10 लाख रुपये से बनाये 1 करोड़ रुपये और खड़ा किया अपना ब्रांड

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एक महिला या हम कहें एक लड़की जिसने अपने कॉलेज के दिनों में वो सब पा लिया था जिसको हम 10साल की योजना बना कर ही हासल कर सकते हैं। वो जब 20 साल की थी तभी उन्होने अपने आइडिये पर काम करना शुरू किया और वो आइडिया था व्यक्तिगत सौन्दर्य प्रसाधन की लाइन ‘कल्लौस’। जिसके आज 6 अलग अलग राज्यों में उत्पाद बिकते हैं और इन राज्यों में सौ से ज्यादा स्टोर हैं।

मिलिए अद्भुत उद्यमी प्रियंका अग्रवाल से जिन्होने विशेष पर्सनल केयर लाइन का चयन संयोगवश किया, लेकिन आज वो सफल उद्यमी है। उनको कभी इस बात का अनुमान नहीं था कि वो कोई जोखिम ले सकती हैं। प्रियंका के मुताबिक “दिलचस्प बात ये है कि मेरा रूझान इतिहास, राजनीति शास्त्र और समाजशास्त्र की ओर था। इनके अलावा मुझे खेल और नृत्य से लगाव था। यहां तक की मेरा बचपन अनिश्चिताओं से दूर और सुरक्षित था। अगर मैं पीछे मुड़कर देखती हूं तो मैं ये सोच भी नहीं सकती कि मैं कोई जोखिम उठा सकती हूं।” लेकिन अच्छा लीडर वही होता है जिसके पास जब कोई मौका आता है तो वो उसे भुना लेता है। प्रियंका के मुताबिक “ये बात उस वक्त की है जब कॉलेज के दिनों में मैंने अपने पिता के साथ ऑफिस जाना शुरू कर दिया था। तब मेरा रूझान कारोबार की ओर होने लगा। हालांकि तब मैंने व्यक्तिगत सौन्दर्य या प्रसाधन को लेकर कुछ करने का नहीं सोचा था लेकिन मैं सैलून खोलना चाहती थी। इसलिए मैंने एक इंस्टीट्यूट से बाल और सौंदर्य से जुड़ा कोर्स किया। क्योंकि मेरा मानना था कि जिस काम को लेकर आपमें शौक और जोश हो उसे एक बार करके देखना चाहिए इसलिए मैने इस काम की गहराई में उतरने का फैसला लिया। लेकिन कुछ वक्त बाद मुझे निराशा हुई क्योंकि मुझे इस काम में मजा नहीं आ रहा था।” तब प्रियंका ने ऐसे उद्यमों की खोजबीन शुरू की जिसको लेकर उनमें उत्सुकता पैदा हो। इस तरह कुछ महिनों बाद उन्होने अपने पिता से बात की और उनसे इच्छा जताई की वो कुछ कारोबार करना चाहती है। जिसके जवाब में उनके पिता ने उनको व्यक्तिगत सौन्दर्य प्रसाधन के क्षेत्र में काम करने का सुझाव दिया, पिता की ये बात सुनकर पहले वो खूब हंसी उसके बाद उन्होने इस पर गंभीरता से सोचना शुरू किया। प्रियंका का कहना है कि “जब मैंने इस काम को शुरू किया तो मुझे ना एफएमसीजी बाजार की प्रणाली, उसके काम और प्रक्रिया के बारे में कुछ भी पता नहीं था। तब मुझे ज्यादातर लोग एक मालिक की बेटी समझते थे जो गर्मियों की छुट्टियों में अपना समय बर्बाद करने के लिए आई है। तब मैंने ना एमबीए किया था और ना ही बीबीए की पढ़ाई की थी।”

प्रियंका बताती हैं कि “हमने अपने काम को तब तक शुरू नहीं किया जब तक कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी नहीं हो जाती। पढ़ाई खत्म करने के एक साल तक हमने लोगों को अपने साथ जोड़ा अपनी रणनीति पर काम किया। तब कुछ लोगों को लगने लगा कि उनका ये आइडिया काम नहीं करेगा और हमें इसे ठंडे बस्ते में डाल देना चाहिए। बावजूद हमने टीम तैयार की और काम शुरू करने के लिये उत्पादन शुरू किया।” तब प्रियंका ने देखा कि उन पर संदेह करने वाले और आलोचकों में से कुछ लगातार उनका मनोबल गिराने में तुले थे। क्योंकि समाज में गहराई तक फैले लिंग भेद के कारण महिलाओं के लिए दुनिया के सामने अपने को साबित करना ज्यादा मुश्किल होता है। तब कुछ लोग सोचते हैं कि लड़की शादी से पहले वक्त गुजारने के लिए थोड़ा बहुत काम कर रही हैं। लड़कियां भले ही जानती हैं कि वो सबसे बेहतर हैं बावजूद वो असफल रहती हैं क्योंकि कुछ चीजें उनके खिलाफ जाती हैं। इसलिए सबसे बेहतर तरीका यही है कि इन सब से बाहर निकल उनको वो करना चाहिए जो खुद को ठीक लगे और अपने काम को आगे बढ़ाते रहना चाहिए। प्रियंका का मानना था कि आपका तजुर्बा ही आपको संतुष्ट कर सकता है इसके बजाय कि आप किसी दूसरे के सामने अपने को सही साबित करें। इसके लिए जरूरी है कि उन लोगों के साथ जुड़ा जाये जो आपकी मदद के लिये तैयार रहते हैं। आप में ऊर्जा भरते हैं और यही काम उन्होने किया।

किसी दूसरे स्टार्टअप की तरह प्रियंका को भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। युवा होने के नाते वो चुनौतियों का सामना करते गई और महिला होने के नाते ये चुनौतियां और ज्यादा कठिन थी बावजूद उन्होने उन मुश्किल हालात और गलतियों से ना सिर्फ अपने को निकाला बल्कि उनसे सीख भी ली। एक बड़ी गलती जो उन्होने की, वो थी कि उन्होने अपने काम में अपने पिता की टीम को जोड़ा जिसके पास खाने से जुड़ा तजुर्बा था। इस वजह से प्रियंका का कारोबार शुरूआत के दो महिने बिल्कुल ठंडा रहा इस दौरान उनके पास बेचने के लिए समान तो होता था लेकिन उसकी ठीक तरह से बिक्री ना होने के कारण वो बर्बाद हो रहा था। खास बात ये थी कि प्रियंका ने अपना काम शुरू करने के लिए अपने पिता से 10 लाख रुपये लिये थे। तब प्रियंका ने फैसला लिया वो अपनी अलग टीम तैयार करेंगी जो सिर्फ उनके लिये काम करे। इस तरह उन्होने चार लोगों को अपने साथ जोड़ा जिनको अपने काम को लेकर पता था कि उनको क्या करना है। इसलिए इन लोगों ने सबसे पहले टीयर2 और टीयर3 शहरों पर अपना ध्यान केंद्रीत किया। यहां पर इन लोगों ने अपने वितरकों का जाल फैलाया और ऐसे लोग और स्टोर की पहचान की जहां पर ये अपना सामान रख सकते थे।

अपने उत्पाद के पहले चरण में प्रियंका को अपने पिता का साथ मिला और उन्होने प्रियंका के काम में मुख्य रूप से निवेश किया। प्रियंका के मुताबिक “हमने 10 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया अपने कारोबार का टर्नओवर कुछ ही महिनों में बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दिया, ये भले ही कुछ लोगों के लिए ज्यादा बड़ी बात ना हो लेकिन हमारे लिए ये बड़ी बात थी। ये ऐसा कारोबार था जहां पर हिन्दुस्तान लीवर, पीएंडजी और डॉबर जैसे दिग्गज पहले से मौजूद थे। इतना ही नहीं इन दिग्गजों के अलावा क्षेत्रिय स्तर पर सैकड़ों खिलाड़ी थे। जो इस क्षेत्र में पहले से थे। शुरूआत में जहां पहले हमारे उत्पाद को लेकर कोई जानकारी नहीं मांगी जाती थी, वहीं धीरे धीरे डिस्ट्रीब्यूटर और ग्राहक हमारे उत्पाद की जानकारी मांगने लगे। ऐसे में हमारे लिए रणनीति बनाने से लेकर सप्लाई चेन बनाना पहले के मुकाबले आसान हो गया। ” इस युवा उद्यमी के मुताबिक उन्होने इस बात को अच्छी तरह सीखा है कि अपने सामने वाले को सम्मान दो और उससे सम्मान पाओ। खासतौर से तब जब आप खुद युवा हो और अपनी टीम के बॉस हो। प्रियंका के मुताबिक एक दूसरे के साथ बातचीत करते रहना और दूसरों को सुनना बहुत जरूरी होता है और जरूरत पड़ने पर अपनी टीम की प्रतिभा की प्रशंसा मुखर होकर करनी चाहिए। वो बताती हैं कि फिलहाल उन्होने अपने काम के दौरान लिंग भेद की समस्या का सामना नहीं करना पड़ा है और वो उम्मीद करती हैं कि आगे भी ऐसी किसी समस्या से उनका सामना ना हो।