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3 बातों को अमल में लाकर बढ़ सकते हैं आगे

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कोई भी व्यवसाय शुरू करते वक्त अक्सर हम इस मुगालते में रहते हैं कि जो मैं सोचता हूं, जैसे मैं सोचता हूं, वो कोई और नहीं सोच सकता। और यही मुगालता आगे चलकर नाकामी का सबब बन जाता है। ऐसे में स्टार्ट अप करने वाले किन बातों का रखें ध्यान, क्या वो हथियार हैं जिनके बूते अपने कंपटीटर्स को पछाड़ा जा सकता है, बता रहे हैं प्रदीप गोयल, जिन्होंने खुद स्टार्ट अप के लिए अपनी शानदार नौकरी छोड़ दी...

प्रदीप गोयल
प्रदीप गोयल

जब किसी के मन में कोई नया आइडिया आता है तो वो समझता है कि उसके सिवा दुनिया में कोई भी उस आइडिया के बारे में नहीं सोच रहा है। कम से कम मैं अपने पहले स्टार्टअप को शुरू करने से पहले तो यही सोचता था। मगर इस बात की हमेशा संभावना रहती है कि कहीं ना कहीं कोई बिल्कुल उसी आइडिया पर काम कर रहा होता है। हां, उसे मूर्त रूप देने के तरीकों में हो सकता है थोड़ा-बहुत फर्क हो।

कुछ लोग अपने बिजनेस आइडिया पर पूरे हफ्ते तक मंथन करते हैं तो कुछ सिर्फ वीकेंड में ही इसके बारे में सोचते हैं तो कुछ इसे लेकर ज्यादा गंभीर होते हैं और उस आइडिया पर महीनों तक काम करते हैं। और बहुत कम ऐसे होते हैं जो अपने बिजनेस आइडिया को मूर्त रूप देते हैं।

आखिर किसी स्टार्टअप के किस चरण में हमें प्रतिस्पर्धा का विश्लेषण शुरू कर देना चाहिए? क्या आप नहीं सोचते कि हमें इस विश्लेषण को प्लानिंग और एग्जिक्यूशन से पहले ही शुरू कर देना चाहिए?

मगर किसी और के बिजनेस के इंटरनल डिटेल को कैसे हासिल किया जाए? कठिन काम है, हैं ना?

हम अपने पहले स्टार्टअप के शुरूआती दिनों में कुछ गलतियां करते हैं मगर धीरे-धीरे हम बहुत ही आसानी से ये सीख जाते हैं कि प्रतिस्पर्धा का कैसे विश्लेषण किया जाय।

हम पाते हैं कि मार्केट में तीन तरह की प्रतिस्पर्धा है:

• उभरती कंपनियां

वो कंपनियां जो अभी शुरुआती स्टेज पर हैं और बिजनेस प्लान का खाका तैयार कर रही हैं उनके लिए स्टार्टअप के लिए एक सही टीम बनाना और फंड की व्यवस्था करना काफी अहम है। ऐसी कंपनियों से डरने की कोई जरूरत नही है।

• स्टार्टअप्स

ये वो कंपनियां हैं जो पहले इम्तिहान को पास कर चुकी होती हैं। ये अपना एक छोटा संस्करण जारी कर चुकी होती हैं और लगातार सीख रही होती हैं। उनके पास कुछ कस्टमर का बेस हो सकता है और यहां तक कि उन्हें अपने कुछ शानदार कामों का इनाम भी मिल चुका होगा।

ये कंपनियां ना सिर्फ प्रतिस्पर्धी हैं बल्कि वो मार्केट और प्रोडक्ट की जरूरतों को पूरा कर रही होती हैं। अगर दो चार स्टार्टअप एक ही डोमेन में काम कर रही हैं तो मार्केट में कुछ बड़ा करना बेहद जरूरी है। ई-कॉमर्स, ट्रेवल, प्रोडक्ट डिस्कवरी, डेटा एनालिटिक्स और मोबाइल कुछ शानदार मार्केट्स के उदाहरण हैं।

• बड़ी कंपनियां

ये एक बुरी ख़बर हो सकती है अग बड़े कॉर्पोरेट्स भी उसी तरह का या ठीक वही प्रोडक्ट बेच रहे हैं। बड़ी कंपनियों के पास पूंजी, मजबूत मार्केटिंग, दमदार पार्टनर्स और मीडिया हाउसेज के साथ नेटवर्किंग के साथ-साथ प्रोडक्ट डेवलपमेंट के लिए सही रिसोर्स के इस्तेमाल की बेहतर क्षमता होने की वजह से वो फायदे में रहती हैं।

बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा में तभी तक डर होता है जब तक कि हम ये नहीं समझ जाते कि आखिर कस्टमर क्या चाहता है, उसके लिए क्या महत्वपूर्ण है। एक छोटी सी चीज भी प्रतिस्पर्धा में आपकी ताकत हो सकती है।

उदाहरण के तौर पर, हाउसिंग.कॉम ने रियल एस्टेट क्षेत्र में जो किया उसे मैजिकब्रिक्स ने इग्नोर किया। ओला कैब ने टैक्सी बुकिंग में वो किया जिसे मेरू कैब्स ने इग्नोर किया।

मैं अब कंपटिशन एनलिसिस के बारे में शुरू कर रहा हूं जिसे मैंने अनुभव के जरिए सीखा।

पहला चरण- ऑनलाइन एनलसिस

• गूगल से शुरू करें

जैसा कि आप अनुमान लगा सकते हैं कि सर्चिंग के लिए सबसे आसाना रास्ता गूगल करना है। आप गूगल पर अलग-अलग की-वर्ड्स के साथ सर्च कीजिए। आप खुद को एक रियल कस्टमर के तौर पर रखकर सर्च कीजिए और उन कं की लिस्ट तैयार कीजिए जो आपकी खोज से जुड़े प्रोडक्ट या सोल्यूशंस उपलब्ध करा रही हैं।

हालांकि गूगल के पहले पेज पर बहुत सारी दमदार कंपनियां नहीं भी दिख सकती हैं। हो सकता है कि बेहतर की-वर्ड के अभाव की वजह से ऐसा हो या फिर कंपटिटर का फोकस SEO पर ना हो और वो ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए किसी दूसरे मजबूत चैनल का इस्तेमाल कर रहा हो।

• स्टार्टअप मीडिया प्लेटफॉर्म्स

मजबूत प्रतिस्पर्धियों की लिस्ट तैयार करने का दूसरा तरीका स्टार्टअप स्टोरी से जुड़े प्लेटफॉर्म्स हैं। भारतीय स्टार्टअप्स को योर स्टोरी, नेक्स्ट बिग व्हाट नियमित तौर पर कवर करते हैं। टेक क्रंच, मेशेबल और रीड राइट जैसे स्टार्टअप मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ग्लोबल स्टार्टअप्स से जुड़ी जानकारियां हासिल की जा सकती हैं। इनके जरिएय आप अपने डोमेन में कंपटिशन का स्तर और अपने कंपटिटर्स के बारे में जान सकते हैं।

• कंपटीटर की वेबसाइट पर इनबाउंड लिंक

इस लिस्ट का इस्तेमाल कंपटीशन के बारे में और ज्यादा जानकारी लेने में कीजिए। ओपन साइट एक्सप्लोरर जैसे टूल की मदद से कंपटीटर की वेबसाइट के इनबाउंड लिंक्स को जानना काफी आसान है। ज्यादा से ज्यादा जानकारी लेने की कोशिश कीजिए।

इससे आपको कुछ ही क्लिक में बहुत सारी अहम सूचनाएं हासिल होंगी जैसे कंपटीटर की हालिया मीडिया कवरेज, अवार्ड्स और कंपटीटर की वेबसाइट के दूसरे महत्वपूर्ण बैकलिंक्स। इन लिंक्स का भरपूर इस्तेमाल कीजिए।

दूसरा चरण- इनसाइडर इन्फॉर्मेशन

क्या आप सोच रहे हैं कि अब आपके पास कंपटीशन से जुड़ी पर्याप्त जानकारियां हो गई हैं। नहीं, बिल्कुल नहीं।

अब तक हमने सिर्फ ये जाना कि मार्केट में कितने कंपटीटर हैं और वो क्या कर रही हैं। मगर कंपटिटर से जुड़ी अंदरूनी जानकारियां जरूरी हैं।

• कंपटीटर के कर्मचारियों का इंटरव्यू

कंपटीटर के कर्मचारियों से इनसाइडर इनफॉर्मेशन हासिल करना अनएथिकल लग सकता है। मगर ये विश्वसनीय सूचना का एक अहम स्रोत है। अगर आपको ये पसंद नहीं है तो आप इसका इस्तेमाल न करें।

• इनवेस्टर प्रजेंटेशन तक पहुंच

स्टार्टअप्स अपने इनवेस्टर्स और कस्टमर्स से जुड़े अहम प्रजेंटेशन तैयार रखते हैं। कुछ प्रजेंटेशन SlideShare जैसे पब्लिक डोमेन में भी मिल सकते हैं। आपको ऐसे मैटेरियल ढूढ़ने में कुछ समय बिताना चाहिए।

बफर जैसी कंपनियां अपने इनवेस्टर पिच डेक को सार्वजनिक रखती हैं। इनवेस्टर प्रजेंटेशंस को PitchEnvy और Best Pich Deck पर भी तलाशा जा सकता है।

• प्रोडक्ट लॉगइन/ट्रेनिंग

कंपटिर के प्रोडक्ट को ट्राई कीजिए और उसके ट्रेनिंग मैटेरियल को समझने की कोशिश कीजिए। हमने अपने पिछले स्टार्टअप में SaaS बेस्ड B2B प्रोडक्ट बनाया था। हमने यू-ट्यूब ट्रेनिंग का इस्तेमाल किया जिसका काफी फायदा मिला।

तीसरा चरण- अपडेट रहिए

शुरुआती दो चरणों में हमें अपने कंपटीटर और उसके इंटरनल बिजनेस प्लान की पर्याप्त समझ आ जाती है। मगर सिर्फ इतना ही काफी नहीं है हमें हमेशा अपडेट रहना चाहिए।

• गूगल अलर्ट सेटिंग

ये अपने कंपटीटर्स और इंडस्ट्री के बारे में अलर्ट पाने का सबसे बेहतरीन तरीका है। गूगल की-वर्ड्स पर आधारित अलर्ट का विकल्प मुहैया कराता है।

• सोशल मीडिया

सोशल मीडिया, ब्लॉग और यू-ट्यूब चैनल पर अपने कंपटीटर को सब्सक्राइब करें। इस तरह से आपको उनके प्रोडक्ट अनाउंसमेंट, लेटेस्ट फीचर्स और दूसरी ख़बरों से जुड़ी जानकारी मिलती रहेगी।