परिवार के लिए अब्दुल कलाम, मोदी के लिए भारत के प्रतीक हैं अलवर के 'इमरान खान'

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कहते हैं वक्त चाहे जितना भी खराब हो, परिस्थितियां चाहें जैसी भी हों, अगर आपमें बुद्धिमता है, अलग करने की समझ है और आपमें सूझबूझ है तो तय है दुनिया एक दिन आपका लोहा मानेगी। सिर्फ लोहा ही नहीं मानेगी बल्कि देखते-देखते हर तरफ आपकी कामयाबी की चर्चा होने लगेगी। कुछ ऐसा ही हुआ राजस्थान के अलवर के इमरान खान के साथ। पेशे से प्राथमिक स्कूल में शिक्षक। लेकिन आज पूरी दुनिया उनके नाम का डंका बजा रही ही। इमरान ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी ख्याति सात समंदर पार सुनाई देगी।


शुक्रवार को ब्रिटेन के वेंब्ले स्टेडियम से जैसे ही भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने करीब 60 हजार लोगों से खचाखच भरे मैदान को संबोधित करते हुए कहा कि उनके सपनों का भारत इमरान खान जैसे निवासियों में बसता है बस उसी क्षण अलवर के इमरान प्रसिद्ध हो गए।

मेरे जैसे पत्रकार इमरान खान के बारे में समस्त जानकारी पाने के लिये गूगल पर उनका नाम टाइप करके खोज करने लगे। मैंने तुरंत उन्हें एक ईमेल भेजकर साक्षात्कार का अनुरोध करने के बाद सुबह-सवेरे ही उन्हें एक फोन किया।

जब उनसे यह पूछा कि एक सच्चे भारतीय के रूप में प्रधानमंत्री ने उनके नाम का उदाहरण दिया तो उस क्षण तक भी आश्चर्यचकित से लग रहे इमरान का सीधा सा सरल जवाब था, ‘‘अच्छा लगा।’’ इसके बाद बेचैनी भरी हंसी हंसते हुए वे आगे कहते हैं, ‘‘मैंने तो कभी ऐसा होने की उम्मीद ही नहीं थी।’’ वे आगे कहते हैं, ‘‘फिलहाल मेरे घर के बाहर कई सारे पत्रकार, मीडिया और टेलीविज़न चैनलों की वैनों ने डेरा डाल रखा है। मेरे माता-पिता अभी तक भी इसका कारण नहीं समझ पा रहे हैं। उनके बेटे ने आखिरकार ऐसा क्या कर दिया।’’

इमरान खान क्या करते हैं?

34 वर्षीय इमरान राजस्थान के अलवर के सरकारी संस्कृत कठूमर विद्यालय में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2012 में अलवर के जिलाधिकारी आशुतोष पाडनेकर ने सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्नों का जवाब देने वाली उनकी वेबसाइट देखी और वे उससे काफी प्रभावित हुए। इमरान बताते हैं, ‘‘उन्होंने मुझे एप्प तैयार करने की दिशा में हाथ आजमाने की सलाह दी। उस समय तक मुझे यही नहीं पता था कि एप्प क्या बला है। मेरे पास उस समय तक एक सामान्य सा मोबाइल फोन था और तब उन्होंने मुझे पहली बार अपने स्मार्टफोन पर कुछ एप्प ये रूबरू करवाया।’’

और यह फर्श से अर्श की उनकी प्रसिद्धि के सफर का प्रारंभ था।

इमरान ने एप्प तैयार करने के बारे में सीखना प्रारंभ किया और इस क्रम में उन्होंने किताबें पढ़ने से लेकर आॅनलाइन सर्च करना प्रारंभ किया। जैसा कि उनके छोटे भाई इदरीस ने बताया, ‘‘उन्होंने कंप्यूटर साईंस से संबंधित मेरी किताबों का सहारा लिया।’’ वर्ष 2012 में उन्होंने एनसीईआरटी के लिये एक साईंस एप्प का निर्माण किया और उसके बाद से उन्होंने मुड़कर पीछे नहीं देखा है। वे आगे कहते हैं, ‘‘उसके बाद से मैं भूगोल, इतिहास और गणित जैसे विषयों से संबंधित एप्प का विकास कर चुका हूँ। इसके अलावा मैं प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के बच्चों के लिये विज्ञान और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे बच्चों के लिये भी एप्प विकसित कर चुका हूँ।’’

इस वर्ष उन्हें अपनी विकसित की हुई विभिन्न एप्स के प्रदर्शन के लिये मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी द्वारा भी आमंत्रित किया गया। वे गर्व के साथ कहते हैं, ‘‘मैंने अपने तमाम एप्स को देश के काम के लिये दान कर दिया है।’’ उनका यह कदम छात्रों और अभिभावको को आॅनलाइन शिक्षण सामग्री का उपयोग करने में सक्षम बनाने के लिये प्रारंभ किये गए डिजिटल इंडिया पहल का एक हिस्सा है।

एक शिक्षक जो वैज्ञानिक बनना चाहता था

इमरान ने उस समय सिर्फ अपनी उच्चतर माध्यमिक की परीक्षा ही उत्तीर्ण की थी जब उन्हें शिक्षण के क्षेत्र में उतरना पड़ा।

अपने अतीत को याद करते हुए वे कहते हैं, ‘‘मैं प्रारंभ से ही गणित और विज्ञान के विषयों में बहुत अच्छा था लेकिन पिता जा एक किसान थे इनका मूल्य समझने में असमर्थ थे। ऐसे में हर किसी ने मुझे जल्द से जल्द सरकारी नौकरी तलाशने की सलाह दी।’’ आगे जाकर इमरान एक निजी काॅलेज से अंग्रेजी और अर्थशास्त्र में एमए करने में सफल रहे।

एक बालक के रूप में राजस्थान के सरिस्का टाइगर रिजर्व की सीमा से लगे गांव खरेडा में पलने-बढ़ने वाले इमरान प्रारंभ से ही उस माहौल के नहीं बने थे। यहां तक कि घर से स्कूल की 10 किलोमीटर की दूरी भी कभी उन्हें भारी नहीं लगी। इसके उलट विज्ञान के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में समर्थन की कमी वह चीज थी जो उन्हें सताती थी। वे कहते हैं, ‘‘मैं एक वैज्ञानिक बनना चाहता था। मैं गणित और विज्ञान को लेकर काफी जज्बाती था। लेकिन मेरे सामने इन दो विषयों को लेकर आगे बढ़ने की दिशा में कैसा भी समर्थन और प्रोत्साहन बिल्कुल भी नहीं था। हमारे देश में प्रत्येक व्यक्ति सिर्फ एक नौकरी पाने को महत्ता देता है और ऐसे में अगर आपको सरकारी नौकरी मिल जाए तो फिर सोने पर सुहागा।’’

इमरान के छोटे भाई 25 वर्षीय इदरीस कहते हैं, ‘‘वे हमारे परिवार के अब्दुल कलाम हैं।’’ एक साॅफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत इदरीस कहते हैं कि आज वे जिस भी मुकाम पर हैं उसपर अपने बड़े भाई की ही वजह से हैं।

‘‘वे मेरे आदर्श हैं। हम सब यही चाहते हैं कि एक दिन हम भी उनकी तरह अपने परिवार और अपने देश का नाम रोशन करें।’’

इमरान चार भाईयों और तीन बहनों में तीसरे नंबर पर आते हैं।

इमरान की एप्प की दुनिया

इमरान अबतक गूगल प्ले स्टोर पर ‘gktalk_Imran’ के नाम से 53 एप्लीकेशन सूचीबद्ध करवा चुके हैं। उनकी सबसे अधिक लोकप्रिय एप्लीकेशन हिंदी में ‘जनरल साईंस’ है जिसे अबतक 5 लाख से अधिक डाउनलोड मिल चुके हैं। यह एक ऐसी एप्लीकेशन है जो बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी के भी काम करती है और फिलहाल यह हिंदी में जीवन विज्ञान से संबंधित 300 सवालों और जवाबों से लैस है। इस एप्प के बारे में प्लेस्टोर पर दिया गया विवरण दर्शाता है, ‘‘इस एप्लीकेशन की मदद से आप विज्ञान से संबंधित बुनियादी सवालों केा आसानी से समझ सकते हैं। यह छात्रों के लिये उपयोगी होने के अलावा आईबीपीएस, आईएएस, राज्य पीएससी, एसएससी और अन्य सरकारी परीक्षा देने वालों के लिये भी काफी मददगार है। इसके अलावा यह उनके लिये भी काफी उपयोगी है जो विभिन्न सरकारी नौकरियों की तलाश में हैं या फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियां कर रही हैं।’’

इसके अलावा 1 लाख से भी अधिक डाउनलोड के आंकड़े को पार करने वाली इतिहास जीके, हिंदी व्याकरण, भूगोल, हिंदी में सामान्य ज्ञान, भारतीय राजनीतिक सामान्य ज्ञान और वर्ष 2012 में सामने आने वाली उनकी पहली ‘‘एनसीईआरटी साइंस इन हिंदी’’ एप्प है। उनकी अधिकतर एप्लीकेशन को उपयोगकर्ताओं द्वारा अनुकूल टिप्पणिया मिली हैं जिनमें उन्होंने सामग्री के स्तर, सरल डिजाइन और यूजर इंटरफेस को काफी पसंद किया है।

इन सब एप्लीकेशनों के अलावा इमरान के नाम अबतक भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, सौर प्रणाली, निबंध लेखन, विलोम और समानार्थी शब्द, कंप्यूटर फंडामेंटल्स, मानव शरीर प्रणाली, मुगल साम्राज्य सहित विविध श्रेणियों में एप्लीकेशन भी तैयार कर चुके हैं।

लगन और दृढ़ता

घर के बाहर उनसे मिलने के लिये बेताब और अधीर मीडिया के जमावड़े के बावजूद इमरान हमारे एक और सवाल का जवाब देने का धैर्य दिखाते हैं और जवाब में कहते हैं कि आज के युवा को धैर्यवान होने के साथ-साथ दृढ़ रहना भी सीखना होगा

वे कहते हैं, ‘‘आप जिस भी काम के प्रति जज्बाती हों उसे पूरी ईमानदारी के करने का प्रयास करें चाहे आपको उससे परिणाम तत्काल ही न मिलें। लंबी दूरी को दौड़ में इन सब बातों की काफी महत्ता होती है।’’

वेबसाइट

इस लेख को मूलत: अंग्रेजी में दीप्ति नायर ने लिखा है और उसका भावानुवाद किया है निशांत गोयल ने।

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