छोटे शहरों, कस्बों में युवाओं के करियर की दुविधा को सुलझा रहा है ये स्टार्टअप

एक ऐसा स्टार्टअप जिसकी मदद से आप सुलझा सकते हैं करियर में आने वाली परेशानियां...

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बी-टियर टाउन, कस्बों, गांवों के युवाओं की करियर  संबंधी समस्याओं को सुलझा रहा है स्पीकआउट सॉल्यूशन

स्पीकआउट के एक सेशन में युवतियां
स्पीकआउट के एक सेशन में युवतियां
स्पीकआउट सॉल्यूशन, दिल्ली के दो युवा भाई-बहन रोहन मिश्रा और ईशा मिश्रा की एक पहल है जिन्होंने अपने पिता के सम्मान में लोगों के करियर संबंधी दिक्कतों को सुलझाने के लिए ये स्टार्टअप शुरू किया है।

टीम के मेंबर्स सेमिनारों और टॉक शो के द्वारा अलग शहरों में जाकर लोगों से जुड़ते हैं, कॉलेज के बच्चों की काउंसलिंग करते हैं।

सोशल मीडिया पर एक वो फोटो जरूर विचरती हुई देखी होगी आपने जिसमें रेल की खूब सारी पटरियां होती हैं आपस में उलझी हुई और उस पर कैप्शन लिखा होता है कि बारहवीं क्लास के बाद स्टूडेंट्स का हाल। बहुत ही सटीक चित्रण है ये स्कूल खत्म किए हुए बच्चों का। उनके पास आगे पढ़ने के लिए, कुछ करने के लिए ढेरों रास्ते होते हैं लेकिन सही मार्गदर्शन के अभाव में उनको समझ ही नहीं आता कि कौन सी राह पकड़नी है, कौन सी स्ट्रीम उनके लिए सही है। क्या आगे पढ़ाई करनी भी चाहिए या फिर अपना मनपसंद काम शुरू कर देना चाहिए।

क्या अगर साइंस लिया था इंटरमीडिएट में तो ग्रैजुएशन में आर्ट्स सब्जेक्ट लेना सही होगा या नहीं, क्योंकि रिश्तेदार तो कह रहे थे कि बढ़िया बीएससी कर लो फिर एमएससी और उसके बाद पीएचडी, लाइफ सेट है। लेकिन वो युवा क्या चाहता है, उसकी क्या पसंद है, क्या समझ है, वो जानना सबसे ज्यादा जरूरी है। इसी जरूरी फैक्टर के बारे में लोगों को जागरूक कर रहा है स्पीकआउट सॉल्यूशन

ईशा (बीच में) के साथ रोहन
ईशा (बीच में) के साथ रोहन

स्पीकआउट सॉल्यूशन, दिल्ली के दो युवा भाई-बहन रोहन मिश्रा और ईशा मिश्रा की एक पहल है जिन्होंने अपने पिता के सम्मान में लोगों के करियर संबंधी दिक्कतों को सुलझाने के लिए ये स्टार्टअप शुरू किया है। रोहन ने योरस्टोरी से बातचीत में कहा कि ऐसा कोई जरूरी नहीं है कि हर कोई पढ़-लिखकर ही अपना करियर बनाए। किसी को अगर 12वीं के बाद वोकेशनल कोर्स करके नौकरी करनी है तो क्या हर्ज है। जिसको एकेडेमिक्स में करियर बनाना है वो उसमें बनाए और जिसको पढ़ने में रुचि नहीं है वो अपने मर्जी का काम करे। 

बेवजह के सोशल टैबू और असफल होने के डर से क्यों लीक पीटने वाला ही काम किया जाए। अधिकतर देखा गया है कि घरवालों के दबाव और कम जागरूकता होने की वजह से लोग गलत करियर चुन लेते हैं और फिर बाद में बोलते हैं कि जिंदगी बोर हो रही है। सबसे ज्यादा सलाह की जरूरत है बी-टियर टाउन, कस्बों, गांवों के युवाओं को। वहां बड़े लिमिटेड ऑप्शन हो रखे हैं।

नीले स्वेटर में स्पीकआउट सॉल्यूशन के सदस्य मोहनीश
नीले स्वेटर में स्पीकआउट सॉल्यूशन के सदस्य मोहनीश

स्पीकआउट सॉल्यूशंस के पास आप नौकरियों या शिक्षा के बारे में जीवन में भ्रम को सुलझाने के लिए यहां आप सीधे बात कर सकते हैं। टीम के मेंबर्स सेमिनारों और टॉक शो के द्वारा अलग शहरों में जाकर लोगों से जुड़ते हैं, कॉलेज के बच्चों की काउंसलिंग करते हैं। जहां पर छात्र खुलकर बोल सकते हैं और अपने विकल्पों के बारे में अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं। इसकी वेबसाइट पर जाकर किसी भी प्रकार की क्वेरी कर सकते हैं। स्पीकआउट के एक्सपर्ट्स आपके सवाल का समुचित जवाब देने की कोशिश करेंगे।

रोहन बताते हैं कि छात्र हमारे भविष्य और समाज के लिए संपत्ति हैं, मुझे विश्वास है कि हमें उनसे मित्रतापूर्ण व्यवहार रखना चाहिए ताकि आगे बढ़ने के लिए वो एक स्वस्थ वातावरण के साथ आगे बढ़ सकें। मेरा व्यक्तिगत अनुभव यह है कि बुनियादी शिक्षा पाने के बाद, मार्गदर्शन और परामर्श की कमी के कारण छात्र अपने करियर में गलत राहें चुनते हैं। जल्दबाजी और पेशेवर पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके करियर के गलत विकल्पों उनके लिए नौकरी में संघर्ष के कारण बन जाते हैं।

यूट्यूब के एक वीडियों में स्पीकआउट सदस्य मीनू और रोहन
यूट्यूब के एक वीडियों में स्पीकआउट सदस्य मीनू और रोहन

इसलिए स्पीकआउट सॉल्यूशन आने वाले समय में अलग राज्यों के शहरों में इस तरह के काउंसलिंग सेशन, एक्सपर्ट टॉक्स और सेमिनार आयोजित करवाएगा ताकि कोई भी छात्र/छात्रा मार्गदर्शन की कमी की वजह से करियर छोड़े न या फिर गलत विकल्प का चुनाव न करें। साथ ही वो अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में नया काम शुरू करने वाले आंत्रप्रेन्योर युवाओं से भी अपने दर्शकों को रूबरू कराते रहते हैं जिससे कि लोगों को नए-नए करियर ऑप्शन्स के बारे में पता चलता रहे।

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IIMC दिल्ली से पत्रकारिता की एबीसीडी सीखी। नेटवर्क-18 और इंडिया टुडे के लिए दो साल तक काम किया। घूमने का जुनून है। इस जुनून को chalatmusaafir.in पर देखा जा सकता है। देश के कोने-कोने में जाकर वहां की विरासत और खासियत को सामने लाने का सपना है।

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