पिता की मौत के बाद बेटी ने मां के लिए खोजा प्यार और करवाई शादी

पुराने रिवाज़ों को तोड़ते हुए जब बेटी ने अपनी माँ के बारे में सोचा माँ बन कर...

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 25 वर्षीय संहिता ने तकरीबन दो साल पहले हार्ट अटैक में अपने पिता को खो दिया था। 52 वर्षीय पिता की मौत के बाद से उन पर एक पहाड़-सा टूट पड़ा था... 

अपनी मां और उनके नए जीवनसाथी कृष्ण के साथ संहिता (बीच में)
अपनी मां और उनके नए जीवनसाथी कृष्ण के साथ संहिता (बीच में)
पिता की मृत्यु के बाद संहिता ने महसूस किया, कि उनकी मां की जिंदगी में जो खालीपन आ गया है उसे किसी जीवनसाथी के अलावा और कोई नहीं भर सकता है और इसके बाद संहिता ने अपनी मां को फिर से किसी दूसरे जीवनसाथी से मिलाने के बारे में सोचा। 

संहिता ने अपनी मां के लिए एक प्रतिष्ठित मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाई और उनका नंबर भी डाल दिया। लेकिन जब उन्होंने अपनी मां से इस के बारे में बताया तो वे चौंक गईं। 

समाज ने हम पर इतने तरह के बंधन लाद दिए हैं कि उनसे हटकर सोचना गुनाह लगता है। प्यार एक ऐसा ही मसला है जिसके बारे में लोग मां-बाप के सामने बात करने से भी झिझकते हैं या फिर बचते हैं। लेकिन एक बेटी ने तो किसी की परवाह न करते हुए अपने पिता के देहांत के बाद अकेली मां के लिए न केवल प्यार खोजा बल्कि उनकी शादी भी करवा दी। उस बेटी का नाम संहिता अग्रवाल है। 25 वर्षीय संहिता ने तकरीबन दो साल पहले एक हार्ट अटैक में अपने पिता को खो दिया था। 52 वर्षीय पिता की मौत के बाद से उनपर एक पहाड़ सा टूट पड़ा था। उनकी मां और बहन बेसुध सी हो गईं और जिंदगी जीना काफी मुश्किल सा हो गया था।

उन्होंने बताया, 'पापा का चले जाना हम सबके लिए दुखद था। किसी को अंदाजा नहीं था कि वे इतनी जल्दी हमें छोड़कर चले जाएंगे। हम घर में उनकी यादों में ही खोए रहते थे। वे जहां भी बैठते थे, खाते थे रहते थे, हम उन्हें मिस किया करते थे।' संहिता ने बताया कि ऐसा करते-करते छह महीने बीत गए। वे ऑफिस से घर आतीं तो घर की सीढ़ियों पर मां को बैठकर रोते देखती थीं। वे पिता की यादों से बाहर ही नहीं निकल पा रही थीं। वे चीखती थीं और भगवान की मूर्ति के सामने चिल्लाकर कहती थीं कि उन्होंने उनके पति को क्यों छीन लिया। इतना ही नहीं वे रात को अचानक उठ जाती थीं और पूछने लगती थीं, 'कहां हैं पापा?'

कुछ महीने बीतने के बाद संहिता को गुड़गांव में जॉब मिल गई। उन्हें इससे काफी दुख हुआ कि अब वे अपनी मां का ख्याल नहीं रख पाएंगी। लेकिन अब वे हर वीकेंड पर अपनी मां के पास जयपुर जाती थीं। गुड़गांव में रहने के दौरान संहिता को अहसास हुआ कि उनकी मां ने उनके लिए कितना संघर्ष किया है। उन्हें लगा कि मां की जिंदगी में जो खालीपन आ गया है उसे किसी जीवनसाथी के अलावा और कोई नहीं भर सकता है। इसके बाद संहिता ने अपनी मां को फिर से कोई दूसरा जीवनसाथी से मिलाने के बारे में सोचा। संहिता जानती थीं कि किसी भी बच्चे के लिए अपने मां या बाप के लिए ऐसा सोचना काफी मुश्किल काम है, लेकिन वे अब और अपनी मां को दुख में नहीं देखना चाहती थीं।

कृष्ण और गीता
कृष्ण और गीता

संहिता ने बताया, 'मैं किसी ऐसे को ढूंढ़ना चाहती थी जो लगभग उन्हीं की उम्र का हो समझदारी का स्तर भी समान हो। और वो इंसान भी अपने साथी को खो चुका हो और उसकी जगह को भरने के लिए एक दोस्त चाहता हो। मैं ऐसा पार्टनर खोजना चाहती थी जिससे मां अपनी ज़िन्दगी बांट सकें और जिसके साथ वो चाय पीते हुए बातें कर सकें।' संचिता ने अपनी मां के लिए एक प्रतिष्ठित मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर प्रोफाइल बनाई और उनका नंबर भी डाल दिया। लेकिन जब उन्होंने अपनी मां से इस के बारे में बताया तो वे चौंक गईं। उन्हें ये सही नहीं लगा। उन्होंने कहा कि वे अकेले रह लेंगी लेकिन ऐसा नहीं करेंगी। दरअसल वे डरती थीं कि 50 की उम्र में दोबारा शादी करने पर समाज के लोग क्या कहेंगे।

लेकिन संहिता ने अपनी मां को किसी तरह मनाया और कहा कि वे उस समाज की परवाह क्यों करती हैं जो उनके दुख को समझ ही नहीं सकता। उन्होंने अपनी मां से कहा कि हर इंसान को बिना किसी सामाजिक दाबाव के अपनी जिंदगी जीने का हक है। क्योंकि जब आप 60-70 की उम्र में पहुंचेंगे तो समाज आपकी देखभाल करने नहीं आएगा। आपको फिर अपनी जिंदगी अकेले ही बितानी होगी। हर किसी को अपनी जिंदगी को एक दूसरा मौका तो देना ही चाहिए। उन्होंने मां से कहा कि पापा के चले जाने में उनकी कोई गलती नहीं थी। इसलिए वे इसकी सजा खुद को न दें।

संहिता अपनी बहन और मां के साथ
संहिता अपनी बहन और मां के साथ

इन सब बातों से उनकी मां मान गईं और 2017 अक्टूबर में बांसवाड़ा के एक 55 साल के रेवेन्यू इंस्पेक्टर कृष्ण गोपाल गुप्ता से उनकी मुलाकात हुई। कृष्ण भी अपनी पत्नी को खो चुके थे। 2010 में कैंसर की वजह से उनकी पत्नी जा चुकी थीं और उनके दो बेटे भी हैं। इसी दौरान संहिता की मां की तबीयत खराब हुई और सर्जरी की नौबत आ गई। संहिता ने कृष्ण से कहा कि सर्जरी की वजह से वे मीटिंग को टाल दें। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और सीधे उनकी मां से मिलने जयपुर अस्पताल आ गए। वे वहां तीन दिनों तक रहे। उन्होंने संहिता की मां से कहा कि इस हालत में अगर वे उनके साथ नहीं रहेंगे तो उनके साथ रहने का मतलब क्या है?

ऐसा प्यार और अपनापन देखकर गीता का दिल पिघल गया। उन्होंने 3 दिसंबर 2017 को आर्य समाज के रीति रिवाजों के अनुसार शादी कर ली। हालांकि यह एक छोटा सा ही समारोह था, लेकिन दोनों परिवारों की तरफ से लगभग 400 लोग गीता और कृष्ण को नई जिंदगी के लिए आशीर्वाद देने के लिए इकट्ठा हुए थे। संहिता याद करते हुए बताती हैं कि पापा के चले जाने के बाद उनकी मां अगर बिंदी भी पहनती थीं तो आसपास के लोग तरह तरह की बातें करते थे। इससे आहत होकर उनकी मां ने रंगीन कपड़े और गहने ही पहनना छोड़ दिया था। लेकिन अब उनकी जिंदगी में फिर से उजाला हो गया और इसका पूरा श्रेय संहिता को जाता है।

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