युवाओं के स्टार्टअप का सार्थक प्रयास, अब रोबोट से होगी सीवर की सफाई

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 केरल के युवाओं ने एक उपाय सोचा है, जिसके तहत इंसान की जगह एक रोबोट सीवर की सफाई करेगा। सदियों से चली आ रही की इस अमानवीय प्रक्रिया को खत्म करने के लिए केरल वॉटर अथॉरिटी और केरल स्टार्टअप मिशन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किया। 

केरल के सीएम को समझौता पत्र सौंपते युवा इंजीनियर और रोबोट का मॉडल (दाहिने)
केरल के सीएम को समझौता पत्र सौंपते युवा इंजीनियर और रोबोट का मॉडल (दाहिने)
केरल के कुछ युवा और अच्छी सोच रखने वाले इंजीनियरों ने इसे काफी बुरा माना और उन्होंने इसका समाधान खोजने की दिशा में काम किया। ये इंजीनियर स्टार्टअप कंपनी जेनरोबॉटिक्स इनोवेशन के को-फाउंडर हैं। 

हाथ से मैला सफाईकर्मी कार्य का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के तहत इस काम पर पाबंदी लगाई गई है, लेकिन धरातल पर उसका सही से पालन नहीं हो रहा।

देश के संविधान में भले ही छुआछूत और जाति आधारित बुराइयों को कानूनन जुर्म माना गया है, लेकिन सीवर की सफाई और मैला ढोने जैसी अमानवीय प्रथाएं अभी भी देश के कई हिस्सों में अनवरत चल रही हैं। सीवर में कूदकर सफाई करने के कारण कई बार सफाईकर्मियों की जान भी चली जाती है। इस समस्या का समाधान करने के लिए केरल के युवाओं ने एक उपाय सोचा है, जिसके तहत इंसान की जगह एक रोबोट सीवर की सफाई करेगा। सदियों से चली आ रही की इस अमानवीय प्रक्रिया को खत्म करने के लिए केरल वॉटर अथॉरिटी और केरल स्टार्टअप मिशन ने एमओयू पर हस्ताक्षर किया। बीते गुरुवार को टेक्नॉलजी और प्रॉडक्ट्स के ट्रांसफर के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर हुआ, जिसमें सफाई के लिए रोबॉट का इस्तेमाल भी शामिल था।

टेक्नोलॉजी के समय में दुनिया एक नई दिशा में जा रही है। लेकिन कुछ प्रथाएं और प्रक्रियाएं मानवाधिकार के खिलाफ काम करती हैं। जाने-अनजाने में ये काम अभी भी हो रहे हैं। देश में जोर शोर से स्वच्छ भारत अभियान भी चलाया जा रहा है। लेकिन सीवर की सफाई की समस्या के लिए कोई ठोस उपाय अभी तक फिलहाल नहीं ढूंढ़ा गया है। सीवर में सफाई करने के लिए हमेशा दलित बिरादरी के लोगों को ही काम में लगाया जाता है। इसी साल एक खबर आई थी कि सात दिनों के भीतर सीवर साफ करने वाले सात मजदूरों की मौत हो गई।

केरल के कुछ युवा और अच्छी सोच रखने वाले इंजीनियरों ने इसे काफी बुरा माना और उन्होंने इसका समाधान खोजने की दिशा में काम किया। ये इंजीनियर स्टार्टअप कंपनी जेनरोबॉटिक्स इनोवेशन के को फाउंडर हैं। यह स्टार्टअप रोबोटिक्स और आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की दिशा में काम करता है। इस रोबोट को पेटेंट कराया जा चुका है और टीम ने इंटरनेशनल पेटेंट के लिए भी अप्लाई कर दिया है। स्टार्ट अप को केरल जल प्राधिकरण और इनोवेशन जोन की तरफ से सपोर्ट भी मिल रहा है। अगले महीने 15 फरवरी से इसका पायलट रन होगा। टीम ने देश के अलग-अलग राज्यों से विकास प्राधिकरणों और निगमों से संपर्क साधने की कोशिश की है। उनका सपना है कि पूरे भारत से हाथ से सीवर की सफाई करने की प्रथा समाप्त होनी चाहिए।

टीम के सदस्य अरुण जॉर्ज ने कहा, 'हमने स्टूडेंट के तौर पर 2015 में इस स्टार्ट अप को शुरू किया था। हमने सबसे पहले एक रोबोटिक सूट डिजाइन किया था। उसके बाद हमने दिव्यांग लोगों की मदद के बनाया था जिसकी मदद से वे चल फिर सकते हैं। इसे नेशनल ताइपे यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी में सेलेक्ट किया गया था और इसे अभी ताइवान में डेवलप किया जा रहा है।' इस टीम में अरुण के अलावा विमल गोविंद, राशिद खान, निखिल एनपी, जलीश पी, श्रीजित बाबू, अफसाल, सुदोध और विष्णु शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि हाथ से मैला सफाईकर्मी कार्य का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के तहत इस काम पर पाबंदी लगाई गई है, लेकिन धरातल पर उसका सही से पालन नहीं हो रहा। मेनहोल में कूदकर सफाई करने वाले मजदूर अक्सर शराब के नशे में सफाई करने के लिए उतरते हैं। सीवर में जहरीली गैस की वजह से कई बार उनकी जान भी चली जाती है। टीम ने तिरुवनंतपुरम और कोच्चि में रिसर्च किया और पाया कि सीवर में कई तरह के अपशिष्ट होने के कारण वे जाम हो गए हैं और उन्हें साफ करने के लिए अभी तक कोई मशीन नहीं बनाई गई है। इसलिए इंसानों को ही उसके भीतर कूदना पड़ता है।

स्टार्टअप फर्म जेनरोबॉटिक्स द्वारा डिवेलप बैंडिकूट की मदद से सीवर होल्स की सफाई की जाएगी। अभी इंसानों के द्वारा ही किए जाने वाले इस काम के लिए खास तौर पर तैयार रोबॉट में हाथ-पैर के अलावा बाल्टी भी लगी होगी और यह एक स्पाइडर वेब से अटैच होगा। यह वाई-फाई और ब्लूटूथ मॉड्यूल्स के साथ उपलब्ध होगा। बैंडिकूट रोबॉट का काम जल्द से जल्द शुरू करने की योजना है। मार्च में अट्टूकल पोंगल उत्सव के दौरान ये रोबॉट तिरुवनंतपुरम के सीवर होल्स की सफाई में लॉन्च होगा। इसका नाम एक चूहे पर रखा गया है जो बिल में पड़ी चीजों को बाहर निकाल लाता है। यह रोबोट भी उसी पद्धति पर काम करता है।

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