20 साल के स्टूडेंट ने दिया अनोखे ड्रोन का आइडिया, इंडियन एयर फोर्स ने दिखाई रुचि

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अंकित ने एक ऐसे ड्रोन की परिकल्पना की है जिसमें रक्षा मंत्रालय ने रुचि दिखाई है और भारतीय वायु सेना का भी ध्यान आकृष्ट किया है। अंकित सिंह मोहाली में चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज के बीटेक मकैनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच के अंतिम वर्ष के छात्र हैं।

अंकित सिंह (तस्वीर साभार- इंडियन एक्सप्रेस)
अंकित सिंह (तस्वीर साभार- इंडियन एक्सप्रेस)
हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के रहने वाले अंकित सिंह को उनके अध्यापकों ने मार्गदर्शन दिया और उन्हें सहयोगी छात्रों का भी साथ मिला।

मेक इन इंडिया अभियान देश के युवाओं को खूब भा रहा है, तभी तो उनके भीतर भारत में रहकर ही कुछ रचने के ख्वाब पल रहे हैं। पंजाब कॉलेज के 20 वर्षीय अंकित सिंह भी उन युवाओं में से एक हैं जिन्होंने मेक इन इंडिया अभियान को सार्थक बनाने का काम किया है। अंकित ने एक ऐसा ड्रोन विकसित किया है जिसमें रक्षा मंत्रालय ने रुचि दिखाई है और भारतीय वायु सेना का भी ध्यान आकृष्ट किया है। अंकित सिंह मोहाली में चंडीगढ़ ग्रुप ऑफ कॉलेज के बीटेक मकैनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच के अंतिम वर्ष के छात्र हैं। उन्होंने डिफेंस इन्वेस्टर सेल में अपना प्रपोजल जमा किया था।

अंकित ने मेक इन इंडिया अभियान के तहत मेक -II कैटगरी में अपना डिजाइन सबमिट किया। हालांकि उनका डिजाइन अभी गुप्त है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस कैटिगरी के अंतर्गत जमा किए जाने वाले प्रोटोटाइप्स को कोई फंडिंग नहीं दी जाती है। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर के रहने वाले अंकित सिंह को उनके अध्यापकों ने मार्गदर्शन दिया और उन्हें सहयोगी छात्रों का भी साथ मिला। अंकित ने कहा कि वे अभी इस ड्रोन से जुड़ी कोई जानकारी साझा नहीं करते हैं क्योंकि रक्षा मंत्रालय अभी उस पर विचार कर रहा है।

काफी पहले से ही अंकित की रुचि मानव रहित विमान को बनाने में रही है। वह कॉलेज के फर्स्ट ईयर से ही ड्रोन के बारे में जानकारियां जुटाते रहे हैं। उनका कहना है कि वह भारत के लिए ऐसे मानव रहित विमान बनाना चाहते हैं जो न केवल देश की सीमा की रक्षा कर सकेंगे बल्कि हथियार से भी लैस रहेंगे। इंडियन एक्सप्रेस अखबार से बात करते हुए अंकित ने कहा कि उनके ड्रोन प्रपोजल्स के बारे में रक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने रिव्यू दिए हैं और भारतीय सेना ने उसे सुधारने के कुछ सुझाव भी दिए हैं।

अंकित ने कहा, 'मुझे काफी खुशी हुई कि मेरे आइडिया को चुना गया और DRDO को वह पसंद आया।' कॉलेज में अंकित को पढ़ाने वाले प्रोफेसर अमरीश कुमार ने इस प्रॉजेक्ट में अपनी सलाह दी थी। जब अंकित ने उस पर काफी काम किया तो कॉलेज को लगा कि यह काम आगे भी जाना चाहिए। हालांकि अंकित के पास इस प्रॉजेक्ट पर काम करने के लिए ज्यादा पैसे नहीं हैं, लेकिन फिर भी वह तीन महीने के अंदर इस ड्रोन को बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं। रक्षा मंत्रालय ने अपने ट्विटर हैंडल पर अंकित के सोच की तारीफ की है।

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