किसान से शिक्षक बने इस शख्स ने अपने घर को ही बना दिया 1320 ग्रामीण छात्रों का स्कूल

अपनी मेहनत और लगन के बल पर इस शख़्स ने घर में ही खोल लिया 1,320 छात्रों का स्कूल...

2

केशव की मेहनत से आज 1,320 छात्रों वाला रामपुर में एक स्कूल है। जिसे वह अपने बेटे और बहू के साथ चलाते हैं। स्कूल में 670 लड़कियां हैं। अपने घर में कक्षाएं चलाने वाले किसी शख्स को केशव ने गांव में एक स्कूल बनाने के लिए अपनी चार एकड़ कृषि योग्य जमीन दे दी थी।

बच्चों के साथ केशव
बच्चों के साथ केशव
 मेक इन इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीणों को शिक्षित करने के लिए अपने पिता के मिशन से प्रेरित होकर, केशव के पुत्र कृष्ण, उनके साथ शामिल हो गए। आज, कृष्णा और उनकी पत्नी, 21 अन्य शिक्षकों के साथ, स्कूल का प्रबंधन करते हैं। 

कहते हैं 'जहां चाह वहां राह' अगर इंसान चाहे तो उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। 1989 में, एक ग्राम प्रधान उत्तर प्रदेश के रामपुर गांव में एक मकसद के साथ घर-घर गया। ग्रामीणों के साथ हर बातचीत में, उसने शिक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया। एक गांव जहां तब तक स्कूल नहीं था और न ही उसे स्कूल की जरूरत महसूस होती थी उसने उस किसान के शिक्षा के विचार को खारिज कर दिया। लेकिन बच्चों को शिक्षित करने का सपना पूरा करने के लिए चले केशव सरन को लोगों की कम रुचि रोक नहीं पाई।

उन्होंने वो कर दिखाया जिसको करने की शायद ही कोई हिम्मत रखता हो। केशव की मेहनत से आज 1,320 छात्रों वाला रामपुर में एक स्कूल है। जिसे वह अपने बेटे और बहू के साथ चलाते हैं। स्कूल में 670 लड़कियां हैं। अपने घर में कक्षाएं चलाने वाले किसी शख्स को केशव ने गांव में एक स्कूल बनाने के लिए अपनी चार एकड़ कृषि योग्य जमीन दे दी थी। 1988 में, जब उन्हें प्रधान के रूप में चुना गया, तो उन्होंने गांव के लिए एक बड़ी योजना बनाई थी, जिसमें स्कूल भी शामिल था।

उन्होंने शाम में पुराने समुदाय को पढ़ाना शुरू कर दिया। इससे युवाओं के अंदर उन्हें फॉलो करनी की जिज्ञासा जागी। इस प्रक्रिया के माध्यम से उन्हें यह भी समझ में आया कि गांववाले अपने बच्चों को गांव के बाहर स्कूलों में भेजने को तैयार क्यों नहीं होते और उनके अंदर इसको लेकर क्या आशंकाए हैं। केशव कहते हैं, 'मैं हर महीने 200 रुपये कमाता था ये मेरे परिवार को चलाने के लिए पर्याप्त था। चूंकि हम एक साधारण जीवन शैली जी रहे थे इसलिए मैं 1989 में स्कूल बनाने के लिए सेविंग कर सकता था।'

जब छात्रों की संख्या में वृद्धि हुई, तो उनके घर में जगह कम पड़ गई। इसलिए उनके पास चौपाल में जाने का एकमात्र विकल्प था। हालांकि जल्द ही, इसने सरकार का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया और स्कूल को 'जूनियर हाई स्कूल' का टैग दे दिया गया, जो कि आज केशव इंटर कॉलेज के रूप में प्रसिद्ध है। नेक इन इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीणों को शिक्षित करने के लिए अपने पिता के मिशन से प्रेरित होकर, केशव के पुत्र कृष्ण, उनके साथ शामिल हो गए। आज, कृष्णा और उनकी पत्नी, 21 अन्य शिक्षकों के साथ, स्कूल का प्रबंधन करते हैं। 2017 में, 10वीं और 12वीं कक्षा के 450 छात्र ने अपनी बोर्ड की परीक्षा दी है। इन छात्रों में से अधिकांश या तो हायर एजुकेशन की पढ़ाई कर रहे हैं या अच्छी नौकरी कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: जाति उन्मूलन की दिशा में बड़ी उपलब्धि, केरल के 1.2 लाख छात्रों ने खुद को 'जाति-धर्म' से किया अलग

यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...

Related Stories

Stories by yourstory हिन्दी