मुंबई की मानसी ने शुरू किया ऐसा स्टार्टअप जो रखेगा आपके नाज़ुक डिलिवरी आइटम्स का ख़्याल

ट्रैफ़िक में केक पिघलने या नाज़ुक गिफ्ट आइटम्स के टूटने से हैं परेशान? मुंबई के इस स्टार्टअप के पास है सॉल्यूशन...

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आप और हम कई बार ऐसी परिस्थिति में फंसे होंगे, जब हमको किसी नाज़ुक सामान को सुरक्षित रूप से, एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना होगा, लेकिन समय की या अन्य दिक्कतों की वजह से ऐसा नहीं हो सका। कुछ ऐसा ही हुआ मुंबई की रहने वाली मानसी महानसरिया के साथ। वह अपनी बहन के बर्थडे सेलिब्रेशन में केक लेकर जा रही थीं और ट्रैफ़िक की वजह से उनका केक रास्ते में ही ख़राब हो गया। इस घटना के बाद ही मानसी को ऐसी सर्विस शुरू करने का ख़्याल आया, जिसमें ऐसे नाज़ुक सामानों की सुरक्षित डिलिवरी की सुविधा दी जाती हो और फिर शुरूआत हुई स्टार्टअप जस्ट डिलिवरीज़...

मानसी महानसरिया
मानसी महानसरिया
जस्ट डिलिवरीज़ के माध्यम से मुख्य रूप से नाज़ुक या जल्दी ख़राब हो जाने वाले सामानों की डिलिवरी की सुविधा दी जाती है। जस्ट डिलिवरीज़ के ज़रिए आप नाज़ुक और जल्दी टूट सकने वाले गिफ्ट्स आदि को सुरक्षित रूप से पार्सल करवा सकते हैं। इतना ही नहीं, कंपनी, बड़े होटलों की आउटडोर केटरिंग में भी मदद करती है।

स्टार्टअप: जस्ट डिलिवरीज़
फ़ाउंडर: मानसी महानसरिया
शुरूआत: 2015
आधारित: मुंबई
काम: नाज़ुक या जल्दी ख़राब होने वाले सामानों की सुरक्षित डिलिवरी
सेक्टर: लॉजिस्टिक्स
फ़ंडिंग: बूटस्ट्रैप्ड

आप और हम कई बार ऐसी परिस्थिति में फंसे होंगे, जब हमको किसी नाज़ुक सामान को सुरक्षित रूप से, एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना होगा, लेकिन समय की या अन्य दिक्कतों की वजह से ऐसा नहीं हो सका। मान लीजिए कि आपके दोस्त का बर्थडे है और आपको उसके लिए केक या पेस्ट्री लेकर जाना है और आप परेशान हैं कि ट्रैफ़िक में फंसने या फिर किसी और वजह से आप फ़्रेश पेस्ट्री लेकर दोस्त के पास नहीं पहुंच पाएंगे। कुछ ऐसा ही हुआ मुंबई की रहने वाली मानसी महानसरिया के साथ। वह अपनी बहन के बर्थडे सेलिब्रेशन में केक लेकर जा रही थीं और ट्रैफ़िक की वजह से उनका केक रास्ते में ही ख़राब हो गया। इस घटना के बाद ही मांसी को ऐसी सर्विस शुरू करने का ख़्याल आया, जिसमें ऐसे नाज़ुक सामानों की सुरक्षित डिलिवरी की सुविधा दी जाती हो और फिर जनवरी 2015 में मुंबई से ही उन्होंने 'जस्ट डिलिवरीज़' स्टार्टअप शुरू किया।

आप और हम कई बार ऐसी परिस्थिति में फंसे होंगे, जब हमको किसी नाज़ुक सामान को सुरक्षित रूप से, एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना होगा, लेकिन समय की या अन्य दिक्कतों की वजह से ऐसा नहीं हो सका। कुछ ऐसा ही हुआ मुंबई की रहने वाली मानसी महानसरिया के साथ। वह अपनी बहन के बर्थडे सेलिब्रेशन में केक लेकर जा रही थीं और ट्रैफ़िक की वजह से उनका केक रास्ते में ही ख़राब हो गया। इस घटना के बाद ही मानसी को ऐसी सर्विस शुरू करने का ख़्याल आया, जिसमें ऐसे नाज़ुक सामानों की सुरक्षित डिलिवरी की सुविधा दी जाती हो और फिर शुरूआत हुई स्टार्टअप जस्ट डिलिवरीज़...

मानसी बताती हैं कि शुरूआत में उनका बिज़नेस ठीक तरह से चल नहीं पा रहा था और उन्हें नुकसान भी हो रहा था। इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि डिलिवरी सर्विस के लिए उन्हें एयर-कंडीशन्ड वैन और ड्राइवर की ज़रूरत पड़ती थी और अगर एक रूट में सिर्फ़ एक ही केक का ऑर्डर मिलता था तो उनके लिए यह घाटे का सौदा हो जाता था। मांसी बताती हैं कि उनके बिज़नेस का पहला टर्निंग पॉइंट था, जब उन्हें एक रेस्तरां चेन के बैकेंड लॉजिस्टिक्स का कॉन्ट्रैक्ट मिला। इस कॉन्ट्रैक्ट के ज़रिए, उन्हें बड़ी मात्रा में ऑर्डर मिलने लगे।

अपनी सर्विस के बारे में विस्तार से बताते हुए मानसी ने जानकारी दी कि जस्ट डिलिवरीज़ के माध्यम से मुख्य रूप से नाज़ुक या जल्दी ख़राब हो जाने वाले सामानों की डिलिवरी की सुविधा दी जाती है। जस्ट डिलिवरीज़ के ज़रिए आप नाज़ुक और जल्दी टूट सकने वाले गिफ्ट्स आदि को सुरक्षित रूप से पार्सल करवा सकते हैं। इतना ही नहीं, कंपनी, बड़े होटलों की आउटडोर केटरिंग में भी मदद करती है। मानसी कहती हैं कि जस्ट डिलिवरीज़, ग्राहकों को नाज़ुक सामानों को ठीक ढंग से रखने की चिंता, अच्छी पार्सल सर्विस या फिर डिलिवरी के लिए पार्किंग वगैरह ढूंढने के झंझट से निजात दिलाता है; और आप अपना मनचाहा प्रोडक्ट, जस्ट डिलिवरीज़ के माध्यम से बिना किसी चिंता या उलझन के डिलिवर करा सकते हैं।

मानसी ने स्पष्ट करते हुए बताया कि बी टू बी (बिज़नेस टू बिज़नेस) सेगमेंट में, कई ऐसी स्मॉल और मीडियम फ़ूड और बेवरेज कंपनियां हैं, जो नियमित तौर पर जस्ट डिलिवरीज़ से लॉजिस्टिक्स की सर्विस लेती हैं। मानसी बताती हैं कि जब तक उनका स्टार्टअप इस सेक्टर में नहीं आया था, इन रेस्तरां या कंपनियों को ख़ुद की वैन्स और डिलिवरी बॉयज़ के झंझट में पड़ना पड़ता था। उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक सेक्टर का यह हिस्सा बिल्कुल भी ऑर्गनाइज़्ड नहीं था। मानसी मानती हैं कि उनकी सर्विस आने के बाद उनके यूज़र्स, लॉजिस्टिक की चिंता किए बिना पूरी तरह से अपने बिज़नेस पर ध्यान दे सकते हैं।

गिफ्ट्स आइटम्स की डिलिवरी और अन्य वन-ऑफ़ डिलिवरी सर्विस के लिए कंपनी जीपीएस ट्रैकिंग और रिमोट टेंपरेचर मॉनिटरिंग की सुविधा देती है। मानसी बताती हैं कि बड़े ऑर्डर्स में, हर डिलिवरी को इलाके के आधार पर प्लान किया जाता है। मांसी, वन-ऑफ़ डिलिवरी सर्विस के लिए कैब सर्विस कंपनी ऊबर जैसा मॉडल बनाना चाहती हैं।

फ़िलहाल मानसी की कोर टीम में, रुजुता कुलकर्णी, आकाश कांबली और समता जगतप शामिल हैं। मांसी ने एमबीए की डिग्री ली है और टाटा ग्रुप जैसे बड़े कॉर्पोरेट प्लेयर्स के साथ काम करने का अच्छा अनुभव भी उनके पास है। मानसी के मैनेजमेंट स्किल्स का फ़ायदा, उनके बिज़नेस को भी मिल रहा है। मानसी की कोशिश रहती है कि जस्ट डिलिवरीज़ की सर्विसों को अधिक से अधिक किफ़ायती बनाया जा सके। कंपनी में अपनी भूमिका के बारे में जानकारी देते हुए मानसी ने बताया कि वह बिज़नेस को बढ़ाने और अधिक से अधिक बी टू बी क्लाइंट्स जुटाने के लिए फ़ंडिंग आदि मैनेज करने का काम करती हैं।

जस्ट डिलिवरीज़ की मार्केटिंग मैनेजर, रुजुता कुलकर्णी ने फार्मेसी स्ट्रीम से ग्रैजुएशन किया है और फ़िलहाल कंपनी में वह रिसर्च और मार्केटिंग का काम कर रही हैं। आकाश के पास ऑपरेशन मैनेजमेंट की जिम्मेदारी है और इसके अंतर्गत वह डिलिवरी शेड्यूल कराते हैं और डेटा ऐनालिसिस के माध्यम से हर डिलिवरी की कॉस्ट को कम के कम करने का प्रयास करते हैं। उनकी जिम्मेदारी है कि कंपनी की कार्यप्रणाली में ज़रूरी सुधार किए जाएं। अकाउंट मैनेजर समता ने अकाउंटिंग और फ़ाइनैंस में ग्रैजुएशन किया है और पेमेंट संबंधी मामलों का ख़्याल रखती हैं।

अपने टारगेट ऑडियंस के बारे में बात करते हुए मानसी कहती हैं कि उन्होंने 8-10 क्लाइंट्स के साथ शुरूआत की थी, जिनमें मुख्य रूप से बेकर्स और फ्लोरिस्ट्स शामिल थे। उन्होंने जानकारी दी कि फ़िलहाल उनकी कंपनी के पास 50 रेग्युलर क्लाइंट्स हैं, जिनमें 5-स्टार होटल, वेडिंग प्लानर्स और गिफ़्टिंग एक्सपर्ट्स आदि शामिल हैं। उन्होंने बताया कि बी टू बी स्पेस में उनकी कंपनी के पास 8-10 ऐंकर क्लाइंट्स हैं, जिनमें छोटे-बड़े रेस्तरां और उनकी चेन्स, फ्ऱोज़न फू़ड कंपनीज़ और पीत्ज़ा चेन्स शामिल हैं। जस्ट डिलिवरीज़ का 55-60 प्रतिशत रेवेन्यू नियमित और कॉन्ट्रैक्ट आधारित क्लाइंट्स से आता है। कंपनी ने 2015 में 1-1.5 लाख रुपए के रेवेन्यू से शुरूआत की थी और फ़िलहाल मासिक तौर पर 8-10 लाख रुपए का रेवेन्यू पैदा कर रही है।

मानसी ने अपनी पर्सनल सेविंग्स की मदद से 20 लाख रुपए के निवेश के साथ कंपनी की शुरूआत की थी। भविष्य की योजनाओं के बारे में बात करते हुए मानसी ने कहा कि उनकी कंपनी फ़िलहाल मुंबई के अंदर ही अपना नेटवर्क बढ़ाने और फ़्लीट नेटवर्क को मज़बूत करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने बताया कि जब उनके बिज़नेस का स्तर दोगुना हो जाएगा, तब वह ऊबर जैसे मॉडल पर काम करना शुरू करेंगी, जिसके अंतर्गत पूरे शहर में ग्राहकों की सुविधा के हिसाब से सामान की डिलिवरी की जाएगी।

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