'एम्बी' स्टार्टअप देगा सही समय पर एम्बुलेंस

गूगल इंडिया में काम कर रहे जोस ने 'एम्बी' नाम का एक ऐसा स्टार्टअप शुरू किया, जो घर बैठे देगा एम्बुलेंस की सुविधा। 

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"एम्बुलेंस एक ऐसी चीज़ है, जो किसी के घर के सामने न ही खड़ी हो तो अच्छा है, क्योंकि अच्छी सेहत की कामना हर व्यक्ति करता है। लेकिन फिर भी जिन्हें इसकी आवश्यकता पड़ती है उनके लिए खुशी की बात है, कि उन्हें अब एम्बुलेंस के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा, क्योंकि गूगल इंडिया की नौकरी छोड़ कर जोस ने एक ऐसा स्टार्टअप शुरू किया है, जो घर बैठे कभी भी कहीं भी एम्बुलेंस की सुविधा देगा।"

"कई बार समय से एम्बुलेंस ना पहुंचने से या तो मरीज़ की हालत और खराब हो जाती है या फिर कभी-कभी मृत्यु भी। ऐसे में अपने देश की एम्बुलेंस व्यवस्था पर सिर पीट लेने का दिल करता है, इसलिए आम आदमी की इसी समस्या को ध्यान में रख कर गूगल इंडिया में काम कर रहे जोस ने अपनी जमी-जमाई कंपनी की नौकरी छोड़ कर खुद का स्टार्टअप शुरू किया और नाम दिया 'एम्बी'।"

"कंपनी शुरू करने के कुछ दिन बाद ही एप्पल हैदराबाद में काम कर रहे रोहित भी जोस के साथ उनके स्टार्टअप एम्बी से जुड़ गए।"

यदि घर में किसी बीमारी से संबंधित आपात स्थिति पैदा हो जाये, तो मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की तलाश करना बहुत परेशानी भरा और तकलीफदेह अनुभव है, क्योंकि हमारे देश में जितने अस्पताल हैं, एम्बुलेंस शायद उसकी आधी भी न हों। कई बार समय से एम्बुलेंस ना पहुंचने से या तो मरीज़ की हालत और खराब हो जाती है या फिर कभी-कभी मृत्यु भी। ऐसे में अपने देश की एम्बुलेंस व्यवस्था पर सिर पीट लेने का दिल करता है, इसलिए आम आदमी की इसी समस्या को ध्यान में रख कर गूगल इंडिया में काम कर रहे जोस ने अपनी जमी-जमाई कंपनी की नौकरी छोड़ कर खुद का स्टार्टअप शुरू किया और नाम दिया 'एम्बी'। कंपनी शुरू करने के कुछ दिन बाद ही एप्पल हैदराबाद में काम कर रहे रोहित भी जोस के साथ उनके स्टार्टअप एम्बी से जुड़ गए।

स्टार्टअप शुरू होने के कुछ दिन बाद जोस और रोहित ने पाया, कि भारत के बड़े शहरों में एम्बुलेंस तो है लेकिन कोई स्ट्रीमलाइन सुविधा नहीं दे पाता है, क्योंकि एम्बुलेंस अस्पताल और फ्लीट ओनर्स के बीच बंटे हैं। सबके अलग-अलग फोन नंबर हैं। अगर आपको एम्बुलेंस चाहिए तो सबसे अलग-अलग फोन करके पूछना पड़ता है, जिसमें समय बर्बाद होता है और मरीज की हालत गंभीर होती जाती है। इन सबके बाद भी इस बात की गारंटी कोई अस्पताल, कोई एजेंसी, कोई ओनर नहीं लेता कि एम्बुलेंस सही समय पर पहुंच ही जायेगी।

"एम्बुलेंस को लेकर इस तरह की समस्याओं से इसलिए भी जूझना पड़ता है, कि अस्पताल या एजेंसीज़ ऐसी किसी तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते, जो एम्बुलेंस की सही लोकेशन पता कर सकें। एक एम्बुलेंस के सही समय पर पहुंचने में घंटे भर से ऊपर हो जाता है। और बात यदि बैंगलोर जैसे शहर की हो, तो ट्रैफिक के बुरे हाल के चलते पंद्रह मिनट का रस्ता कब 1 घंटे से 2 घंटे का समय ले ले कोई नहीं जानता।"

महानगरों में एम्बुलेंस और ट्रैफिक की खराब स्थिति को देखते हुए एम्बी स्टार्टअप ने मार्केट में उपलब्ध सभी एम्बुलेंस का एक नेटवर्क बनाया और एक कॉल सेंटर शुरू किया है जो ग्राहक से संपर्क में रहता है। ग्राहक के संपर्क करने पर वह उन्हें बताता है, कि एम्बुलेंस कहां है और कितनी देर में पहुंच जायेगी।

एम्बी जल्द ही मोबाइल एप लाने की तैयारी है, जो एम्बुलेंस को उनकी लोकेशन के बारे में सीधे ग्राहक को बतायेगा और साथ ही ज़रूरतमंद के लिए कहीं भी किसी भी समय एम्बुलेंस बुलाना और आसान हो जायेगा। फिलहाल यह स्टार्टअप हैदराबाद और बैंगलोर में काम कर रहा है, लेकिन बहुत जल्दी बाकी महानगरों में भी आ जायेगा।

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