबत और अनीसा सैयद की तिकड़ी ने ओंगयेयोन इंटरनेशनल शूटिंग में कांस्य पदक प्राप्त किया था। इस टीम को कुल 1729 अंकों के साथ तीसरा स्थान मिला था। उस समय हिना ने 572 अंक हासिल किए था।

उससे पूर्व अगस्त 2014 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने खेल दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में हिना को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। दिसंबर 2016 में हिना सिद्धू ने 60वीं राष्ट्रीय निशानेबाजी चैम्पियनशिप में 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा के फाइनल्स के लिए क्वालीफाई किया। वह 574 अंकों से दूसरे स्थान पर रहकर फाइनल में प्रवेश कर गई थीं। हिना एक बार फिर अक्तूबर 2017 में उस वक्त विश्व खेल स्पर्द्धा में चमक उठीं, जब उन्होंने ब्रिस्बेन में कॉमनवेल्‍थ शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड पदक पर कब्जा जमा लिया था। महिलाओं के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में हिना ने 240.8 अंक हासिल किए थे। हिना ने इससे पहले जीतू राय के साथ मिलकर नई दिल्ली के आईएसएसएफ विश्व कप फाइनल में देश के लिए गोल्ड जीता था और मई में चेक गणराज्य में शूटिंग चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में कांस्य पदक जीता था।

अपने पति के साथ हिना सिद्धू
अपने पति के साथ हिना सिद्धू

ये तो रही हिना की खेल सफलताओं और विफलताओं की फेहरिस्त। वह उस वक्त भी मीडिया की सुर्खियों का सबब बनीं, जब अप्रैल 2015 में उनको एयरलाइन कंपनी की लापरवाही के कारण बैंकॉक में पूरी रात एयरपोर्ट पर बितानी पड़ी थी। शूटिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेकर वह कोरिया से वहां पहुंची थीं। उनको बैंकॉक में फ्लाइट बदलनी थी लेकिन जेट एयरवेज के अधिकारियों ने उनके शूटिंग के हथियारों के कागजात पूरे नहीं होने का हवाला देते हुए जाने से रोक लिया था। उस रात हिना ने भूखे-प्यासे एयरपोर्ट पर रात बिताई। अगले दिन एयर इंडिया की फ्लाइट से उन्हीं कागजातों और हथियारों के साथ उड़ान भरने की इजाजत मिल गई थी।

उस रात एयरलाइंस कंपनी ने उनके टिकट का पैसा तक वापस नहीं किया था। उस वक्त हिना को सोशल मीडिया से जबर्दस्त समर्थन मिला था। हिना सिद्धू के नाम रहीं ऐसी तमाम सुर्खियों में एक अक्तूबर 2016 का वह वाकया, हिजाब पहनकर नहीं खेलने की शर्त पर उन्होंने एशियन चैंपियनशिप से अपना नाम वापस ले लिया था। वह चैम्पियनशिप दिसंबर में इरान की राजधानी तेहरान में आयोजित की जाने वाली थी। ड्रेस कोड की पाबंदी के चलते ही इससे पहले भी हिना ने एक अन्य चैंपियनशिप से अपना नाम वापस ले लिया था। उस इरान की निशानेबाजी प्रतिस्पर्द्धा में सभी महिला एथलीटों के लिए हिजाब नियम की बाध्यता ने विचलित कर दिया था।

उस वक्त प्रतियोगिता के आयोजकों ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर साफ-साफ संदेश दे दिया था कि शूटिंग रेंज और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के कपड़े इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ इरान के नियम-कायदों के अनुकूल होने चाहिए। उस वक्त हिना ने अपनी भावनाओं को सोशल मीडिया से भी साझा किया। हिना का कहना है कि खिलाड़ियों को हिजाब पहनने के लिए बाध्य करना खेल भावना के खिलाफ है। इस बाध्यता से हमारी मजबूत इच्छाशक्ति प्रभावित होती है। यद्यपि वह अपनी इस भावना का कत्तई राजनीतीकरण नहीं चाहती हैं, उन्हें भी अपना धर्म निभाने का अधिकार है। हर किसी को अपने धर्म के पालन का अधिकार है। अगर हमे कोई अपनी धार्मिक मान्यताओं को मानने के लिए विवश करता है तो वह ऐसी किसी भी स्पर्द्धा में भाग नहीं लेना चाहती हैं।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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