क्यों ज़रूरी हैं गणेश चतुर्थी मनाना

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भारत एक ऐसा देश है, जहां कई तरह के त्योहारों को महत्तव दिया जाता है। यहां के लोग त्योहारों के बहाने ही खुश होने की कोशिश करते हैं। उन्हीं त्योहारों में से एक है गणेश चतुर्थी, जिसे 10 दिनों तक बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है और उसके बाद मूर्ति विसर्जन कर सभी अपने घरों को इस कामना के साथ अपने घरों को लौट जाते हैं, कि "अगले बरस तू फिर आना..." इस त्योहार को दो और नामों से जाना जाता है गणेशोत्सव और विनायक चतुर्थी। आईये जानें कई बेहतरीन तस्वीरों के साथ इस त्यौहार का महत्व...

भारत एक ऐसा देश है जहां भगवान गणेश के जन्मदिन को उनके भक्त बेहद उत्साह के साथ मनाते हैं और मनाएं भी क्यों नहीं, किसी भी पूजा के शुरू होने पर सबसे पहले इन्हें ही तो पूजा जाता है

गणेश चतुर्थी बहुत शुभ त्योहार माना जाता है, जिसे महाराष्ट्र, गोवा, केरल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों में काफी ज़ोर-शोर के साथ मनाया जाता है। सबसे अच्छी बात है, कि इस त्योहार को लगभग सभी धर्मों के लोग मनाते हैं। गणेश चतुर्थी के मनाने के पीछे कई तरह की कहानियां हैं, जिसमें गणेश के माता-पिता (पार्वती और भगवान शिव) के साथ उनकी कहानी सबसे ज्यादा सुनने को मिल जाती है। ऐसा कहा जाता है, कि पार्वती ने अपने शरीर के मैल से गणेश को बनाया था। 

एक बार जब माता पार्वति स्नान करने जा रही थीं, तो उन्होंने गणेश को कहा कि जब तक वो स्नान करके वापिस न आयें, तब तक वो (गणेश) दरवाजे पर पहरा देते रहें और कोई भी भीतर आने न पाये, लेकिन इस बीच भगवान शिव वहां पहुंच गये। गणेश शिव को अंदर जाने से रोकने लगे। दोनों के बीच काफी झगड़ा हुआ और गुस्से में आकर भगवान शंकर ने बालक गणेश के सिर को उनके धड़ से अलग कर दिया। यह सब देख कर पार्वती को काफी गुस्सा आया।

अपनी गलती का प्रायश्चित करते हुए भगवान शिव ने पार्वती से ये वादा किया कि उन्होंने गणेश को खतम किया है वो ही उन्हें नया जीवन देंगे। भगवान शंकर ने अपने लोगों को कहा कि उस बच्चे का सिर लेकर आना जो अपनी मां की पीठ के पीछे सो रहा हो। लोगों ने बहुत ढूंढा किसी इंसान का सिर नहीं मिला, लेकिन अंत में देखा कि एक हाथी का बच्चा अपनी मां की पीठ के पीछे सोया हुआ है और उसी का सिर वे लोग लेकर भगवान शंकर के पास पहुंच गये। 

भगवान शंकर ने हाथी के उस सिर को गणेश के धड़ से जोड़ कर उन्हें नया जीवनदान दिया, जिसके बाद लोग गणेश को गजानन भी कहने लगे।

आयें पढ़ें, कुछ खूबसूरत तस्वीरों के माध्यम से गणेश चतुर्थी के विषय में और भी बहुत कुछ...

गणेश चतुर्थी को गणेशोत्सव और विनायक चतुर्थी भी कहते हैं। इस साल यह त्योहार 25 अगस्त से शुरू होकर 5 सितंबर तक चलेगा।

गणेश चतुर्थी का त्योहार आने से दो-तीन महीने पहले ही कारीगर भगवान गणेश की मिट्टी की मूर्तियां बनाना शुरू कर देते हैं। इन दिनों बाजारों में भगवान गणेश की अलग-अलग मुद्रा में बेहद ही सुंदर मूर्तियां मिलनी शुरू हो गई हैं, जो कि दुकानों की शोभा बढ़ा रही हैं।

भगवान गणेश खाने के बेहद शौकीन माने जाते हैं, इसलिए उन्हें कई तरह की मिठाईयां जैसे मोदक, गुड़ और नारियल जैसी चीज़े प्रसाद या भोग में चढ़ाये जाने की प्रथा है।

सबसे पहले मूर्ति स्थापना करने से पहले प्राणप्रतिष्ठा की प्रथा निभाई जाती है। इस अनुष्ठान के बाद शोडोषोपचार- भगवान को 16 तरह से श्रद्धांजलि दी जाती हैं।

बुधवार को भगवान गणेश की आराधना भी आपके लिए फलदायी होती है। हिंदू संस्कृति में भगवान गणेश का सर्वोपरि स्थान है। प्रत्येक मंगल कार्य को शुरू करने से पहले भगवान गणेश का आह्वान जरूरी है।

इस बार गणेश चतुर्थी पर 58 साल बाद विशेष संयोग बन रहा है। इस कारण इस बार गणेश चतुर्थी और भी अधिक खास हो गई है।

देवता भी अपने कार्यों को बिना किसी रुकावट के पूरा करने के लिए पहले गणेश जी का ध्यान करते हैं। शास्त्रों में भी भगवान गणेश की महत्ता का वर्णन किया गया है। बताया गया है कि एक बार भगवान शंकर त्रिपुरासुर का वध करने में असफल हो गए। असफलता पर महादेव ने विचार किया तो शिवजी को ज्ञात हुआ कि वे गणेशजी की अर्चना किए बगैर त्रिपुरासुर से युद्ध करने चले गए थे। इसके बाद शिवजी ने गणेश पूजन करके दोबारा त्रिपुरासुर पर प्रहार किया, तब उनका मनोरथ पूर्ण हुआ।

गणेश जी को सभी दुखों और परेशानियों को हरने वाला देवता बताया गया है और इसीलिए इन्हें विघ्नहर्ता भी कहा जाता है। गणेश उपासना से शनि समेत सभी ग्रह दोष दूर हो जाते हैं। गणेश चतुर्थी वाले दिन गणेश पूजन के लिए सुबह के समय स्नानादि से निवृत्त होकर सबसे पहले गणेश प्रतिमा को पूजा स्थल पर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करके लाल रंग के आसन पर विराजमान करें।

गणपति विसर्जन के दौरान उनके भक्त ''गणपति बप्पा मोरया, पुग्चा वर्षा लोकर या" जिसका मतबल है गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।

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