आइएएस के हाथों में कविता की कलम और किताबें

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 रागदरबारी लिखने वाले श्रीलाल शुक्ल तो वरिष्ठ आइएएस रहे और देश के जाने माने वरिष्ठ कथाकार हैं शिवमूर्ति। उनकी तरह आज भी अनेक आइएएस, आइपीएस ड्यूटी के समय से वक्त निकाल कर कलम भी चलाते रहते हैं। 

आईएएस अफसर (फाइल फोटो)
आईएएस अफसर (फाइल फोटो)
सुमिता मिश्रा भी भारतीय प्रशासनिक सेवा में हैं, साथ ही वह कवयित्री भी हैं। उनके कई कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। वह वर्ष 1990 से हरियाणा सरकार में विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर प्रशासक रही हैं। 

सुमीता मिश्रा की पहली साहित्यक कृति ‘ए लाइफ ऑफ लाईट’ नामक शीर्षक से उनकी 45 कविताओं का संग्रह है, जिसका वर्ष 2012 में प्रकाशन-विमोचन हुआ।

एक परिवहन अधिकारी जब अपनी कविता के माध्यम से यातायात व्यवस्था दुरुस्त करने का मंत्र फूंकने लगता है तो निश्चित ही शासन और साहित्य के बीच की डगर दूर तक दिखाई देने लगती है। भारतीय प्रशासनिक सेवा में सुमिता मिश्रा, जेएस मिश्रा, उमेश चौहान, अखिलेश मिश्रा आदि कई ऐसे आइएएस अधिकारी हैं, जिनका लाख प्रशासनिक दबावों के बावजूद साहित्यिक सृजन से नाता बना रहा है। रागदरबारी लिखने वाले श्रीलाल शुक्ल तो वरिष्ठ आइएएस रहे और देश के जाने माने वरिष्ठ कथाकार हैं शिवमूर्ति। उनकी तरह आज भी अनेक आइएएस, आइपीएस ड्यूटी के समय से वक्त निकाल कर कलम भी चलाते रहते हैं। उनमें कई एक आइएएस अधिकारियों की पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं।

आइए, पहले बात करते हैं फैजाबाद के कविता प्रेमी एआरटीओ (सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी) उदित नारायण पाण्डेय की। यातायात जागरुकता पर लिखी उनकी कविता इन दिनो कई जिले के लोगों की जुबान पर तैरती रहती है। उनकी कविता की सीडी सभी जिलों में भेजी गई है। यातायात जागरुकता के लिए इस कविता के माध्यम से प्रचार-प्रसार के निर्देश दिये गये हैं। साहित्य से नाता रखने वाले उदित नारायण पांडेय अपने काम को ही कविता का विषय बना चुके हैं। उन्होंने अपनी कविताओं को संगीतबद्ध भी किया है।

सुमिता मिश्रा भी भारतीय प्रशासनिक सेवा में हैं, साथ ही वह कवयित्री भी हैं। उनके कई कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। वह वर्ष 1990 से हरियाणा सरकार में विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर प्रशासक रही हैं। वर्ष 2005 में आपदा तत्परता पर कॉन्फ्रेंस में की गई उनकी टिप्पणी को ‘दी हॉवर्ड गजट’ में रेखांकित किया गया है। उनकी संरक्षण व सहायता के अन्तर्गत हरियाणा ने लगातार तीन वर्षों तक ऊर्जा संरक्षण के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त किया। अक्षय ऊर्जा निदेशक के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान वर्ष 2007 में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय कार्य के लिए हरियाणा को राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल से राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।

वर्ष 2014 में परिवहन आयुक्त के रूप में उन्होंने स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित यातायात में सुधार लाने का कार्य किया। इसी वर्ष उन्हें हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की अतिरिक्त प्रधान सचिव नियुक्त किया गया, परन्तु अगले साल वह इस प्रतिष्ठित पद पर मात्र पांच महीने रहीं। वे इस समय पर्यटन विभाग की प्रधान सचिव हैं। सुमीता मिश्रा की पहली साहित्यक कृति ‘ए लाइफ ऑफ लाईट’ नामक शीर्षक से उनकी 45 कविताओं का संग्रह है, जिसका वर्ष 2012 में प्रकाशन-विमोचन हुआ।

खुशवंत सिंह द्वारा इसे प्राक्कथन दिया गया। यह हिन्दी काव्य पुस्तक ‘कदमों की लय’का अनुसंरण है। उनकी तीसरी साहित्यिक कृति में हिन्दी व उर्दू दोनों भाषाओं के समीश्रण के साथ 75 कविताएं शामिल हैं, जो वर्ष 2013 में ‘जरा सी धूप’ नामक शीर्षक से जारी की गई। पाठकों द्वारा इस पुरस्तक की इतनी अधिक प्रशंसा की गई कि इस पुस्तक का तीसरी बार मुद्रण हुआ। प्रसिद्ध कवि अशोक वाजपेयी ने उनकी तीसरी पुस्तक के शुभारम्भ पर उनके लेखन की प्रशंसा की है। वह चण्डीगढ़ साहित्यिक सोसायटी की संस्थापक और अध्यक्ष भी हैं।

ऐसे ही एक उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी हैं डॉ. अखिलेश मिश्रा। वह मंचों पर भी कविताएं सुनाकर वाहवाही लूटते रहते हैं। उनका कहना है कि कविता लिखने के लिए समय निकालने की जरूरत नहीं पड़ती है। कविता स्वतः मन से प्रस्फुटित होती है। कभी कभी मन से अनजाने में ही कोई बहुत अच्छी कविता अकस्मात फूट पड़ती है और कभी कोई लाइन महीनों तक मन में अटकी रह जाती है। वह आज भी अपने को मंचीय कवि मानते हैं। उनकी एक चर्चित कविता है -

अब अदालत में खड़ी मूरत रुआंसी हो रही है

अब कहां इस मुल्क में कांटे को फांसी हो रही है

उमेश कुमार सिंह चौहान भी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ही नहीं, कवि, अनुवादक और लेखक भी हैं। उनकी प्रकाशित पुस्तकें हैं - गाँठ में लूँ बाँध थोड़ी चाँदनी, जिन्हें डर नहीं लगता, दाना चुगते मुरगे (कविता-संग्रह), अक्कितम की प्रतिनिधि कविताएं (मलयालम से अनूदित महाकवि अक्कितम की कविताओं का संग्रह)। उनकी एक कविता है -

शब्दों का क्या?

शब्द तो ढेरों थे,

अर्थ भरे और निरर्थक भी,

जिसकी जैसी ज़ुबान,

उसके पास वैसे ही थे शब्द,

कुछ के शब्दों पर भरोसा ही नहीं था,

किसी को भी,

इसीलिये रखे थे उन्होंने अपने पास बोलने के लिए,

कुछ उधार लिए गए शब्द भी,

कभी टिके नहीं रह सकते थे ऐसे लोग,

अपने कहे गए शब्दों पर,

ऐसे लोगो की वज़ह से ही,

बन चुके हैं कुछ लोग शब्दों के कारोबारी भी,

शब्द उछाले जा रहे हैं सरेआम,

तरह-तरह की ज़ुबानों से,

डराने-धमकाने-गरियाने-बरगलाने के लिए,

अख़बार के पन्नों से भी गायब हो रहे हैं वे शब्द,

जिन पर किया जा सके अब कुछ भरोसा,

शब्दों का क्या ?

शब्द तो पत्थरों की तरह बेज़ान हो चले हैं आजकल,

उनका इस्तेमाल किया जा रहा है बस,

किसी न किसी का माथा फोड़ने के लिए ।

एक अन्य आइएस अधिकारी हैं जेएस मिश्र। पेशे से देश की सर्वोत्तम सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं लेकिन शौक से वह लेखक और कवि के रूप में जाने जाते हैं। अब तक वह 'धूप छांव', 'हिमालय नया हो गंगा नई', 'चांद सिरहाने रख' जैसी खूबसूरत कविताएं लिख चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने 'अ क्वेस्ट फॉर ड्रीम सिटीज', 'महाकुंभ, द ग्रेटेस्ट शो ऑन अर्थ', 'हैपीनेस एज अ च्वॉइस' जैसी किताबें लिखी हैं। कॉलेज के दौरान ही वह एक मैगजीन के लिए लिखने लगे थे, फिर अपने कॉलेज में प्रकाशित होने वाली मैगजीन में भी वह वरिष्ठ पद पर रहे। उन्होंने अपने सर्विस पीरियड के दौरान कई बेहतरीन कविताओं की रचना की। वह कहते हैं कि उनकी इच्छा लिट्रेचर में ही करियर को आगे बढ़ाने में थी लेकिन शायद भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। हालांकि उनका लेखनी के प्रति रूझान आज भी खत्म नहीं हुआ है।

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पत्रकार/ लेखक/ साहित्यकार/ कवि/ विचारक/ स्वतंत्र पत्रकार हैं। हिन्दी पत्रकारिता में 35 सालों से सक्रीय हैं। हिन्दी के लीडिंग न्यूज़ पेपर 'अमर उजाला', 'दैनिक जागरण' और 'आज' में 35 वर्षों तक कार्यरत रहे हैं। अब तक हिन्दी की दस किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिनमें 6 मीडिया पर और 4 कविता संग्रह हैं।

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