'Indianblooddonors', ज़रूरत का साथी...ब्लड दिलाए, साथ निभाए, जीवन बचाए

“पोचा दंपति को इससे कोई आर्थिक लाभ नहीं होता मगर ऐसे नेक काम को शुरू करने और लगातार उसमें लगे रहने से प्राप्त होने वाला संतोष अमूल्य है।”

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अच्छे कर्म अर्जित करने के उद्देश्य से एक दंपति द्वारा शुरू की गई पहल पिछले 13 सालों से अनेक लोगों की ज़िंदगी बचाने का काम कर रही है। दो वेबसाइटें लॉंच करके वे इसे अंजाम देने का उपाय कर रहे हैं। इन वेबसाइटों के नाम Indianblooddonors.com और Plateletdonors.org हैं और वे ज़रूरतमंद लोगों को रक्तदान करने वालों के पते-ठिकाने मुहैया कराती हैं, जिससे मरीज और उनके रिश्तेदार बड़ी आसानी से रक्तदाताओं से संपर्क कर पाते हैं। पति और पत्नी के नाम क्रमशः खुसरो पोचा और फर्मिन पोचा हैं और उनकी और उनकी वैबसाइटों की मदद से तुरंत रक्त चाहने वाले अनेकानेक ज़रूरतमन्द लोग समय पर रक्त पाकर लाभान्वित हो चुके हैं। खुसरो पोचा भारतीय रेल के कर्मचारी हैं और फर्मिन जे एन टाटा पारसी बालिका उच्चतर स्कूल में नौकरी करती हैं। नागपुर के रहने वाले इस दंपति ने सन 1999 में Indianblooddonors और सन 2012 में Plateletdonors को लॉंच किया था।

पोचा दंपति के जीवन में लगातार घटने वाली घटनाओं के बाद उनके मन में इन वेबसाइटों को लॉंच करने का विचार आया, जिनके द्वारा वे रक्त के जरूरतमंदों को लक्ष्य करते हैं, जिससे घायल या बीमार लोगों के जीवन बचाए जा सकें। सन 1994 के सितंबर माह में खुसरो पोचा की दादी गिर पड़ी थीं और फिर कोमा में चली गईं। उन्हें इन्दिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, नागपुर में भर्ती कराया गया। एक दिन तड़के लगभग साढ़े तीन बजे महिला वार्ड में अचानक शोरगुल और हंगामा शुरू हो गया। एक मरीज के रिश्तेदार वार्ड में रात की ड्यूटी कर रहे एक डॉक्टर की पिटाई कर रहे थे। पूछने पर एक रिश्तेदार ने खुसरो से दुखी स्वर में कहा, ‘इस डॉक्टर ने मेरी पत्नी की जान ले ली।’ तब उन्होंने डॉक्टर से पूछा कि क्या हुआ। डॉक्टर ने बताया कि महिला का हीमोग्लोबिन बहुत कम था और मैंने उसके रिश्तेदारों से दो यूनिट रक्त लाने के लिए कहा था। ‘लेकिन वे किसी रक्तदाता का इंतज़ाम नहीं कर सके और इसलिए मरीज को रक्त नहीं दिया जा सका और दिल का दौरा पड़ने से उसकी मौत हो गई। इस घटना ने मेरे मन पर गहरा असर डाला,’ खुसरो बताते हैं।

फिर 1999 में ऐसी ही एक और घटना में वे एक मरीज के रिश्तेदार की मदद कर रहे थे, जिसे O-ve रक्त की ज़रूरत थी और उन्हें पता चला कि नागपुर के किसी भी रक्त बैंक में वह रक्त उपलब्ध नहीं है। दो दिन मौत से संघर्ष करने के बाद आखिर मरीज रक्त न मिल पाने के कारण चल बसा, जबकि उसके हताश रिश्तेदार नागपुर भर में उस ब्लड-ग्रुप वाले रक्तदाता को खोजने में दिन-रात खून-पसीना एक करते रहे। ‘इस घटना ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया कि उन मरीज़ों का क्या हाल होता होगा, जो अपनी बीमारी के इलाज के लिए शहर-दर-शहर भटकते रहते हैं और जहाँ मदद के लिए उनका कोई परिचित भी नहीं होता। कैंसर के मरीज़ों के साथ क्या होता होगा, जिन्हें रक्त-आधान (ब्लड-ट्रान्स्फ्यूजन) के लिए काफी मात्रा में रक्त की ज़रूरत होती है? और उन बच्चों का क्या होता होगा, जो सिकल सेल और थेलेसेमिया से ग्रस्त होते हैं और जिन्हें हर माह बार-बार रक्त-आधान की ज़रूरत पड़ती है?’ खुसरो याद करते हुए कहते हैं।

उन्होंने अपनी पत्नी से इस समस्या पर चर्चा की और दोनों इस बात पर सहमत हुए कि इस विषय में अवश्य ही कुछ किया जाना चाहिए। वे इस समस्या का कोई ठोस हल निकालना चाहते थे। लेकिन उनके सामने यह स्पष्ट नहीं था कि यह कैसे किया जा सकता है। यह वही समय था जब ‘डॉटकॉम’ की गूँज हर जगह सुनाई देने लगी थी। 'रोज़ कोई न कोई अपनी निजी वेबसाइट लांच कर रहा था। मैंने अपने चचेरे भाइयों को कनाडा संदेश भेजने के लिए अभी इंटरनेट का इस्तेमाल शुरू ही किया था। उन दिनों नेट उपयोग करने का खर्च सौ रुपए प्रति घंटा था, वह भी साइबर कैफे जाकर,' खुसरो याद करते हुए बताते हैं। एक दिन मेल चेक करते हुए खुसरो को ख़याल आया कि वे खुद भी ऐसा ही प्लेटफॉर्म तैयार कर सकते हैं और फिर इंटरनेट की शक्ति का उपयोग मरीजों और रक्तदाताओं के बीच संपर्क स्थापित कराने में कर सकते हैं। यह उनके लिए यूरेका पल था और उन्होंने उसी वक़्त निर्णय किया कि वे भी अपनी एक वेबसाइट बनाएँगे, जो मरीजों और रक्तदाताओं के बीच संपर्क सूत्र का काम करेगी।

पोचा परिवार को अपनी जीवन भर की कमाई को खुरच-खुरचकर निकालना पड़ा तब जाकर इतनी पूंजी इकठ्ठा हो सकी कि अपनी वेबसाइट शुरू की जा सके और उससे जुड़ी सेवाएँ लोगों तक पहुँचाई जा सके। अतीत पर नज़र दौड़ाते हुए खुसरो कहते हैं, 'हमें वेबसाइट तैयार करने का क ख ग भी नहीं पता था और न ही यह पता था कि उस पर कितनी मशक्कत करनी पड़ती है। कुछ पत्रिकाएँ पढ़कर मैंने थोड़ी-बहुत खोज की और फिर मैंने अपने भाई के एक मित्र से संपर्क किया, जो एक सूचना प्रद्योगिकी कंपनी में कार्यरत था। क्योंकि वेबसाइट एक अच्छे काम के लिए तैयार की जानी थी, उसने हमें अपने शुल्क में 15000 रुपयों की छूट दी। फिर, हमें एक डोमेन भी आरक्षित (book) करवाना था, जिसका शुल्क क्रेडिट कार्ड के ज़रिए अदा किया जाना था। मेरे पास क्रेडिट कार्ड नहीं था सो मैंने अपनी चचेरी बहन से डोमेन आरक्षित (book) करने का निवेदन किया और इस तरह वह 27 अक्टूबर 1999 के दिन पंजीकृत हो गया।' फिर उन्हें एक मेज़बान (host) की ज़रूरत थी, जहाँ उनकी वेबसाइट रखी जा सके और तब उन्होंने मुझसे संपर्क किया और मुझसे कहा कि मैं साइट को www.interland.com पर होस्ट कर दूँ। उनकी आर्थिक स्थिति उन्हें सिर्फ तीन माह के लिए SQL सर्वर सहित 250 MB वाला प्लान लेने की ही इजाज़त देती थी, जिसकी कीमत 10000 रुपए थी। जो सबसे महत्वपूर्ण अंतिम चरण था, वह यह था कि उन्हें तुरंत कंप्यूटर खरीदने की जरूरत थी, जिससे वे घर बैठे अपनी साइट पर निगरानी रख सकें और संदेशों का जवाब दे सकें। वे कोई सेकंड हैंड कंप्यूटर तलाश रहे थे, जो आखिर उन्हें 12500 रुपए में मिल गया और जनवरी 2000 में अंततः वैबसाइट लॉंच के लिए तैयार हो गई। विज्ञापन व्यवसाय में लगे एक और मित्र ने उनका लोगो बना दिया, एक पोस्टर भी तैयार कर दिया और लॉंच के अवसर पर एक विज्ञापन भी प्रसारण हेतु जारी करवा दिया। सौभाग्य से, आज उनकी वेबसाइट को भारत में तीन कंपनियों का सहयोग मिला हुआ है- Net4India उनकी होस्टिंग को प्रायोजित कर रही है, Awaaz.de ने उन्हें मुफ्त आईवीआरएस लाइन 07961907766 (IVRS line 07961907766) मुहैया कारवाई है और एस एम एस हेल्पलाइन को Innoz.in की मदद हासिल है।

मरीज़ नीचे दिए जा रहे पाँच तरीकों से रक्तदाताओं से संपर्क कर सकते हैं।

  1. गूगल प्ले के ज़रिए Indian Blood Donors (इंडियन ब्लड डोनर्स या भारतीय रक्तदाता) नामक Android App (एंड्रॉइड एप्लिकेशन) डाउनलोड कर लीजिए। यहाँ मरीज़ या उनके रिश्तेदार उनके इलाके या उनके शहर के रक्तदाताओं से संपर्क कर सकते हैं।
  2. आई व्ही आर एस हेल्पलाइन (IVRS हेल्पलाइन)-07961907766 पर फोन कीजिए। यह हिन्दी और अंग्रेज़ी दो भाषाओं में उपलब्ध है और विशेष रूप से सामान्य जन के लिए बनाई गई है, जिनके पास इंटरनेट नहीं है या जो नहीं जानते की SMS सेवाओं का उपयोग कैसे किया जाता है।
  3. SMS BLOOD to 55444 (यह सेवा एयरटेल, एयरसेल, वोडाफोन, टाटा डोकोमो पर उपलब्ध है)। आइडिया उपभोक्ता SMS BLOOD to 55577 का उपयोग करें।
  4. अपने शहर में रक्तदाताओं की खोज करने के लिए 9665500000 पर SMS करें: DONOR (Std Code) (Blood Group)
  5. अपने इलाके में रक्तदाताओं की खोज करने के लिए 9665500000 SMS करें: DONOR PIN (Six Digit Postal Pin Code) (Blood Group)

देश भर में हजारों स्वयंसेवकों ने इस वेबसाइट के पोस्टर डाउनलोड करके उन्हें अस्पतालों में प्रदर्शित किया है, जिससे जरूरतमंदों को इस सुविधा का पता चल सके और यह स्पष्ट प्रमाण है कि इन वेबसाइटों ने देश भर में अपना असर दिखाया है। हालांकि पोचा दंपति को इससे कोई आर्थिक लाभ नहीं होता मगर ऐसे नेक काम को शुरू करने और लगातार उसमें लगे रहने से प्राप्त होने वाला संतोष अमूल्य है। अगले पाँच सालों में पोचा दंपति एक और मोबाइल एप शुरू करने जा रहे हैं, जो रक्तदाता मित्रों को आपस में जोड़ने में उनकी सहायता करेगी।