गिरीश रेड्डी का कमाल का प्रयास, बचाए पेड़, बांटी पुस्तकें

- वृक्ष बचाओ, प्रदूषण घटाओ है मकसद।- गिरीश रेड्डी 'यूज्ड टू यूज़फुल ' के माध्यम से लोगों को कर रहे हैं जागरूक।- भारत में मात्र 26 प्रतिशत ही पेपर रीसाइकल हो रहा है। - भारत हर साल 13 मिलियन टन पेपर का उत्पादन और 4.6 मिलियन टन पेपर आयात करता है।- पेपर के बदले किताबें बांटते हैं गिरीश। - स्कूलों में जाकर बच्चों को कर रहे हैं जागरूक।

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आज विश्व कई वैश्विक परेशानियों से जूझ रहा है, जो सभी के लिए परेशानी का सबब बन चुकी हैं। हर देश अपनी-अपनी ओर से इनसे निबटने के प्रयासों में भी लगा हुआ है। सरकारी स्तर पर भी कई तरह के प्रयास जारी हैं तो कई गैरसरकारी संगठन भी प्रयास कर रहे हैं। लोगों को जागरूक कर रहे हैं, ताकि लोगों को भी अपनी जिम्मेदारियों का अहसास हो। वे भी अपनी तरफ से अपने स्तर पर प्रयास करें। प्रदूषण उन्हीं समस्याओं में से एक है। तेज़ी से फैलते जा रहे सीमेंट कंकरीट के जंगल में पेड़ों की संख्या दिन प्रतिदिन कम होती जा रही है।  युवा पर्यावरण कार्यकर्ता गिरीश रेड्डी से मिलकर इसका एहसास और बढ़ जाता है। वो इस क्षेत्र में जागरूकता लाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं। 

प्रदूषण कई तरह से उत्पन्न होता है। जैसे ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, शोर प्रदूषण आदि। प्रदूषण से निबटने का एक सबसे कारगर तरीका होता है कि लोगों को जागरूक किया जाए और आधिक से अधिक वृक्षारोपण किया जाए। वृक्षों को न काटा जाए, लेकिन देश में बढ़ती आबादी के कारण आज जहाँ, तेजी से विकास हो रहा है, वहीं विकास योजनाओं के चलते लगातार वृक्षों को भी काटा जा रहा है। पेड़ों को ना काटा जाए इस दिशा में एक अनूठी पहल की है गिरीश रेड्डी ने। उन्होंने अपनी कंपनी 'यूज्ड टू यूज़फुल' के माध्यम से लोगों को जागरूक करने का बीड़ा उठाया है।

गिरीश का जन्म वेंकटगिरी कोटा, आन्ध्र प्रदेश में हुआ कुछ समय बाद वे शहर आये, लेकिन शहरों की चकाचौंध ने उन्हें जरा भी प्रभावित नहीं किया। वे हमेशा से ही कुछ ऐसा काम करना चाहते थे जो जमीन से जुड़ा हो। ऐसा काम जिससे समाज में एक सकारात्मक सोच का संचार हो। वे जब भी डेवलपमेंट के नाम पर या बाकी कारणों से पेड़ों को कटता हुआ देखते तो उन्हें काफी दुख होता था।

 गिरीश सदैव सोचते कि क्या पेड़ों को बचाए रखकर भी विकास कार्य नहीं किए जा सकते? क्यों इस दिशा में प्रयास नहीं होते? क्यों लोग इन छोटी लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान नहीं देते। उन्होंने तय किया कि अब वे खुद ही कुछ ऐसा करेंगे। समाज को जागरूक करने का प्रयास करेंगे, लोगों को बताएँगे कि पेड़ कितने ज़रूरी हैं। 

गिरीश ने रिसर्च शुरू की और पाया कि पेपर बनाने के लिए भी बड़ी संख्या में पेड़ों को काटा जाता है। पेपर रीसाइकल भी हो जाते हैं यानी आप पुराने पेपर को फिर प्रयोग में ला सकते हैं लेकिन भारत में मात्र 26 प्रतिशत ही पेपर रीसाइकल हो रहे हैं। पेपर बनाने के लिए पेड़ों को तो काटा ही जा रहा है और इसके प्रोडक्शन में काफी पानी का भी प्रयोग होता है। भारत हर साल 13 मिलियन टन पेपर का उत्पादन करता है। इसके अलावा 4.6 मिलियन टन पेपर इंपोर्ट करता है। और इस पेपर की खरीद के लिए भारत लगभग 3,750 रूपए देता है। एक अनुमान के अनुसार 2025 तक भारत में पेपर की खपत लगभग 26 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी, जिसके लिए 300 मिलियन पेड़ों को काटा जाएगा व पेपर के निर्माण में 100 बिलियन गैलन पानी की जरूरत पड़ेगी। 

यह काफी चौंकने वाला आंकड़ा है। भविष्य में होने वाली इसी परेशानी को भांपते हुए गिरीश रेड्डी ने यूज्ड टू यूजफुल नाम से एक कैंपेन शुरू किया। इसके माध्यम से वे लोगों को कहते हैं कि वे उन्हें पुराना कागज दें और उसके बदले वे उन्हें किताबें देते हैं। इससे वो लोगों से पुराना कागज चाहे वो अखबार हो पुरानी किताब हो सब लेते हैं और उसके बदले उन्हें किताब देते हैं। रेड्डी मानते हैं कि पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं है और वे अपने प्रयास से जहाँ एक ओर लोगों से पुराने कागज लेकर उन्हें रीसाइकल करवा रहे हैं वहीं लोगों को पढ़ाई के लिए किताबें देकर प्रोत्साहित भी कर रहे हैं। यह एक बहुत बेहतरीन शुरूआत है। वे लोगों से कागज किलो के हिसाब से लेते हैं और वजन के हिसाब से उन्हें किताबें देते हैं।

गिरीश विभिन्न स्कूलों में जाते हैं। लोगों के घरों में जाते हैं। सोशल साइट्स के माध्यम से लोगों को जागरूक करते हैं। लोग उनके स्टोर्स से किताबें या तो खुद जाकर ले सकते हैं या फिर ऑनलाइन भी मंगवा सकते हैं।

यूज्ड टू यूज़फुल का मोटो है रीड मोर, रीसाइकल मोर यानी ज्यादा पढ़ो ज्यादा रीसाइकल करो। गिरीश बताते हैं कि जब वे सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों के सामने यह डाटा रखते हैं और उन्हें पूरी जानकारी देते हैं तो बच्चे उनकी बातों को काफी ध्यान पूर्वक सुनते हैं व उनकी बातों पर अमल करते हैं। कागज को बरबाद नहीं करने का संकल्प लेते हैं। बच्चे हमारा भविष्य हैं और अगर भारत के बच्चे जागरूक हो जाएं तो भविष्य काफी अच्छा रहेगा।

रेड्डी जो भी पेपर इकट्ठा करते हैं उसे रीसाइकल प्लांट में भेज देते हैं। एक टन पेपर से 17 पेड़ कटने से बचाए जा सकते हैं और 7000 गैलन पानी बचाया जा सकता है।

यूज्ड टू यूज़फुल लाइब्रेरी के पास विभिन्न भाषाओं और विभिन्न स्तर कि किताबें हैं जिनमें उपन्यास, आध्यात्मिक किताबें, बिजनेस बुक्स, मोटिवेशनल बुक्स आदि हैं। गिरीश को अपने इस प्रयास को आगे ले जाने के लिए फंड्स की जरूरत है। वे मिलाप के जरिए, जोकि एक क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म है, फंड जुटा रहे हैं। इस फंड से वे किताबें खरीदते हैं जिनके बदले वे अखबार लोगों से लेते हैं। उनके पास गाड़ी है जोकि शहरों में घूम-घूमकर इस काम का प्रचार प्रसार कर रही है। कुछ बाइक्स हैं जिनके जरिए लोगों के घरों में किताबों की फ्री होम डिलीवरी की जाती है। गिरीश के द्वारा शुरू किया यह प्रयास को सबको मिलकर आगे ले जाना है इसमें हमारा ही नहीं, हमारी आने वाली पीढ़ियों का ही फायदा छिपा है।