भूख से लड़ाई में आपकी भागीदारी ज़रूरी,"ग्लो टाइड" से जुड़िए, सुकून मिलेगा...


अपने घर, कार्यालय किसी आयोजन या संस्था का बचा हुआ खाना भेज कर सहभागिता करें

0

भूख एक वैश्विक समस्या है और विश्व के 98 % भूख से प्रभावित लोग विकासशील देशों में रहते हैं. इसमें हमारे लिए एक अत्यंत शर्मनाक तथ्य ये है कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स की अक्टूबर 2013 में जारी रिपोर्ट के अनुसार हमारे यहाँ विश्व के चौथाई भूखे लोग रहते हैं. भारत में लगभग 21 करोड़ लोग रोज भूखे सोते हैं. इसके बावजूद कि पूरे विश्व में कृषि उत्पादन में वृद्धि हुयी है और और जो कि प्रति व्यक्ति प्रति दिन के लिए आवश्यक कैलोरी के हिसाब से भी पर्याप्त है, पिछले एक दशक में, भूखे लोगों कि संख्या में कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं देता है. निश्चित तौर पर यह एक जटिल आर्थिक और राजनीतिक कारकों से प्रभावित होने वाला मुद्दा है किन्तु गरीबी और खाने की बरबादी भूख के प्रमुख कारण है.

एक तरफ हम खाने के स्थानो, कैंटीनों, शादी-विवाह जैसे अवसरों और रेस्ट्रोरेन्ट आदि में बड़ी मात्रा में खाने की बरबादी हर रोज देखते है, दूसरी तरफ अनेकों लोग अपने दोनों समय की रोटी जुटा पाने में असमर्थ हैं. मुस्तफा हाश्मी ने एक दिन इस तथ्य को बहुत करीब से देखा. हाश्मी याद करते हुए बताते हैं " मै एक दिन सैंडविच खरीदने गया तो मैंने देखा कि एक व्यक्ति पास के गंदे नाले से पानी पीने की कोशिश कर रहा है. यह एक दिल हिला देने वाला दृश्य था. मैंने जब बात की तो उसने बताया की वो 14 दिनों से उस ने खाना नहीं खाया है, और कमजोरी की वजह से वह स्वयं एक गिलास पानी भी भर पाने में असमर्थ है. हाश्मी जो कि इस समय वी आइ एफ़ कॉलेज में इन्जीनीरिंग अंतिम वर्ष के छात्र हैं, ने इस समस्या के समाधान के लिए कुछ करने का निश्चय किया. और इसके लिए उन्होंने "ग्लो टाइड" नामक संगठन की स्थापना की. यह एक गैर-मुनाफे वाला स्वैक्षिक संगठन है जो कि बर्बाद हो रहे खाने को इकठ्ठा करके शहर के भूखे लोगों के बीच बाँटता है. "ग्लो टाइड" का काम करने का तरीका ऐसा है कि वो रेस्ट्रोरेन्ट, समारोह स्थलों और कैंटीनों से बचा हुआ खाना इकठ्ठा कर के उसे पैक करके भूखे और निराश्रय लोगों के बीच में बाँट देता है. यह पिछले छ माह से कार्यरत है और वर्तमान में लगभग 125-150 लोगों को खाना मुहैय्या करा पा रहा है.इस काम में हाश्मी के साथ 6 और लोग जुड़े हुए हैं.

अब जैसे जैसे टीम का विस्तार हो रहा है, चीजें थोड़ी आसान हो रही हैं लेकिन फिर भी रेस्ट्रोरेन्ट ढूढ़ना जो कि नियमित रूप से रोजाना खाना मुहैय्या करा सकें, खाने के परिवहन की देखभाल और खाने के वितरण के लिए स्वयंसेवकों की तलाश "ग्लो टाइड" के लिए प्रमुख कठिनाईयां हैं. वो लोग अपना निजी वाहन इस्तेमाल करते हैं साथ ही उन्होंने एक ऑटो रिक्शा भी किराये पर ले रखा है और वो लोग अधिक से अधिक स्वयंसेवकों को जोड़ना चाहते हैं जिस से कि शहर के ज्यादा से ज्यादा रेस्ट्रोरेन्ट तक पहुंचा जा सके. साथ ही अन्य उन संस्थाओं के साथ सहयोग का प्रयास किया जा रहा है जो कि गृहविहीन लोगों को आश्रय मुहय्या कराती हैं. अन्य व्यवसायिक कैंटीनों से भी संपर्क किया जा रहा है. "वन कॉइन डोनेशन" अभियान भी शुरू किया जा रहा है. यह सभी कार्य "ग्लो टाइड" की प्रथमिकता सूची में है. हाश्मी कहते हैं "अगले तीन सालों में हम 20,000 लोगों को प्रति माह भोजन उपलब्ध करा पाने में समर्थ होंगें."

अगर आप भी "ग्लो टाइड" के साथ अपने घर, कार्यालय किसी आयोजन या संस्था का बचा हुआ खाना भेज कर सहभागिता करना चाहते हैं तो आप : mmalihashmi@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं. वर्तमान में वो सिर्फ हैदराबाद में ही कार्यरत हैं. इस तरह से आप उनकी मुहीम में योगदान देकर अपने बचे हुए भोजन का सर्वोत्तम उपयोग कर सकते हैं.....


यदि आपके पास है कोई दिलचस्प कहानी या फिर कोई ऐसी कहानी जिसे दूसरों तक पहुंचना चाहिए, तो आप हमें लिख भेजें editor_hindi@yourstory.com पर। साथ ही सकारात्मक, दिलचस्प और प्रेरणात्मक कहानियों के लिए हमसे फेसबुक और ट्विटर पर भी जुड़ें...