'स्टैंड अप इंडिया' के तहत नौकरी ढूंढने वाले अब नौकरी देने वाले बन सकेंगे-मोदी

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सरकार के वित्तीय समावेशी कार्यक्रम को प्रोत्साहन देने के इरादे से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘स्टैंड अप इंडिया’ योजना पेश की जिसके तहत देश भर में फैली बैंकों की सवा लाख शाखाएं अनुसूचित जाति-जनजाति और महिला वर्ग की उद्यमियों को कारोबार के लिए एक करोड़ रुपये तक का कर्ज उपलब्ध कराएंगी।

दलित नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम की वर्षगांठ के मौके पर आयोजित समारोह में मोदी ने 5,100 ई-रिक्शा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

स्टैंड अप इंडिया कार्यक्रम का तौर तरीका समझाते हुए मोदी ने कहा,  

"इससे देशभर में 2.5 लाख उद्यमी पैदा होंगे। प्रत्येक बैंक शाखा को नया उपक्रम लगाने के लिए 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक के कम से कम दो ऋण बिना कुछ गिरवी रखे देने होंगे। सरकार के लिए हर किसी को नौकरी देना संभव नहीं है। इस तरह की योजना से नौकरी ढूंढने वाले, नौकरी देने वाले बन सकेंगे। यह योजना दलित से लेकर आदिवासी समुदाय तक लोगों का जीवन बदल देगी।"


 मोदी ने कहा,  

"स्टैंड अप इंडिया का मकसद प्रत्येक भारतीय को सशक्त करना है, जिससे वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें।" 

मोदी ने इस योजना की घोषणा अपने स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में की थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी भी पूर्ववर्ती सरकार ने कभी भी बाबू जगजीवन राम की वर्षगांठ पर कोई समारोह आयोजित नहीं किया। कृषि मंत्री के रूप में उन्होंने देश में हरित क्रांति के लिए काफी काम किया और 1971 के युद्ध के समय वह रक्षा मंत्री थे।

मोदी ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह के लोगों के योगदान को नजरअंदाज किया गया।


इसी समारोह में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि उनके मंत्रालय ने पिछले दो साल के दौरान गरीब लोगों की बेहतरी के लिए काफी काम करने का प्रयास किया है। आमतौर पर यह मंत्रालय बड़े कारपोरेट घरानों से जुड़ा रहता है। उन्होंने इस मौके पर सरकार की कई योजनाओं मसलन जनधन योजना, बीमा एवं पेंशन योजना और मुद्रा योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं वित्तीय समावेशी को प्रोत्साहन देने के अलावा गरीबों को सशक्त भी कर रही हैं।

जेटली ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 2015-16 में 3.26 करोड़ लाभार्थियों को 1.35 लाख करोड़ रपये दिए गए हैं। यह प्रधानमंत्री द्वारा तय 1.22 लाख करोड़ रपये के लक्ष्य से अधिक है।

मोदी समारोह स्थल पर एक सजाए गए ई-रिक्शा पर पहुंचे। उन्होंने कुछ लाभार्थियों को चाबी भी सौंपी तथा 5,100 ई रिक्शा को रवाना किया।

प्रधानमंत्री ने ई-रिक्शा मालिकों से अपने बच्चों विशेषरूप से लड़कियों को शिक्षित करने की अपील करते हुए कहा कि देश तब तक आगे नहीं बढ़ सकता जब तक कि गरीबों औ दलितों को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिले।

उन्होंने कहा कि ई -रिक्शा योजना पर्यावरण अनुकूल है, क्योंकि इसमें बैटरी को सौर बिजली बैटरी स्टेशन से रिचार्ज करने का विकल्प है। "ई-रिक्शा से हमें ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने में मदद मिलेगी।"


योजना के तहत ऋण सुविधा लेने वाले एससी-एसटी तथा महिला उद्यमियों को निकासी के लिए रूपे डेबिट कार्ड दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने व्यापक समर्थन मसलन ऋण पूर्व प्रशिक्षण, रिण लेने में मदद, फैक्टरिंग और विपणन सहयोग दिया जाएगा।

भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक :सिडबी: द्वारा 10,000 रपये की पुनर्वित्त खिड़की उपलब्ध कराई जाएगी और नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लि. :एनसीजीटीसी: 5,000 करोड़ रपये का कोष बनाएगी।

सिडबी दलित इंडियन चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री और विभिन्न संस्थानों के संपर्क में रहेगा। सिडबी तथा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक :नाबार्ड: को स्टैंड अप कनेक्ट केंद्रों के रूप में प्राधिकृत किया जाएगा।

पीटीआई


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